तेल संकट के बीच विकल्प! 20% से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग से घटेगा कच्चे तेल का आयात, AIDA ने दिया प्रस्ताव
पश्चिम एशिया तनाव के बीच एथेनॉल एक बड़ा विकल्प बनकर उभर रहा है. उद्योग ने 20% से ज्यादा ब्लेंडिंग की पेशकश की है, जिससे भारत का कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सकती है. इससे आयात बिल घटेगा और ऊर्जा संकट के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भारत के लिए एक बड़ा विकल्प सामने लाया जा रहा है, और यह है एथेनॉल. उद्योग संगठनों का कहना है कि देश अब 20% से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे तेल आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है.
20% से ज्यादा ब्लेंडिंग के लिए तैयार उद्योग
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने सरकार को प्रस्ताव दिया है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी तक ले जाया जा सकता है. संगठन का कहना है कि मौजूदा हालात में यह कदम देश को महंगे तेल और सप्लाई संकट से बचा सकता है.
भारत पहले ही 2025 में E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) का टारगेट समय से पहले हासिल कर चुका है, जो ईंधन आयात कम करने और प्रदूषण घटाने की रणनीति का हिस्सा था.
क्यों बढ़ रही है एथेनॉल की अहमियत
भारत अपनी करीब 85% तेल की जरूरतें आयात करता है. ऐसे में पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में संकट का सीधा असर देश पर पड़ता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाई जाती है तो इससे कच्चे तेल के आयात बिल में बड़ी कमी आ सकती है और सप्लाई में आने वाले झटकों से भी बचाव होगा.
देश का एथेनॉल सेक्टर अब काफी मजबूत हो चुका है. वर्तमान में भारत की कुल उत्पादन क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर है और 380 से ज्यादा डिस्टिलरी काम कर रही हैं, जबकि कई नई यूनिट्स पाइपलाइन में हैं. इससे साफ है कि सप्लाई के लिहाज से उद्योग हाई ब्लेंडिंग के लिए तैयार है.
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आगे क्या मांगें रखीं
AIDA ने सरकार से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने, एथेनॉल आधारित कुकिंग सिस्टम शुरू करने और डीजल में भी एथेनॉल मिश्रण की संभावनाएं तलाशने की मांग की है. अगर सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाती है, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयात बिल घटेगा और साफ ईंधन को बढ़ावा मिलेगा.
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