क्रेडिट कार्ड लेते समय इन चार्ज को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, बाद में बढ़ सकता है कर्ज का बोझ
क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने से पहले उससे जुड़े चार्ज, ब्याज दर और नियमों को समझना बेहद जरूरी है. एनुअल फीस, ज्वाइनिंग फीस, कैश एडवांस फीस, लेट पेमेंट चार्ज, एपीआर और फॉरेन ट्रांजैक्शन फीस जैसे कई छिपे हुए खर्च कार्डधारकों पर बड़ा वित्तीय बोझ डाल सकते हैं. केवल मिनिमम ड्यू भरना और समय पर भुगतान न करना लंबे समय में भारी ब्याज का कारण बन सकता है.

Credit Card Charges: आज के दौर में क्रेडिट कार्ड केवल पेमेंट का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की लाइफस्टाइल और फाइनेंशियल प्लानिंग का अहम हिस्सा बन चुका है. ऑनलाइन शॉपिंग, ट्रैवल बुकिंग, बिल पेमेंट और रिवॉर्ड पॉइंट्स जैसे फायदों के कारण क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि इसके साथ कई तरह की फीस और छिपे हुए चार्ज भी जुड़े होते हैं, जिनकी जानकारी नहीं होने पर कार्डधारकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. क्रेडिट कार्ड लेने से पहले केवल ऑफर्स और कैशबैक पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है. यूजर्स को कार्ड से जुड़े सभी चार्ज, ब्याज दर और नियमों को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है. क्योंकि गलत इस्तेमाल से यह सुविधा महंगे कर्ज में बदल सकती है.
एनुअल और ज्वाइनिंग फीस को समझना जरूरी
क्रेडिट कार्ड से जुड़ा सबसे सामान्य शुल्क एनुअल चार्ज यानी एनुअल फीस होता है. यह फीस अलग-अलग कार्ड और बैंक के हिसाब से बदलती रहती है. कई मामलों में यह 250 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक हो सकती है. कुछ बैंक शुरुआती समय के लिए फ्री कार्ड का ऑफर देते हैं, लेकिन बाद में एनुअल फीस लागू हो जाती है.
इसके अलावा ज्वाइनिंग फीस भी एक बार लिया जाने वाला शुल्क होता है, जो कार्ड जारी होने के समय लगाया जाता है. कई प्रीमियम कार्ड्स में यह फीस काफी ज्यादा हो सकती है. इसलिए कार्ड चुनने से पहले इसके फायदे और खर्च की तुलना करना जरूरी माना जाता है.
कैश एडवांस सुविधा बन सकती है महंगी
कई लोग जरूरत पड़ने पर क्रेडिट कार्ड से एटीएम के जरिए कैश निकाल लेते हैं. हालांकि यह सुविधा काफी महंगी साबित हो सकती है. बैंकों की ओर से कैश एडवांस फीस के रूप में निकाली गई रकम पर 2.5 फीसदी तक चार्ज लगाया जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस रकम पर इंटरेस्ट फ्री पीरियड नहीं मिलता और पहले दिन से ही ब्याज लगना शुरू हो जाता है. क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने से यथासंभव बचना चाहिए, क्योंकि इससे कुल बकाया तेजी से बढ़ सकता है.
लेट पेमेंट और एपीआर सबसे बड़ा खतरा
अगर कार्डधारक समय पर बिल भुगतान नहीं करता, तो लेट पेमेंट चार्ज लगाया जाता है. इसके साथ ही बकाया रकम पर एनुअल परसेंटेज रेट यानी एपीआर के तहत भारी ब्याज भी वसूला जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक कई क्रेडिट कार्ड्स में ब्याज दर 33 फीसदी से 42 फीसदी सालाना तक हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में यह 50 फीसदी तक पहुंच जाती है. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स हमेशा पूरा बिल समय पर चुकाने की सलाह देते हैं. केवल मिनिमम ड्यू भरने से बाकी रकम पर लगातार ब्याज बढ़ता रहता है.
ओवर-लिमिट और फॉरेन ट्रांजैक्शन चार्ज भी अहम
कुछ बैंक कार्डधारकों को तय सीमा से ज्यादा खर्च करने की सुविधा देते हैं. हालांकि इसके बदले ओवर-लिमिट फीस ली जाती है, जो 500 रुपये या कुल अतिरिक्त खर्च का 2 से 3 फीसदी तक हो सकती है. इसके अलावा विदेश में कार्ड इस्तेमाल करने पर फॉरेन करेंसी मार्क-अप फीस भी लगती है. यह आमतौर पर ट्रांजैक्शन अमाउंट का 1 से 3 फीसदी तक होती है. इसके ऊपर 18 फीसदी जीएसटी भी जोड़ा जाता है.
रिवॉर्ड पॉइंट्स भी पूरी तरह फ्री नहीं
कई लोग मानते हैं कि रिवॉर्ड पॉइंट्स पूरी तरह मुफ्त होते हैं, लेकिन कई बैंक रिवॉर्ड रिडेम्प्शन फीस भी लेते हैं. आमतौर पर हर रिडेम्प्शन रिक्वेस्ट पर करीब 99 रुपये तक शुल्क लिया जा सकता है.
सही इस्तेमाल से ही मिलेगा फायदा
क्रेडिट कार्ड का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह क्रेडिट स्कोर मजबूत करने और खर्च मैनेज का अच्छा माध्यम बन सकता है. लेकिन बिना जानकारी के ज्यादा खर्च, लेट पेमेंट और लगातार बकाया रखने से यह बड़ा वित्तीय बोझ भी बन सकता है. इसलिए कार्ड लेने से पहले सभी चार्ज, ब्याज दर, रिवॉर्ड नियम और फाइन प्रिंट को ध्यान से समझना बेहद जरूरी माना जा रहा है.
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