अगर पिछले सालों में ITR फाइल करना भूल गए हैं तो घबराएं नहीं, अब भी बचा है यह विकल्प
अगर आपने पिछले सालों में ITR फाइल नहीं किया है तो कुछ मामलों में अब भी राहत मिल सकती है. Income Tax कानून के तहत टैक्सपेयर्स Updated Return या Condonation of Delay के जरिए पुरानी गलती सुधार सकते हैं. यह इस बात पर निर्भर करता है कि रिफंड क्लेम करना है, आय छूट गई है या रिटर्न समय पर फाइल नहीं हुई. सही कारण और जरूरी दस्तावेज होने पर टैक्स विभाग देरी से भी आवेदन स्वीकार कर सकता है.

ITR Filing: अगर आपने पिछले कुछ सालों में ITR फाइल नहीं किया है, तो भी चिंता की बात नहीं है. कई मामलों में टैक्सपेयर्स के पास अब भी राहत पाने के विकल्प मौजूद हैं. इनकम टैक्स कानून के तहत कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनके जरिए पुरानी गलती सुधारी जा सकती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने रिफंड क्लेम करना है, पुरानी रिटर्न में सुधार करना है या रिटर्न ही फाइल नहीं की थी. इसके लिए Updated Return और Condonation of Delay जैसे विकल्प उपलब्ध हैं. दोनों का इस्तेमाल अलग -अलग स्थिति में किया जाता है.
ITR छूट जाने पर भी मिल सकती है राहत
अगर किसी वजह से आपने तय समय पर ITR फाइल नहीं किया तो हर मामला पूरी तरह बंद नहीं होता. इनकम टैक्स कानून में कुछ ऐसे रास्ते हैं जिनके जरिए राहत ली जा सकती है. खासतौर पर अगर रिफंड बनता है या कोई जरूरी दावा बाकी है तो आवेदन किया जा सकता है. हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि देरी क्यों हुई और कितना समय बीत चुका है. हर केस अलग तरीके से देखा जाता है.
Updated Return और Condonation of Delay में क्या है फर्क
Updated Return और Condonation of Delay दोनों अलग विकल्प हैं. Updated Return यानी ITR U का इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई इनकम पहले छूट गई हो या जानकारी बाद में अपडेट करनी हो. इसमें अतिरिक्त टैक्स भरना पड़ सकता है. दूसरी तरफ Condonation of Delay राहत का तरीका है. इसमें टैक्सपेयर विभाग से देरी के बाद रिटर्न या रिफंड क्लेम की अनुमति मांगता है. इसके लिए विभाग की मंजूरी जरूरी होती है.
कौन कर सकता है Condonation of Delay के लिए आवेदन
अगर ITR फाइल नहीं हो सकी और उसके पीछे कोई सही कारण है तो टैक्सपेयर आवेदन कर सकता है. इसमें लंबी बीमारी, अस्पताल में भर्ती होना, परिवार में किसी की मौत, मानसिक परेशानी, पारिवारिक आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा जैसे कारण शामिल हो सकते हैं. सैलरी पाने वाले लोग, सीनियर सिटिजन, NRI और फ्रीलांसर भी इसका लाभ ले सकते हैं. विभाग हर आवेदन को अलग तरीके से जांचता है.
कितने समय तक किया जा सकता है आवेदन
जानकारों के मुताबिक रिफंड क्लेम या नुकसान आगे ले जाने के लिए Condonation of Delay का आवेदन आमतौर पर संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के छह साल तक किया जा सकता है. हालांकि यह तय नहीं है कि हर आवेदन मंजूर ही हो. टैक्स विभाग यह देखता है कि देरी का कारण सही है या नहीं. साथ ही यह भी देखा जाता है कि दावा सही और भरोसेमंद है या नहीं. इसके बाद फैसला लिया जाता है.
आवेदन के लिए किन डॉक्यूमेंट की होगी जरूरत
अगर कोई टैक्सपेयर Condonation of Delay के जरिए राहत चाहता है तो उसे कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट देने होंगे. इसमें मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल के कागज और डॉक्टर का सर्टिफिकेट शामिल हो सकता है. अगर परिवार में मौत हुई है तो डेथ सर्टिफिकेट देना होगा. प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना से जुड़े सबूत भी मांगे जा सकते हैं. NRI के लिए पासपोर्ट या यात्रा से जुड़े दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं. साथ ही रिफंड का प्रमाण और एक लिखित स्पष्टीकरण भी देना पड़ सकता है.
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आवेदन के बाद कैसे होता है फैसला
दस्तावेज जमा होने के बाद टैक्स विभाग आवेदन की जांच करता है. विभाग यह देखता है कि देरी का कारण कितना सही है और टैक्सपेयर का दावा कितना मजबूत है. अगर विभाग को कारण सही लगता है तो राहत दी जा सकती है. अगर दावा सही नहीं पाया गया तो आवेदन खारिज भी हो सकता है. इसलिए आवेदन करते समय सही जानकारी और जरूरी दस्तावेज देना बहुत जरूरी है. इससे मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है.