गैस संकट के बीच Coal India बनाएगी सिंगैस, जानें एनर्जी सप्लाई में कैसे करेगा मदद; शेयरों पर दिखेगा असर?

गैस सप्लाई संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Coal India ने कोल-टू-सिंगैस प्रोजेक्ट्स पर फोकस बढ़ा दिया है. कंपनी पावर प्लांट्स, फर्टिलाइजर यूनिट्स और DRI प्लांट्स के पास सिंगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है. National Mission on Coal Gasification के तहत यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयातित गैस पर निर्भरता कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

कोयला उत्पादन. Image Credit: tv9 bharatvarsh

Coal India Syngas Project: देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी Coal India अब गैस संकट के बीच ऊर्जा और केमिकल सेक्टर में बड़ा विस्तार करने की तैयारी कर रही है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और गैस सप्लाई में बढ़ती अनिश्चितता के बीच कंपनी कोल-टू-सिंगैस प्रोजेक्ट्स स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है. इन प्रोजेक्ट्स को गैस आधारित पावर प्लांट्स, फर्टिलाइजर यूनिट्स और डायरेक्ट-रिड्यूस्ड आयरन यानी DRI प्लांट्स के पास विकसित किया जाएगा, ताकि उद्योगों को लगातार गैस सप्लाई मिल सके और इम्पोर्टेड गैस पर निर्भरता कम हो.

कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी

पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि Coal India Ltd यानी CIL ने इस दिशा में शुरुआती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. कंपनी देश के National Mission on Coal Gasification के तहत सिंगैस उत्पादन क्षमता विकसित करना चाहती है. सिंगैस यानी सिंथेटिक गैस एक ऐसा फ्यूल और फीडस्टॉक है, जिसका इस्तेमाल क्लीन फ्यूल, फर्टिलाइजर, केमिकल्स और बिजली उत्पादन में किया जाता है.

भारत में प्राकृतिक गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई और कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. ऐसे में सरकार घरेलू संसाधनों के जरिए वैकल्पिक ऊर्जा समाधान तैयार करने पर जोर दे रही है. Coal India का यह कदम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

दो अलग मॉडल पर काम करेगी कंपनी

Coal India इस परियोजना को दो अलग-अलग मॉडल के तहत विकसित करने की योजना बना रही है. पहला मॉडल पिटहेड आधारित होगा. इसके तहत कोयला खदानों के पास सिंगैस उत्पादन हब बनाए जाएंगे. यहां तैयार होने वाली सिंगैस को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए आसपास के इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स तक पहुंचाया जाएगा. इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कोयले की ढुलाई लागत कम हो जाएगी.

साथ ही उद्योगों को सस्ती दरों पर सिंगैस उपलब्ध कराई जा सकेगी. कंपनी का उद्देश्य अपने उपलब्ध जमीन क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए बड़े सिंगैस हब तैयार करना है. दूसरे मॉडल के तहत सिंगैस उत्पादन यूनिट्स सीधे गैस आधारित पावर प्लांट्स, DRI यूनिट्स या फर्टिलाइजर प्लांट्स के पास लगाए जाएंगे. इससे गैस सप्लाई में बाधा की संभावना कम होगी और उद्योगों को लगातार ईंधन मिलता रहेगा.

शेयर पर रहेगी नजर

कंपनी के इस फैसले के बाद सोमवार को इसके शेयर पर निवेशकों की नजर रहने वाली है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.79 फीसदी गिरकर 456.55 रुपये पर पहुंच गया, जबकि बीते एक सप्ताह में इसमें 1.19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि कंपनी के शेयर में पिछले एक महीने और तीन महीने में क्रमशः 0.93 फीसदी और 7.68 फीसदी की तेजी देखने को मिली है.

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