22 Feb 2025
Teaswita Upadhyay
Mamaearth की सह-संस्थापक गजल अलग ने ऑफिस में टॉक्सिक मैनेजमेंट की पहचान करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण संकेत साझा किए हैं. उनके अनुसार, टॉक्सिक मैनेजमेंट प्रोडक्शन से ज्यादा आपके ऊपर अपने कंट्रोल पर ध्यान देते हैं.
टॉक्सिक मैनेजर्स ऐसे लोगों को नौकरी पर रखते हैं जो आदेशों का पालन करें, न कि वे जो नए विचार लाएं या समस्याओं को हल करें. वे कंट्रोल बनाए रखने के लिए ऐसे कर्मचारियों को चुनते हैं, जो सवाल न करें.
कंट्रोल के लिए नियुक्ति
ऐसा मैनेजमेंट चाहता हैं कि कर्मचारी सवाल न करें और चुपचाप काम करें. इससे टीम की नवाचार क्षमता कमजोर होती है और विकास बाधित होता है. एक अच्छा लीडर जिज्ञासा को बढ़ावा देता है, न कि उसे दबाता है.
सवाल पूछने से रोकना
टॉक्सिक मैनेजमेंट में नए विचारों को महत्व नहीं दिया जाता, बल्कि केवल बॉस की मंजूरी लेने पर जोर दिया जाता है. इससे संगठन में ठहराव आ जाता है और कर्मचारियों की रचनात्मकता समाप्त हो जाती है.
आइडिया से ज्यादा अप्रूवल की मांग
गजल अलघ कहती हैं, कमजोर लीडरशिप वाले लोग फीडबैक लेने से बचते हैं. वे मुश्किल बातचीत से कतराते हैं और केवल वही सुनना चाहते हैं, जो उनके पक्ष में हो. जबकि एक सफल लीडर सुधार की गुंजाइश पर ध्यान देता है और हमेशा पूछता है, "हम कैसे बेहतर कर सकते हैं?"
फीडबैक से डरना
सफल संगठन वे होते हैं जहां विविध विचारों का स्वागत किया जाता है. लेकिन टॉक्सिक मैनेजर सिर्फ हां में हां मिलाने वाले कर्मचारियों को पसंद करते हैं, जिससे नवाचार और प्रगति रुक जाती है.
'यस-मैन' की टीम बनाना
गजल के मुताबिक, टॉक्सिक मैनेजमेंट अक्सर कर्मचारियों के आत्मविश्वास को कमजोर करते हैं. वे आलोचना तो करते हैं, लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देते, जिससे कर्मचारियों का आत्मसम्मान गिरता है और उनकी उत्पादकता प्रभावित होती है.
कर्मचारियों में आत्मविश्वास खत्म करना
ऐसे मैनेजर अनावश्यक दबाव और भय का माहौल बनाते हैं. इससे कर्मचारी काम से असंतुष्ट महसूस करते हैं और उनका प्रदर्शन भी कमजोर होता है. एक स्वस्थ कार्यस्थल सहयोग और पारदर्शिता पर आधारित होता है.
ऑफिस का नकारात्मक माहौल