जींस पर लगे छोटे बटन सिर्फ फैशन नहीं हैं, 150  साल पुराना है आईडिया

22 May 2026

Pradyumn Thakur

जींस पर तांबे के बटन

क्या आप जानते हैं कि आपकी पसंदीदा जींस की जेबों के कोनों पर लगे वो छोटे तांबे के बटन सिर्फ फैशन के लिए नहीं हैं? जिन्हें हम आज स्टाइल स्टेटमेंट मानते हैं, उनके पीछे कपड़ा फटने से बचाने की एक कमाल की इंजीनियरिंग और डेढ़ सौ साल पुराना इतिहास छिपा है. 

रिवेट्स

इन्हें फैशन की दुनिया में 'रिवेट्स' (Rivets) कहा जाता है. ये छोटे-छोटे गोल तांबे के बटन होते हैं, जिन्हें जेब के कोनों पर बहुत मजबूती से ठोंककर फिक्स किया जाता है.

1873 में हुई थी शुरुआत

इस आइडिया की शुरुआत साल 1873 में हुई थी. जैकब डेविस नाम के एक दर्जी ने मजदूरों की जींस को जल्दी फटने से बचाने के लिए पहली बार इन रिवेट्स का इस्तेमाल किया था.

लीवाईस कनेक्शन

जैकब के पास इस खोज को पेटेंट कराने के पैसे नहीं थे. तब उन्होंने कपड़ा व्यापारी लीवाई स्ट्रॉस (Levi Strauss) से हाथ मिलाया और दोनों ने मिलकर इस सुरक्षा डिजाइन को पेटेंट कराया.

फटने से बचाव

मजदूरों की जेबें भारी औजार रखने के कारण कोनों से सिलवटें खाकर सिलाई से उखड़ जाती थीं. तांबे के ये रिवेट्स उस सिलाई के जोड़ को एक्स्ट्रा मजबूती देकर फटने से बचाते हैं।

तनाव नियंत्रण

जब हम जेब में हाथ डालते हैं या मोबाइल जैसी भारी चीजें रखते हैं, तो कपड़े के जोड़ों पर खिंचाव पड़ता है. रिवेट्स इस तनाव (Stress) को पूरे कपड़े पर बराबर बांट देते हैं.

पीछे का बटन

शुरुआती दिनों में जींस की पीछे वाली जेबों पर भी ये रिवेट्स होते थे। लेकिन जब लोगों ने शिकायत की कि इससे बैठने पर लकड़ी की कुर्सियां और सोफे छिल जाते हैं, तो इन्हें हटा दिया गया।

आज का रूप

आज आधुनिक सिलाई तकनीक बहुत मजबूत हो चुकी है, फिर भी कंपनियां इस क्लासिक डिजाइन को बनाती हैं. अब यह मजबूती देने के साथ-साथ जींस की असली पहचान और स्टाइल बन चुका है.