07 march 2026
Tejaswita Upadhyay
अफगानिस्तान में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद महिलाओं की आज़ादी और शिक्षा पर कई सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं. ऐसे माहौल में अफगान महिलाओं का लेखन केवल साहित्य नहीं बल्कि प्रतिरोध और अपनी आवाज को बचाने का जरिया बन गया है.
हाल के वर्षों में कई ऐसी किताबें सामने आई हैं जो वहां की महिलाओं के अनुभव, संघर्ष और उम्मीदों को सामने लाती हैं. ऐसी ही पांच किताबों की लिस्ट हम आपके लिए लेकर आए हैं.
My Dear Kabul: A Year in the Life of an Afghan Women’s Writing Group
यह किताब 21 अफगान महिलाओं की सामूहिक डायरी की तरह है. व्हाट्सऐप चैट्स और व्यक्तिगत नोट्स पर आधारित यह पुस्तक बताती है कि तालिबान के सत्ता संभालने के दौरान युवा महिलाएं डर, अनिश्चितता और उम्मीद के बीच किस तरह अपना जीवन जी रही थीं.
Rising After the Fall
Lucy Hannah और Zarghuna Kargar द्वारा संपादित यह किताब खास तौर पर युवा पाठकों के लिए लिखी गई है. इसमें अफगान लड़कियों के अनुभवों के छोटे-छोटे अंश हैं, जो शिक्षा, घर और आज़ादी से जुड़े उनके संघर्ष और छोटे-छोटे प्रतिरोधों को दिखाते हैं.
We Are Still Here: Afghan Women on Courage, Freedom, and the Fight to Be Heard
Nahid Shahalimi द्वारा संपादित यह किताब 13 अफगान महिलाओं के लेखों और अनुभवों का संग्रह है. इसमें पत्रकारों, कलाकारों और कार्यकर्ताओं की आवाज़ शामिल है, जो तालिबान के दौर में भी अपने अधिकारों और पहचान के लिए संघर्ष जारी रखे हुए हैं.
Dancing in the Mosque: An Afghan Mother’s Letter to Her Son
Homeira Qaderi की यह मार्मिक आत्मकथा एक मां के अपने बेटे को लिखे पत्र के रूप में है. इसमें उनका निजी जीवन, विवाह, तलाक और बेटे से बिछड़ने का दर्द दिखता है, साथ ही अफगान समाज में महिलाओं की सीमाओं पर गहरी टिप्पणी भी मिलती है.
The Pearl that Broke Its Shell
Nadia Hashimi का यह उपन्यास Rahima नाम की लड़की की कहानी है, जिसे बाचा पोश बनाकर लड़के की तरह पाला जाता है ताकि वह घर के काम और जिम्मेदारियां निभा सके. यह कहानी अफगान समाज में महिलाओं की जद्दोजहद और साहस को दर्शाती है.