लॉकर से सोना गायब तो क्या करेगा बैंक, जानें कितना मिलेगा मुआवजा

25 Feb 2026

vivek singh

बैंक लॉकर क्या है

बैंक लॉकर एक सुरक्षित सुविधा है जहां ग्राहक अपने गहने, कीमती सामान और जरूरी दस्तावेज रख सकते हैं. इसे सेफ डिपॉजिट लॉकर भी कहा जाता है.  

आरबीआई के नियमों के अनुसार वही व्यक्ति लॉकर ले सकता है जिसका बैंक में सेविंग या करंट अकाउंट हो. लॉकर खोलने के लिए पैन या आधार और एड्रेस प्रूफ देना जरूरी होता है.

कौन ले सकता है लॉकर

बैंक कभी कभी लॉकर के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट मांगते हैं. नियम के अनुसार एफडी की राशि लॉकर के सालाना किराए के तीन गुना से ज्यादा नहीं हो सकती. इससे ज्यादा रकम मांगना सही नहीं है.

एफडी की कितनी जरूरत

लॉकर का साइज ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार चुन सकता है. छोटे और बड़े दोनों तरह के लॉकर उपलब्ध होते हैं. किराया साइज और ब्रांच की लोकेशन पर निर्भर करता है.

 लॉकर का साइज और रेंट

लॉकर में गहने, कीमती पत्थर और दस्तावेज रखे जा सकते हैं. कैश, हथियार, विस्फोटक, ड्रग्स या कोई अवैध सामान रखना मना है. सड़ने वाली या खतरनाक चीजें भी लॉकर में नहीं रखी जा सकती.

क्या रख सकते हैं और क्या नहीं

लॉकर की एक चाबी ग्राहक को दी जाती है जबकि मास्टर की बैंक के पास रहती है. लॉकर खोलने के लिए दोनों की जरूरत होती है. इससे सुरक्षा का स्तर बनाए रखा जाता है.

 मास्टर की किसके पास

अगर बैंक की लापरवाही से लॉकर का सामान चोरी हो जाए या खराब हो जाए तो बैंक जिम्मेदार होगा. आरबीआई ने बैंकों को सुरक्षा के पूरे इंतजाम रखने का निर्देश दिया है.

 सामान गायब हो जाए तो जिम्मेदारी

आरबीआई के नियम के मुताबिक बैंक की जिम्मेदारी लॉकर के सालाना किराए के 100 गुना तक ही होती है. यानी अगर किराया 3000 रुपये है तो अधिकतम 3 लाख रुपये तक का ही मुआवजा मिलेगा.

 कितना मिलेगा मुआवजा