12 Jan 2026
Tejas
अगर आपका म्यूचुअल फंड छह महीने या एक साल से लगातार बेंचमार्क या समान कैटेगरी के फंड से कमजोर रिटर्न दे रहा है, तो निवेश पर दोबारा विचार जरूरी है.
जब कोई फंड लंबे समय तक सेंसेक्स या निफ्टी जैसे बेंचमार्क को बीट नहीं कर पा रहा हो, तो वह आपकी वेल्थ ग्रोथ को धीमा कर सकता है. ऐसे फंड से धीरे धीरे निकासी करना एक व्यावहारिक फैसला हो सकता है.
समय के साथ इक्विटी और डेट का अनुपात बिगड़ सकता है. अगर इक्विटी का हिस्सा बहुत बढ़ गया है, तो कुछ रकम निकालकर डेट में शिफ्ट करना जरूरी हो जाता है. इससे रिस्क कंट्रोल में रहता है.
अगर लार्ज कैप एक्टिव फंड लगातार इंडेक्स फंड से कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो इंडेक्स फंड में शिफ्ट करना समझदारी है. इसके लिए मौजूदा फंड से पैसा निकालना जरूरी होता है.
अगर आपने किसी खास लक्ष्य के लिए निवेश किया था और वह लक्ष्य समय से पहले पूरा हो गया है, तो पैसा निकाल लेना बेहतर होता है. ज्यादा लालच में निवेश बनाए रखने से मार्केट गिरावट का खतरा बढ़ सकता है.
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन लिमिट को ध्यान में रखकर हर साल सीमित रकम निकालना टैक्स बचाने का अच्छा तरीका है. इससे रिटर्न सुरक्षित रहता है और टैक्स का बोझ कम होता है.
इक्विटी फंड में एक साल बाद 1.25 लाख रुपये तक का लाभ टैक्स फ्री होता है. डेट फंड पर टैक्स स्लैब के अनुसार लगता है. सही होल्डिंग पीरियड से टैक्स बचाया जा सकता है.
अगर अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो लिक्विड या शॉर्ट टर्म फंड से निकासी बेहतर रहती है. इससे लॉन्ग टर्म निवेश को नुकसान नहीं होता और टैक्स इम्पैक्ट भी कम रहता है.