26 Feb 2026
vivek singh
अगर आपकी सैलरी उसी बैंक में आती है, तो बैंक के पास आपकी पूरी वित्तीय जानकारी पहले से होती है. इससे प्री-अप्रूव्ड लोन जल्दी प्रोसेस होते हैं और पैसे खाते में जल्दी ट्रांसफर हो सकते हैं.
लोन की रफ्तार सिर्फ रकम पर नहीं, बल्कि आपकी इनकम की स्थिरता और साफ-सुथरी तस्वीर पर निर्भर करती है. अलग-अलग सोर्स से अनियमित पैसे आने पर बैंक को अतिरिक्त जांच करनी पड़ती है.
सेल्फ एम्प्लॉयड लोगों को स्टेटमेंट, जीएसटी और आईटीआर की विस्तृत जांच से गुजरना पड़ता है. किसी महीने की अनियमितता भी ऑटो प्रोसेसिंग से निकालकर मैनुअल वेरिफिकेशन में भेज सकती है, जिससे समय बढ़ जाता है.
अच्छा क्रेडिट स्कोर लोन जल्दी पाने में मदद करता है. लेकिन बड़ी राशि या पहले से चल रही ईएमआई के साथ जुड़ा स्कोर बैंक को अतिरिक्त जांच के लिए प्रेरित करता है, जिससे अंतिम अप्रूवल और पैसे मिलने में समय लगता है.
हर बैंक लोन अप्रूवल के बाद तुरंत पैसा नहीं देता. कुछ बैंक दिन में एक या दो बार फंड ट्रांसफर करते हैं. वीकेंड, छुट्टियां और कट ऑफ टाइम भी राशि मिलने के समय को प्रभावित करते हैं.
डिजिटल लेंडर ऑनलाइन वेरिफिकेशन, साइन और ई-मैंडेट के कारण ज्यादा तेज होते हैं. नए ग्राहकों के लिए भी प्रक्रिया आसान रहती है और कई मामलों में कुछ घंटों में ही राशि खाते में ट्रांसफर हो सकती है.
अगर आपके पास प्री-अप्रूव्ड ऑफर है, तो पैसा उसी दिन मिल सकता है. बैंक को आपकी जानकारी पहले से होने के कारण अप्रूवल और डिस्बर्सल प्रक्रिया काफी तेज होती है.
सैलरीड लोगों के लिए एक से तीन वर्किग डे सामान्य है. नए बैंक या बिजनेस इनकम वाले लोगों के लिए पांच से सात वर्किग लग सकते हैं. कुछ मामलों में यह समय बैंक और लेंडर की आंतरिक प्रक्रिया पर भी निर्भर करता है.