इन 5 गलतियों से बढ़ सकता है पर्सनल लोन का खर्च! 

30  August 2025

Satish Vishwakarma 

आजकल पर्सनल लोन जल्दी पैसे का सबसे आसान तरीका है. लेकिन कई बार इसमें ऐसे छिपे खर्च होते हैं, जिनके कारण EMI भारी लगने लगती है. आइए जानते हैं वो 5 आम गलतियां जिनसे लोन का खर्च बढ़ता है.

पर्सनल लोन

पर्सनल लोन साइन करने से पहले उसकी हर शर्त समझना जरूरी है. जैसे कि ब्याज दर, रीपेमेंट अवधि, लोन प्रोसेसिंग फीस और प्रीपेमेंट चार्ज. इन बातों को न समझने से हमारा लोन तो सस्ता दिखेगा, लेकिन असल में ज्यादा महंगा पड़ जाएगा.

क्यों समझना है जरूरी

अक्सर लोग सिर्फ ब्याज दर देखते हैं, लेकिन प्रोसेसिंग फीस 0.5 फीसदी से 3 फीसदी, स्टाम्प ड्यूटी, लेट पेमेंट फीस, प्रीपेमेंट चार्जेस जैसी चीजें लोन की असली कीमत बढ़ा देती हैं. ये चार्जेस शुरुआत में छोटे लगते हैं, लेकिन पूरे लोन पर बड़ा असर डालते हैं. 

छिपे खर्च झटका

पर्सनल लोन की ब्याज दरें अलग-अलग बैंकों में 10.90 फीसदी से 24 फीसदी तक हो सकती हैं. अगर आपकी प्रोफाइल के कारण ब्याज बढ़ा दिया गया, तो EMI भी बढ़ेगी. इससे कुल ब्याज का बोझ बढ़ जाता है और आपको लोन लंबी अवधि में महंगा पड़ता है. 

बढ़ती ब्याज दरों का दबाव

कई बार लोग एक साथ कई पर्सनल लोन ले लेते हैं. इससे मासिक EMI का बोझ बढ़ जाता है और समय पर पेमेंट न करने का खतरा भी रहता है. अगर ऐसा हुआ, तो हमारा क्रेडिट स्कोर गिर सकता है और फ्यूचर में लोन लेना मुश्किल हो सकता है.

एक से ज्यादा लोन का जाल

EMI कम करने के लिए ज्यादा लंबी अवधि का लोन लेना आकर्षक लगता है. लेकिन ऐसा करने से कुल ब्याज बहुत ज्यादा हो जाता है.  कम अवधि में EMI ज्यादा होगी, लेकिन कुल ब्याज में काफी बचत होगी. 

लंबी अवधि, ज्यादा इंटरेस्ट

अगर आप सही रणनीति नहीं बनाते, तो लोन का खर्च बढ़ जाता है. जैसे- पार्ट पेमेंट करने का मौका न लेना, कम ब्याज दर पर लोन रीफाइनेंस न करना और ज्यादा ब्याज वाले कर्ज को पहले न चुकाना.

 रिपेमेंट प्लानिंग की कमी