02/01/2026
Pradyumn Thakur
रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी के लिए पहले से पैसा जोड़ना बहुत जरूरी होता है. नौकरी के दौरान कार, घर और बच्चों की पढ़ाई पर खर्च होता है, लेकिन हर महीने थोड़ा पैसा रिटायरमेंट के लिए बचाना भविष्य को सुरक्षित बनाता है.
रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड ऐसे फंड होते हैं जो खास तौर पर रिटायरमेंट के लिए बनाए जाते हैं. ये solution-oriented category में आते हैं और लंबे समय के निवेश को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं ताकि बुढ़ापे में मजबूत फंड मिल सके.
रिटायरमेंट के लिए लोग PPF, FD, NPS और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प चुनते हैं. कम जोखिम पसंद करने वाले FD और PPF में जाते हैं, जबकि ज्यादा जोखिम लेने वाले इक्विटी, NPS और म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं.
रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड अभी बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हैं. फिर भी इनके तहत कई स्कीमें मौजूद हैं और लाखों निवेशक जुड़े हुए हैं. ये फंड खास रिटायरमेंट लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं.
इन फंड्स में आमतौर पर पांच साल का लॉक-इन होता है. इससे निवेशक जल्दी पैसा नहीं निकाल पाते और निवेश में अनुशासन बना रहता है. लंबे समय में यही अनुशासन बेहतर रिटर्न दिलाने में मदद करता है.
रिटायरमेंट फंड में निवेश करने से पैसा अलग-अलग एसेट्स में फैलता है. ज्यादातर लोग पहले से PPF और FD में निवेश करते हैं, ऐसे में यह फंड रिटायरमेंट पोर्टफोलियो को संतुलित बनाता है.
PPF और NPS की तुलना में रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड ज्यादा लचीले होते हैं. इनमें निकासी के नियम आसान होते हैं और उम्र व जोखिम के हिसाब से अलग-अलग निवेश विकल्प मिलते हैं.