17/02/2026
Pradyumn Thakur
मार्केट में उतार चढ़ाव हमेशा रहता है इसलिए निवेश को अलग अलग जगह लगाना जरूरी होता है ताकि अगर एक जगह नुकसान हो तो दूसरी जगह से फायदा मिल सके और कुल नुकसान कम हो जाए इसलिए समझदारी से पोर्टफोलियो बनाना बहुत जरूरी होता है.
डायवर्सिफिकेशन का मतलब है अपना पैसा अलग अलग निवेश विकल्पों में लगाना जैसे शेयर म्यूचुअल फंड और डेब्ट इससे जोखिम कम होता है और अगर एक निवेश खराब प्रदर्शन करे तो बाकी निवेश आपको संभाल सकते हैं और आपका पैसा सुरक्षित रहता है.
कोरिलेशन बताता है कि दो निवेश एक साथ कैसे चलते हैं कुछ निवेश साथ साथ बढ़ते हैं और कुछ उल्टा चलते हैं इसलिए जरूरी है कि ऐसे निवेश चुनें जो एक दूसरे पर ज्यादा निर्भर ना हों ताकि जोखिम कम हो सके.
हेजिंग और डायवर्सिफिकेशन अलग होते हैं हेजिंग में आप नुकसान से बचने के लिए उल्टा निवेश करते हैं लेकिन मुश्किल समय में यह काम नहीं करता इसलिए बेहतर है कि आप सही तरीके से अलग अलग निवेश करें और जोखिम को कम करें.
पूरी रकम एक साथ निवेश करना सही नहीं होता क्योंकि मार्केट कब ऊपर जाएगा या नीचे आएगा यह कोई नहीं जानता इसलिए धीरे धीरे पैसा लगाएं ताकि जोखिम कम हो और सही समय पर खरीदारी का फायदा मिल सके.
SIP यानी हर महीने थोड़ी रकम निवेश करना एक अच्छा तरीका है इससे आप बाजार के उतार चढ़ाव से बच सकते हैं और लंबे समय में औसत कीमत कम हो जाती है जिससे आपको अच्छा रिटर्न मिलने का मौका बढ़ जाता है.
शेयर बाजार में छोटी अवधि में जोखिम ज्यादा होता है लेकिन लंबी अवधि में बाजार अक्सर बढ़ता है इसलिए निवेश को लंबे समय तक बनाए रखें और घबराकर जल्दी पैसा निकालने की गलती ना करें इससे आपको बेहतर रिटर्न मिल सकता है.
निवेश को अलग अलग सेक्टर जैसे बैंकिंग हेल्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर में बांटना जरूरी है क्योंकि हर सेक्टर का प्रदर्शन अलग होता है इससे आपका पैसा सुरक्षित रहता है और किसी एक सेक्टर में नुकसान होने पर पूरा पोर्टफोलियो प्रभावित नहीं होता.
सिर्फ इक्विटी ही नहीं बल्कि डेब्ट में भी निवेश फैलाना जरूरी है जैसे लिक्विड फंड शॉर्ट टर्म फंड और बॉन्ड इससे आपका पोर्टफोलियो संतुलित रहता है और जोखिम कम होता है जिससे स्थिर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ती है.