04/07/2026
Kumar Saket
सरकार ने EPF यानी Employees’ Provident Fund से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. नए EPF Scheme 2026 के तहत अब पैसे निकालने के नियम में कई नए बदलाव किए गए हैं. इसका मकसद कर्मचारियों को जरूरत के समय पैसा देना और रिटायरमेंट बचत को सुरक्षित रखना है.
सरकार ने पुरानी EPF Scheme 1952 को हटाकर अब EPF Scheme 2026 लागू कर दी है. यह नया नियम 29 जून से लागू हो गया है. आसान भाषा में समझें तो अब PF से पैसे निकालने के नियम पहले से थोड़े अलग हो गए हैं. सरकार का कहना है कि इसका मकसद लोगों को जरूरत के समय मदद देना है.
Employees’ Provident Fund
नए नियम के मुताबिक, EPF खाते से पैसा निकालते समय कम से कम 25% बैलेंस खाते में रखना जरूरी होगा. इसे “minimum balance rule” कहा गया है. मान लीजिए किसी कर्मचारी के EPF खाते में 1,00,000 रुपये हैं, तो उसमें से 25,000 रुपये हमेशा खाते में रहेंगे. इसका मतलब यह है कि आप पूरे पैसे एक साथ नहीं निकाल सकते.
खाते में 25% पैसा रखना जरूरी
नए EPF नियमों में कई जरूरी कारणों के लिए पैसे निकालने की सुविधा दी गई है. मेडिकल जरूरत अगर कर्मचारी या परिवार के किसी सदस्य की तबीयत खराब है, तो 12 महीने की सदस्यता के बाद 100% तक पैसा निकाला जा सकता है.
किन कामों के लिए पैसा निकाल सकते हैं?
बच्चों या खुद की पढ़ाई के लिए भी पैसा निकाला जा सकता है. यह सुविधा 12 महीने बाद मिलती है और इसे 10 बार तक इस्तेमाल किया जा सकता है. शादी के खर्च के लिए भी EPF से पैसा निकाला जा सकता है. यह सुविधा 5 बार तक उपलब्ध है.
पढ़ाई या शादी
घर खरीदने, प्लॉट लेने, घर बनाने, लोन चुकाने या घर की मरम्मत के लिए EPF से पैसा निकाला जा सकता है. अगर कोई व्यक्ति नौकरी छोड़ देता है और 12 महीने पूरे नहीं हुए हैं, तब भी वह पैसा निकाल सकता है. लेकिन यह सुविधा साल में सिर्फ 2 बार मिलती है.
घर खरीदना या नौकरी छोड़ने पर
पहले कई बार कर्मचारी अपना पूरा PF निकाल लेते थे, जिससे उनकी रिटायरमेंट सेविंग कम हो जाती थी. अब सरकार ने इस पर रोक लगाई है ताकि लोग भविष्य के लिए भी पैसा बचाकर रखें.
क्या बदला है पुराने नियमों से?