हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम हुआ रिजेक्ट तो न घबराएं, ऐसे मिलेगा पैसा

17/02/2026

VIVEK SINGH

हेल्थ इंश्योरेंस व्यक्ति और कंपनी के बीच एक समझौता होता है. बीमारी, एक्सीडेंट या चोट की स्थिति में अस्पताल खर्च कंपनी उठाती है. इसमें भर्ती खर्च, दवाएं, डॉक्टर फीस और एम्बुलेंस चार्ज शामिल होते हैं. इसके बदले हर साल प्रीमियम देना जरूरी होता है.

हेल्थ इंश्योरेंस क्या है

कई बार पॉलिसी की शर्तें न समझने से क्लेम रिजेक्ट हो जाता है. वेटिंग पीरियड पूरा न होना, लिमिट से ज्यादा क्लेम करना या गलत जानकारी देना इसकी बड़ी वजहें हैं. समय पर डॉक्यूमेंट जमा न करना भी कारण बन सकता है.

क्लेम रिजेक्ट क्यों होता है

हर पॉलिसी में कुछ बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड होता है. इससे पहले क्लेम करने पर रिजेक्शन तय है. साथ ही सम इंश्योर्ड की सीमा से ज्यादा राशि मांगने पर भी क्लेम खारिज किया जा सकता है.

वेटिंग पीरियड और लिमिट का ध्यान रखें

पॉलिसी लेते समय अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री बताना जरूरी है. किसी बीमारी को छिपाने पर कंपनी क्लेम अस्वीकार कर सकती है. अधूरी जानकारी और गलत डॉक्यूमेंट भी जोखिम बढ़ाते हैं.

सही जानकारी देना है जरूरी

अस्पताल में भर्ती होते ही कंपनी या टीपीए को सूचना दें. सभी मेडिकल रिपोर्ट, बिल और डिस्चार्ज समरी सुरक्षित रखें. नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस सुविधा चुनना आसान विकल्प होता है.

समय पर जानकारी

प्रीमियम समय पर न भरने या पॉलिसी रिन्यू न कराने पर क्लेम अमान्य हो सकता है. लगातार कवरेज बनाए रखना जरूरी है. इससे भविष्य में क्लेम प्रोसेस आसान रहता है.

पॉलिसी का समय पर रिन्यूअल

अगर क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो पहले कंपनी के ग्रिवेंस सेल में लिखित शिकायत करें. कई मामलों में कंपनी दोबारा जांच कर फैसला बदल सकती है. सही डॉक्यूमेंट और तर्क देना जरूरी है.

कंपनी के ग्रिवेंस सेल में शिकायत

कंपनी से समाधान न मिले तो आईआरडीएआई की वेबसाइट पर शिकायत करें. अपने क्षेत्र के इंश्योरेंस ओम्बड्समैन से संपर्क किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर कंज्यूमर कोर्ट या कानूनी सहायता भी ली जा सकती है.

कैश ट्रैपिंग से बचें