म्यूचुअल फंड से कमाई हुई? अब समझें पूरा टैक्स कैलकुलेशन

21/02/2026

VIVEK SINGH

इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 महीने से ज्यादा होल्डिंग पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. 12 महीने से पहले बेचने पर 20% शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है. होल्डिंग पीरियड बहुत मायने रखता है.

इक्विटी फंड पर कितना टैक्स?

वित्त वर्ष 2025-26 के अनुसार डेट म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्स लगता है. इसमें इंडेक्सेशन का फायदा सीमित हो सकता है, इसलिए निवेश से पहले टैक्स प्लानिंग जरूरी है.

डेट फंड पर टैक्स कैसे लगता है?

1 अप्रैल 2020 से डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटा दिया गया है. अब डिविडेंड को ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्स’ माना जाता है. निवेशक को इसे अपनी कुल आय में जोड़कर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स भरना होता है.

डिविडेंड पर नया टैक्स नियम

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) में निवेश पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है. यह टैक्स बचत और इक्विटी ग्रोथ दोनों का फायदा देता है.

ELSS में टैक्स बचत का फायदा

FIFO यानी फर्स्ट इन फर्स्ट आउट नियम के तहत सबसे पहले खरीदी गई यूनिट्स को पहले बेचा हुआ माना जाता है. इससे तय होता है कि गेन शॉर्ट टर्म होगा या लॉन्ग टर्म, और उसी आधार पर टैक्स लगेगा.

FIFO रूल क्यों है जरूरी?

SIP में हर निवेश किस्त को अलग माना जाता है. हर यूनिट का होल्डिंग पीरियड अलग होता है, इसलिए टैक्स कैलकुलेशन भी अलग-अलग किया जाता है. इससे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गेन की गणना जटिल हो सकती है.

SIP पर टैक्स कैसे तय होता है?

इक्विटी फंड यूनिट्स को 12 महीने से पहले बेचने से बचें. हर साल 1.25 लाख रुपये तक के LTCG छूट का फायदा उठाएं. लंबी अवधि का निवेश टैक्स बोझ कम करने में मददगार साबित हो सकता है.

टैक्स बचाने के आसान तरीके

म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले टैक्स नियमों को अच्छी तरह समझ लें. रिटर्न जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है टैक्स प्लानिंग. सही रणनीति अपनाकर आप मुनाफा भी कमा सकते हैं और टैक्स भी बचा सकते हैं.

निवेश से पहले समझें पूरा कैलकुलेशन