05/01/2026
VIVEK SINGH
रेंट एग्रीमेंट की अवधि पूरी होने के बाद किरायेदार का वैध अधिकार खत्म हो जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मकान मालिक जबरन कार्रवाई कर सकता है. कानून के दायरे में रहकर ही अगला कदम उठाना जरूरी होता है.
बिजली पानी काटना, ताला बदलना या किरायेदार को धमकाना कानूनन गलत है. ऐसा करने पर मकान मालिक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है और किरायेदार को कानूनी फायदा मिल सकता है.
वकील के जरिए कानूनी नोटिस भेजना सबसे जरूरी कदम माना जाता है. नोटिस में साफ लिखा होना चाहिए कि एग्रीमेंट खत्म हो चुका है और तय समय में घर खाली करना होगा. कई बार नोटिस से ही मामला सुलझ जाता है.
अगर मकान मालिक एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी किराया लेता है, तो इसे महीने दर महीने किरायेदारी माना जा सकता है. इससे किरायेदार का केस मजबूत हो जाता है और बेदखली की प्रक्रिया और लंबी हो सकती है.
आजकल किरायेदार ऑनलाइन किराया भेज देते हैं. अगर मकान मालिक वह रकम रख लेता है, तो कोर्ट इसे सहमति मान सकती है. इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका है पैसा तुरंत वापस करना और लिखित में कारण बताना.
घर खाली कराने से जुड़ा विवाद आमतौर पर सिविल मामला होता है. पुलिस सीधे कार्रवाई नहीं करती. हालांकि धमकी, धोखाधड़ी या जबरन कब्जे की स्थिति में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
अगर नोटिस के बाद भी किरायेदार घर खाली नहीं करता, तो सिविल कोर्ट में बेदखली का केस दायर करना पड़ता है. यह प्रक्रिया समय ले सकती है, लेकिन यही सबसे सुरक्षित और कानूनी तरीका माना जाता है.
ऐसी स्थिति में भावनाओं में बहकर कदम उठाने से बचें. हर कार्रवाई से पहले कानूनी सलाह लें और सबूत सुरक्षित रखें. सही प्रक्रिया अपनाकर ही आप लंबे समय में खुद को नुकसान से बचा सकते हैं.