31/01/2026
Kumar Saket
भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जिसे वर्ल्ड बैंक और IMF जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भी स्वीकार किया है. तेज ग्रोथ के बावजूद कई भारतीय राज्यों पर कर्ज का दबाव इतना बढ़ चुका है कि उनके राजस्व का बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक के FY2025 के आंकड़ों से सामने आया है कि कुछ राज्यों में ब्याज भुगतान कुल टैक्स और नॉन-टैक्स आय का 42 फीसदी तक पहुंच गया है.
कर्ज के ब्याज का भार सबसे ज्यादा रहा. राज्य ने अपने कुल राजस्व का करीब 42 फीसदी सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च किया.
पश्चिम बंगाल
अपनी कुल आय का लगभग 34 फीसदी हिस्सा कर्ज के ब्याज भुगतान में लगाया, जिससे सरकार के पास डेवलपमेंट के लिए कम फंड बचते हैं.
पंजाब
FY2025 में मिले राजस्व का करीब एक-तिहाई हिस्सा यानी 33% ब्याज भुगतान में खर्च कर दिया.
बिहार
अपने कुल राजस्व का लगभग 28% हिस्सा सिर्फ कर्ज की किस्तों और ब्याज चुकाने में झोंक दिया.
केरल
राज्य का टैक्स कलेक्शन ज्यादा होने के बावजूद तमिलनाडु को भी भारी कर्ज बोझ का सामना करना पड़ा और 28% राशि ब्याज में चली गई.
तमिलनाडु
FY2025 में जुटाए गए राजस्व का करीब 27% हिस्सा कर्ज भुगतान में खर्च किया.
हरियाणा