27/12/2025
Pradyumn Thakur
पर्सनल लोन बिना किसी गिरवी के मिलता है. इसमें घर, गाड़ी या सोना बैंक के पास नहीं रहता. इसलिए अगर उधार लेने वाले की मृत्यु हो जाए, तो बैंक सीधे कोई संपत्ति जब्त नहीं कर सकता.
अगर लोन के साथ लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस लिया गया हो, तो बैंक बीमा कंपनी से पैसा वसूल करता है. बीमा कंपनी शर्तों के अनुसार बकाया रकम चुकाती है और परिवार पर बोझ नहीं पड़ता.
अगर लोन में कोई को-एप्लिकेंट या गारंटर है, तो उधार लेने वाले की मृत्यु के बाद बैंक उनसे पैसा मांगेगा. भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई और उनका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है.
अगर न को-एप्लिकेंट हो न गारंटर, तो बैंक मृत व्यक्ति की संपत्ति से पैसा वसूल सकता है. जैसे बैंक बैलेंस, एफडी, शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना या घर से सीमित वसूली होती है.
अगर कानूनी वारिस न तो को-एप्लिकेंट है और न गारंटर, और लोन एग्रीमेंट में कोई खास शर्त नहीं है, तो बैंक उसे मजबूर नहीं कर सकता कि वह अपनी जेब से पैसा चुकाए.
अगर कानूनी वारिस को मृत व्यक्ति की संपत्ति मिली है, तो बैंक उसी संपत्ति की सीमा तक पैसा वसूल सकता है. वारिस को अपनी निजी कमाई या बचत से लोन चुकाने की जरूरत नहीं होती.
अगर बीमा, गारंटर, संपत्ति या कोई और रास्ता न मिले, तो बैंक लोन की रकम को नुकसान मानकर लिख देता है. ऐसे में परिवार से जबरदस्ती वसूली नहीं की जा सकती.
परिवार को तुरंत बैंक को मृत्यु की जानकारी देनी चाहिए और डेथ सर्टिफिकेट जमा करना चाहिए. किसी दबाव या भ्रम की स्थिति में वकील से सलाह लेना जरूरी है ताकि अधिकार सुरक्षित रहें.