बच्चों के लिए डायरेक्ट म्यूचुअल फंड क्यों है बेहतर

03/01/2026

Satish Vishwakarma

अधिकतर माता-पिता तब निवेश के बारे में सोचते हैं, जब  बच्चों के स्कूल की फीस बढ़ जाती है या कॉलेज पास आता दिखने लगता है. ऐसे में लोग अक्सर चिल्ड्रन प्लान या इंश्योरेंस से जुड़े प्रोडक्ट खरीद लेते हैं. हकीकत यह है कि बच्चे के लिए Direct Mutual Funds में निवेश किया जा सकता है. 

 बच्चों के नाम निवेश

कानून के मुताबिक, नाबालिग (18 साल से कम) खुद म्यूचुअल फंड अकाउंट ऑपरेट नहीं कर सकता. इसलिए निवेश बच्चे के नाम होता है, लेकिन उसे माता-पिता या लीगल गार्जियन चलाते हैं. 

 निवेश का मतलब क्या है

म्यूचुअल फंड फोलियो बच्चे के नाम खुलता है और एक पैरेंट गार्जियन होता है. बच्चे के लिए बर्थ सर्टिफिकेट या पासपोर्ट लगता है. गार्जियन का KYC, PAN, बैंक अकाउंट और सिग्नेचर इस्तेमाल होता है. निवेश और रिडेम्पशन दोनों गार्जियन के बैंक अकाउंट से ही होते हैं.

 Direct Mutual Fund कैसे खोलें

Direct Mutual Funds में expense ratio कम होता है. 10 से 15 साल में यही कम खर्च बड़ा फर्क पैदा करता है. लॉन्ग टर्म गोल जैसे एजुकेशन के लिए कमीशन देने की जरूरत नहीं होती.

डायरेक्ट म्यूचुअल फंड ही क्यों 

फंड का चुनाव बच्चे की उम्र से नहीं, लक्ष्य की टाइमलाइन से करें.अगर लक्ष्य 10 साल या उससे दूर है, तो इक्विटी फंड्स ज्यादा उपयुक्त होते हैं. जैसे-जैसे लक्ष्य नजदीक आए, रिस्क कम करना जरूरी है.

सही फंड कैसे चुनें

माइनर के नाम निवेश से होने वाली इनकम आमतौर पर पैरेंट की इनकम में जुड़ती है. छोटी सी छूट के बाद टैक्स पैरेंट को ही देना होता है. मतलब यह टैक्स बचाने का तरीका नहीं, बल्कि गोल फोकस रखने का जरिया है. 

टैक्स को लेकर जरूरी बात

18 साल पूरे होते ही अकाउंट ऑटोमैटिकली ट्रांसफर नहीं होता. Minor to Major प्रक्रिया पूरी करनी होती है. बच्चे को PAN, KYC और बैंक डिटेल देनी होती है. इसके बाद निवेश का कंट्रोल बच्चे के पास चला जाता है. 

 जब बच्चा 18 साल का हो जाए