फ्लाइट टिकट के मनमाने दाम पर नहीं लगेगी लगाम! सिर्फ इन हालात में दखल देगी सरकार; नए नियमों में क्या है खास?
हवाई टिकट के बढ़ते किराए पर सरकार सामान्य परिस्थितियों में रोक लगाने की योजना नहीं बना रही है. नए नियमों के तहत एयरलाइंस मांग और सप्लाई के आधार पर किराया तय कर सकेंगी. हालांकि, प्राकृतिक आपदा या किसी असाधारण स्थिति में सरकार किराए की अधिकतम सीमा तय कर सकेगी. DGCA एयरलाइंस के किराए और उनकी वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर भी नजर रखेगा.

हवाई किराए को लेकर नए नियम बनाए जा रहे हैं, लेकिन सरकार का फिलहाल एयरलाइंस की टिकट कीमतों को कंट्रोल करने का कोई इरादा नहीं है. सरकार मांग और सप्लाई के आधार पर तय होने वाले हवाई किराए की मौजूदा व्यवस्था में दखल नहीं देगी. हालांकि, प्राकृतिक आपदा या किसी असाधारण स्थिति में आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार किराए की अधिकतम सीमा तय कर सकेगी.
नए नियमों को मिली प्रशासनिक मंजूरी
इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत हवाई किराए से जुड़े नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है. इन्हें अगले दो हफ्तों में प्रकाशित किया जाएगा. इसके बाद ऐसी अटकलें लगने लगीं कि सरकार हवाई किराए को कंट्रोल कर सकती है. इन अटकलों के बीच एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट भी देखी गई.
हालांकि, ET ने अपने रिपोर्ट में बताया कि सरकार का सामान्य परिस्थितियों में हवाई किराए तय करने की बाजार आधारित व्यवस्था में दखल देने का कोई इरादा नहीं है. लेकिन प्राकृतिक आपदा या किसी दूसरी असाधारण स्थिति में सरकार किराए की सीमा तय कर सकेगी, ताकि आम लोगों को परेशानी से बचाया जा सके.
DGCA की निगरानी में रहेंगे एयरलाइन के किराए
नए नियमों के तहत एयरलाइंस को अपने हवाई किराए की जानकारी एक महीने पहले नागरिक उड्डयन नियामक, नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) से मंजूर करानी होगी. इसके अलावा, कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर किराए की संरचना भी दिखानी होगी. रिपोर्ट के मुताबिक, DGCA यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी करेगा कि एयरलाइंस किसी भी स्थिति में नियामक को पहले से बताई गई किराए की सबसे ऊंची कैटेगरी से अधिक शुल्क न वसूलें. गौरतलब है कि भारत ने 1994 में हवाई किराए को कंट्रोल मुक्त कर दिया था. इसके बाद एयरलाइंस को परिचालन लागत, सेवा की विशेषताओं और उचित मुनाफे की उम्मीद के आधार पर किराया तय करने की अनुमति मिली.
एक साल में 68% तक महंगा हुआ हवाई सफर
एविएशन एनालिटिक्स फर्म OAG के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल त्योहारों और साल के अंत की छुट्टियों के दौरान हवाई किराए एक साल पहले के मुकाबले 68% तक ज्यादा हैं. इसकी वजह ईंधन की ऊंची लागत और उड़ानों के सीमित विकल्प बताए गए हैं. ET की ओर से देखे गए आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच यात्रा के लिए प्रमुख महानगरीय मार्गों पर औसत एकतरफा किराए में तेज बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली-हैदराबाद मार्ग पर किराया 68%, मुंबई-कोलकाता पर 51%, दिल्ली-गोवा पर 39% और मुंबई-बेंगलुरु मार्ग पर 37% बढ़ा है.
ATF की बढ़ती कीमतों से किराया रखना चुनौतीपूर्ण
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि मंत्रालय हवाई किराए को उचित स्तर पर बनाए रखना चाहता है, लेकिन एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण यह चुनौतीपूर्ण हो रहा है. ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर ने अपने फ्यूल सरचार्ज में भी बढ़ोतरी की है.
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