पर्सनल फाइनेंस
टैक्स नहीं देना फिर भी ITR जरूरी, जानें क्यों है यह आपके लिए फायदेमंद
जीरो टैक्स होने पर भी ITR भरना फायदेमंद होता है. यह आपकी इनकम का आधिकारिक रिकॉर्ड बनाता है और टैक्स रिफंड क्लेम करने में मदद करता है. इसके अलावा लोन और वीजा के लिए ITR जरूरी दस्तावेज होता है. निवेश में हुए नुकसान को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी मिलता है.
Low Interest का झांसा! होम लोन के Hidden Charges कैसे बढ़ाते हैं खर्च
होम लोन लेना हम जितना सुविधाजनक मानते हैं क्या वाकई में होम लोन लेना उतना ही सस्ता है....क्योंकि होम लोन लेते समय हम सिर्फ इंटरस्ट रेट और बनने वाली EMI देखते हैं लेकिन सच तो ये हैं कि होम लोन की कहानी सिर्फ EMI पर खत्म नहीं होती? क्योंकि होम लोन के पीछे कई ऐसे 'हिडन चार्जेस' छिपे होते हैं जो आपकी जेब पर एक्स्ट्रा बोझ डालते हैं....और आपको पता भी नहीं चलता. प्रोसेसिंग फीस से लेकर लीगल चार्जेस तक—ये छोटे-छोटे दिखने वाले खर्चे आपके लाखों रुपये बढ़ा सकते हैं. तो चलिए जानते हैं इन हिडन चार्जिस के बारे में और क्यों होम लोन लेने से पहले इन्हें जानना जरूरी है.....
बिहार के भावी CM के पास कितना सोना-चांदी, म्यूचुअल फंड में जमकर लगाते हैं पैसा, देखें सम्राट चौधरी का पोर्टफोलियो
अगर पूरे पोर्टफोलियो को देखें, तो सम्राट चौधरी ने सबसे ज्यादा पैसा इंश्योरेंस सेक्टर में लगाया है, जहां कुल निवेश करीब 55.66 लाख रुपये है. इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा ज्वेलरी (सोना-चांदी) में है, जिसमें लगभग 40.75 लाख रुपये का निवेश है. खास बात यह है कि इसमें केवल गोल्ड में ही करीब 40 लाख रुपये लगाए गए हैं.
केवल रूल ऑफ 72 ही नहीं ये 8 फॉर्मूले भी हैं कमाल के, बैंक अकाउंट में बढ़ते जाएंगे पैसे
पर्सनल फाइनेंस के 9 गोल्डन रूल्स हर व्यक्ति को अपनी इनकम और खर्च को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करते हैं. रूल ऑफ 72 और 70 से निवेश और महंगाई को समझा जा सकता है. 50 30 20 और 6 महीने का इमरजेंसी फंड आर्थिक सुरक्षा देते हैं. वहीं 100 माइनस एज और 4 परसेंट नियम निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग को आसान बनाते हैं. इन नियमों को अपनाकर आप मजबूत फाइनेंशियल भविष्य बना सकते हैं.
₹10, ₹20 या ₹30 LPA? Tier-1 शहर में आराम से रहने के लिए कितनी चाहिए सैलरी? सच जानकर चौंक जाएंगे
2026 में महंगाई, खासकर किराए और रोजमर्रा के खर्च, ने लोगों की कमाई पर दबाव बढ़ा दिया है. अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि आप कितना कमा रहे हैं, बल्कि यह है कि उस कमाई से आप कितना बचा पा रहे हैं.मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों में खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा किराया होता है. इसके बाद खाने, बिजली-पानी और बाकी जरूरतों का खर्च आता है.
जीरो टैक्स होने पर भी भरें ITR , लोन और वीजा में काम आएगा रिकॉर्ड, जानें 5 बड़े फायदे
वित्त वर्ष 2025-26 में जीरो टैक्स होने पर भी ITR भरना जरूरी माना जा रहा है. यह आपकी इनकम का आधिकारिक रिकॉर्ड बनाता है और TDS रिफंड क्लेम करने में मदद करता है. इसके साथ ही लोन और वीजा के लिए यह जरूरी दस्तावेज होता है. निवेश में हुए नुकसान को आगे ले जाने का फायदा भी मिलता है.
अब WhatsApp पर होगा बैंकिंग का हर काम! SBI की इस सुविधा से घर बैठे होगा हर काम, जानें प्रोसेस
SBI ने WhatsApp Banking सर्विस शुरू की है. इस सर्विस के जरिए ग्राहक अपने मोबाइल से ही कई जरूरी काम कर सकते हैं. जैसे बैलेंस चेक करना, मिनी स्टेटमेंट देखना, लोन की जानकारी लेना और बहुत कुछ. सबसे खास बात यह है कि यह सर्विस बहुत आसान है और सिर्फ WhatsApp पर ही मिल जाती है.
शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से हैं परेशान? FD बन सकता है भरोसेमंद विकल्प; जानें प्राइवेट बैंक कितना दे रहे ब्याज
भारत के प्राइवेट बैंकों में FD एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में लोकप्रिय हो रहा है, जहां HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank, Kotak Mahindra Bank और IndusInd Bank 7.5 फीसद तक ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं. बाजार की अनिश्चितता के बीच FD स्थिर और भरोसेमंद रिटर्न का विकल्प बनकर उभरा है. निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार अवधि चुन सकते हैं और नियमित आय या मैच्योरिटी पर रिटर्न का लाभ ले सकते हैं.
नए सैलरी नियम लागू, 30 लाख CTC पर कितनी घटेगी आपकी इन हैंड सैलरी; जानें पूरा कैलकुलेशन
अप्रैल 2026 से नए सैलरी नियम लागू होने के बाद नौकरीपेशा लोगों की इन हैंड सैलरी पर असर दिखेगा. सरकार ने वेतन की नई परिभाषा में बेसिक सैलरी को कम से कम पचास प्रतिशत करना अनिवार्य किया है. इससे PF में योगदान बढ़ेगा और हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी घटेगी.
50% वेज रूल लागू! अब सैलरी स्ट्रक्चर बदला, जानिए जेब में कम पैसे क्यों आए!
अप्रैल 2026 से कई सैलरी पाने वाले लोगों को अपने बैंक अकाउंट में आने वाली इन-हैंड सैलरी कम दिख सकती है. इससे लोग घबरा सकते हैं, लेकिन असल में उनकी कुल सैलरी कम नहीं हुई है. यह बदलाव सरकार के नए वेज रूल के कारण आया है. इस नए नियम के तहत अब कंपनियों को सैलरी का स्ट्रक्चर बदलना होगा. पहले कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखती थीं और बाकी पैसा अलाउंस में देती थीं, जिससे कर्मचारियों को ज्यादा इन-हैंड मिलता था. लेकिन अब यह तरीका बदल गया है. इसलिए जो पैसा पहले सीधे हाथ में आता था, अब उसका कुछ हिस्सा सेविंग में जा रहा है.