RBI के नए ड्राफ्ट नियमों के तहत अब बैंक किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट को बेचने से पहले उसकी “सूटेबिलिटी” साबित करेंगे. अलग-अलग सहमति लेना अनिवार्य होगा, डार्क पैटर्न पर रोक लगेगी और मिस-सेलिंग साबित होने पर पूरा पैसा लौटाना होगा. ये बदलाव 1 जुलाई 2026 से लागू होने की तैयारी में हैं. विस्तार में जाने इसके बारे में.