ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध से कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. इससे भारत का आयात बिल, महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का खतरा है. रुपया कमजोर हो सकता है और GDP ग्रोथ पर भी दबाव पड़ सकता है. तेल महंगा होने से पेंट, टायर, एविएशन और ऑयल मार्केटिंग सेक्टर के मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं. आइये विस्तार से समझते हैं.