मई में भारत का व्यापार घाटा कम होकर $28.21 अरब हुआ, पेट्रोलियम एक्सपोर्ट ने एनर्जी इंपोर्ट के असर को किया कम
पश्चिम एशिया में उथल-पुथल के बावजूद, ज्यादा पेट्रोलियम एक्सपोर्ट से हुई कमाई ने एनर्जी से जुड़े महंगे इंपोर्ट के बोझ को कम करने में मदद की. पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद की वजह से, जिसके लिए आज ही अमेरिका और ईरान एक समझौते पर सहमत हुए हैं, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग प्रभावित हो रही है.
मई में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड घाटा थोड़ा कम होकर 28.21 अरब डॉलर हो गया. पश्चिम एशिया में उथल-पुथल के बावजूद, ज्यादा पेट्रोलियम एक्सपोर्ट से हुई कमाई ने एनर्जी से जुड़े महंगे इंपोर्ट के बोझ को कम करने में मदद की. देश में अप्रैल में 28.38 अरब डॉलर का बढ़ा हुआ ट्रेड डेफिसिट दर्ज किया गया था.
मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट कितना बढ़ा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में मर्चेंडाइज का एक्सपोर्ट बढ़कर 45.2 अरब डॉलर हो गया, जो एक महीने पहले 43.56 अरब डॉलर था. वहीं, अप्रैल में इंपोर्ट 71.94 अरब डॉलर के छह महीने के हाई लेवल पर पहुंचने के बाद मई में और बढ़कर 73.41 अरब डॉलर हो गया.
पेट्रोलियम का एक्सपोर्ट
मई में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर 54.89 फीसदी बढ़कर 8.42 अरब डॉलर हो गया, जो निर्यात में मजबूत तेजी को दिखाता है.
सर्विस सेक्टर में एक्सपोर्ट
सर्विस सेक्टर में निर्यात का अनुमान 36.76 अरब डॉलर और आयात 19.06 अरब डॉलर था, जिससे भारत को 17.7 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) मिला.
बनी हुई है ट्रेड की रफ्तार
वाणिज्य मंत्रालय ने इस प्रदर्शन का श्रेय भारतीय उत्पादों और सेवाओं की लगातार बनी हुई वैश्विक मांग को दिया है. ट्रेड मिनिस्ट्री ने X पर एक बयान में कहा, ‘एक्सपोर्ट में मजबूत परफॉर्मेंस से पता चलता है कि ट्रेड की रफ्तार बनी हुई है, भारतीय सामान और सर्विस की ग्लोबल डिमांड बढ़ रही है और ग्लोबल इकोनॉमी में भारत की भूमिका भी बढ़ रही है.’
अमेरिक-ईरान संघर्ष का असर
पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद की वजह से, जिसके लिए आज ही अमेरिका और ईरान एक समझौते पर सहमत हुए हैं, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग प्रभावित हो रही है.
ईरान के लंबे समय से चल रहे विवाद ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग को बाधित किया है और फरवरी के आखिर से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों को $120 प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक पहुंचा दिया. इससे महंगाई के दबाव, आर्थिक विकास और भारत के बाहरी खातों (external accounts) की स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं.
भारत के लिए, अमेरिका-ईरान समझौता तुरंत आर्थिक राहत देगा. चार महीने के टकराव ने व्यापार मार्गों को बाधित किया था, कच्चे तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया था और पश्चिमी एशिया से ऊर्जा आपूर्ति पर देश की निर्भरता को उजागर किया था.
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