इंश्योरेंस समाचार
ईरान- इजरायल युद्ध के बीच सरकार का बड़ा प्लान, बनाएगी ₹1000 करोड़ का वार इंश्योरेंस फंड, रिस्क कवर में मिलेगी मदद
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार पर असर पड़ रहा है. होर्मुज रूट से गुजरने वाले जहाजों के लिए बीमा कवर महंगा और मुश्किल हो गया है क्योंकि ग्लोबल रीइंश्योरेंस कंपनियां पीछे हट गई हैं. इस स्थिति में भारत सरकार एक विशेष फंड बनाने पर विचार कर रही है.
निर्मला सीतारमण ने कहा, हेल्थ इंश्योरेंस सरकार की प्राथमिकता… 2033 तक सभी होंगे कवर
यह देखते हुए कि हेल्थ इंश्योरेंस का बाजार असल में तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, 'आज इस सेक्टर ने काफी तरक्की की है. उन्होंने कहा, '26.79 करोड़ एनरोलमेंट और COVID के दौरान साबित हुई तत्परता के साथ, भारत लगातार एक अधिक समावेशी, सुलभ और मजबूत हेल्थ इंश्योरेंस इकोसिस्टम बना रहा है.'
हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी शिकायतों में 41 फीसदी की बढ़ोतरी; 69% मामले क्लेम खारिज होने से जुड़े; 1 Finance की स्टडी में खुलासा
स्टडी बताती है कि हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते वक्त ग्राहक जिस सुरक्षा का भरोसा करते हैं, वही क्लेम के समय सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. स्टडी में शामिल प्रमुख बीमा कंपनियों के बीच 48 अंकों का बड़ा अंतर देखने को मिला. इसका मतलब है कि सभी कंपनियां एक जैसी नहीं हैं.
140 करोड़ की आबादी, लेकिन इंश्योरेंस अभी भी दूर; फाइनेंशियल लिटरेसी सबसे बड़ी चुनौती
मनी9 फाइनेंशियल फ्रीडम समिट 2026 में ‘इंश्योरेंस फॉर ऑल बाय 2047’ के लक्ष्य पर चर्चा हुई. पीबी फिनटेक के डायरेक्टर राजीव गुप्ता और बंधन लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एंड सीईओ सतीश्वर बी ने बताया कि भारत में इंश्योरेंस की पहुंच बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी है. उन्होंने कहा कि बैंकिंग और टेलिकॉम रेवोल्यूशन के बाद अब इंश्योरेंस रेवोल्यूशन की जरूरत है.
Insurance for All by 2047: हर नागरिक तक बीमा पहुंचाने के लक्ष्य पर क्या बोले एक्सपर्ट्स?
इस चर्चा में बताया गया कि भारत की बड़ी आबादी अभी भी किसी न किसी वजह से बीमा सुरक्षा से दूर है. जागरूकता की कमी, बीमा को लेकर गलत धारणाएं और सही जानकारी तक पहुंच न होना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पॉलिसी और आसान प्रक्रियाओं के कारण बीमा सेक्टर तेजी से बदल रहा है.
युद्ध में क्या काम आता है ट्रेवल इंश्योरेंस? जानिए नियम और क्लेम की सच्चाई
युद्ध या जियोपॉलिटिकल तनाव की स्थिति में ट्रेवल इंश्योरेंस कितना काम आता है, यह सवाल तब और अहम हो जाता है जब हजारों यात्री विदेश में फंस जाते हैं. यूएई में करीब 20,000 भारतीयों के फंसने की खबरों के बीच यह समझना जरूरी है कि फ्लाइट कैंसिलेशन, ट्रिप डिले और आपात स्थितियों में ट्रेवल इंश्योरेंस क्या कवर करता है.
प्रीमियम भरने के बाद भी नहीं मिला क्लेम? हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
अस्पताल का खर्च लाखों में पहुंच चुका है, इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस आज जरूरत बन गया है. लेकिन कई मामलों में जरूरत पड़ने पर कंपनियां क्लेम देने से इनकार कर देती हैं. ऐसे में पॉलिसी लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, यह जानना बेहद जरूरी है.
वैश्विक संकट के बीच इंश्योरेंस सेक्टर की बड़ी पहल, ARM की हुई शुरुआत, “Anthropic से लें सीख” – तपन सिंघल
वैश्विक अनिश्चितता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच इंश्योरेंस सेक्टर ने जोखिमों से निपटने के लिए एक अहम कदम उठाया है. Association of Risk Managers (ARM) की स्थापना के साथ उद्योग को एक साझा राष्ट्रीय मंच मिला है, जो रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत करने, पेशेवर सहयोग बढ़ाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करेगा.
इन कंपनियों का हेल्थ इंश्योरेंस है… तो सावधान हो जाओ!
कई बार पॉलिसीहोल्डर्स को यह महसूस होता है कि क्लेम के दौरान एक्सक्लूजन, वेटिंग पीरियड या सब-लिमिट जैसी शर्तें उनकी उम्मीदों से अलग निकलती हैं. इसलिए जरूरी है कि ग्राहक अपनी पॉलिसी के कवर, को-पेमेंट, डिडक्टिबल और नेटवर्क हॉस्पिटल की लिस्ट को ध्यान से समझें.
सरकार का बड़ा फैसला, LIC में 20% FDI को हरी झंडी; जानें निवेशकों और पॉलिसीहोल्डर्स पर क्या होगा असर
केंद्र सरकार ने FDI पॉलिसी में संशोधन कर LIC में 20% तक विदेशी निवेश को ऑटोमैटिक रूट से मंजूरी दे दी है. DPIIT की प्रेस नोट 1 (2026) के तहत यह बदलाव लागू हुआ. साथ ही बीमा कंपनियों में 100% FDI की अनुमति भी दी गई है. LIC को 10% न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग हासिल करने के लिए 2027 तक समय मिला है.
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