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चीन से जुड़े FDI नियमों में नरमी की तैयारी, बदल जाएगा निवेश का समीकरण? जानें क्या हो सकता है शेयर बाजार पर असर

भारत सरकार 2020 के बाद लागू किए गए चीन से जुड़े FDI और सरकारी खरीद नियमों में सीमित ढील पर विचार कर रही है. फोकस अब निवेशक की राष्ट्रीयता के बजाय रोजगार, घरेलू क्षमता और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर हो सकता है. अगर यह बदलाव लागू होता है तो मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टरों के शेयरों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है.

क्या रूस से तेल की खरीद बंद होगी? ट्रंप के दावे के बाद भारत ने अपना रुख किया साफ, जानें क्या बोला MEA

अमेरिका के साथ ट्रेड डील की घोषणा के बाद भारत ने रूस से तेल आयात पर अपना रुख स्पष्ट किया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वैश्विक व बाजार परिस्थितियों के अनुसार ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण ही रणनीति का केंद्र रहेगा.

अमेरिका- यूरोपियन यूनियन से डील के बाद अब भारत-चीन ट्रेड पर बड़ा सिग्नल, FDI नियमों पर ढील के संकेत

वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापार समीकरणों के बीच एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से जुड़ा एक अहम बयान सामने आया है. यह संकेत केवल मौजूदा ट्रेड ट्रेंड्स तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की निवेश नीति और कारोबारी रिश्तों की दिशा भी तय कर सकता है. खास तौर पर विदेशी निवेश से जुड़े नियमों पर नई बहस तेज होती दिख रही है.

बीमा बेचने में फर्जीवाड़ा और लोन रिकवरी के हथकंडे, सब बंद कर देगा RBI!

रिजर्व बैंक बीमा मिस सेलिंग और लोन रिकवरी के फर्जी हथकंडों पर सख्त हो गया है. नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस से बैंक, एनबीएफसी और रिकवरी एजेंटों पर शिकंजा कसेगा. ग्राहकों को जबरन बीमा बेचने और धमकी भरी वसूली पर रोक लगेगी. RBI के कदम से बड़े बदलाव तय हैं.

DDGS क्या है और क्यों खोले गए अमेरिका के लिए दरवाजे, जानें भारत पर इसका असर, सेब-सोयाबीन पर क्या बोली सरकार?

भारत-अमेरिका ज्वाइंट स्टेटमेंट के बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि पोल्ट्री सेक्टर को राहत देने के लिए DDGS के आयात को सीमित रूप से अनुमति दी गई है, जबकि सेब और सोयाबीन जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर कोटा, न्यूनतम आयात मूल्य और ऊंची ड्यूटी के जरिए घरेलू किसानों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है.

SBI ने जारी किए Q3FY26 के नतीजे, बैंक का नेट प्रॉफिट 13.06% बढ़कर हुआ 21317 करोड़ रुपये, NII भी बढ़ी

SBI ने Q3FY26 के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक ने 24.5% की बढ़त के साथ 21,028 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम 9% बढ़ी और एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है. इसके अलावा ग्रॉस और नेट NPA दोनों घटे, जबकि प्रावधान कम होने से बैंक की बैलेंस शीट मजबूत रही. कुल मिलाकर तिमाही नतीजे बेहतर रहे है.

एग्री से लेकर जेम्स और ज्वेलरी तक, अमेरिका में ये भारतीय प्रोडक्ट होंगे टैरिफ फ्री; $13 बिलियन फार्मा एक्सपोर्ट पर लगेगी जीरो ड्यूटी

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील फ्रेमवर्क के तहत भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार इस समझौते से एग्रीकल्चर, फार्मा और हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट को अमेरिका में जीरो ड्यूटी एक्सेस मिला है. चाय, मसाले, फल, सब्जियां, मशरूम और अन्य कृषि उत्पाद अब बिना टैरिफ अमेरिका भेजे जा सकेंगे. करीब 13 बिलियन डॉलर के फार्मा एक्सपोर्ट पर भी शून्य शुल्क लागू होगा.

Gold Silver Rate Today 07-02-2026: सोना-चांदी में दिखा उतार-चढ़ाव, हफ्ते भर में गोल्‍ड ₹7000 महंगा, सिल्‍वर ₹16000 लुढ़का

सोना-चांदी की कीमतों में हफ्ते भर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां गोल्ड में मजबूती बनी रही लेकिन चांदी में भारी गिरावट दर्ज हुई . डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और कमजोर ग्लोबल ट्रेंड्स के कारण बाजार दबाव में रहा, जबकि विशेषज्ञों ने सिल्वर में आगे भी कमजोरी की आशंका जताई है.

अमेरिका में भारत के ये प्रोडक्ट्स होंगे सस्ते, दवाओं से लेकर कपड़ों तक की घटेंगी कीमतें, देखें पूरी लिस्ट

भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम ट्रेड डील से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है. इस समझौते के बाद अमेरिका में भारत से जाने वाले कई उत्पाद सस्ते हो जाएंगे. दवाओं से लेकर कपड़ों और चमड़े के सामान तक, अब भारतीय प्रोडक्ट्स अमेरिकी बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे.

7 फरवरी से USA में भारतीय प्रोडक्ट्स पर नहीं लगेंगे अतिरिक्त 25% टैरिफ, अमेरिका ने भारत के सामने रखी ये खास शर्त

भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों में एक अहम मोड़ आया है. अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ हटाने का ऐलान किया है. इस फैसले से भारतीय निर्यात को बड़ी राहत मिलेगी और दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है. लेकिन अमेरिका ने भारत के सामने कुछ खास शर्तें रख दी है.