बिज़नेस समाचार

हर 60 सेकंड में 800+ प्रोडक्ट्स की बिक्री, बिना सेलिब्रिटी के टाटा का Zudio कैसे बना Fast Fashion किंग

वित्त वर्ष 2025 में ज़ूडियो की बिक्री के आंकड़े हैरान करने वाले रहे. कंपनी हर मिनट करीब 220 टी-शर्ट, 60 जींस, 250 परफ्यूम और 330 लिपस्टिक बेच रही थी. ये आंकड़े सिर्फ कागज पर अच्छे नहीं लगते, बल्कि बताते हैं कि ज़ूडियो की दुकानें कितनी तेजी से चल रही हैं.

बैंक यूनियनों का ऐलान, 27 जनवरी को बैंक बंद! जरूरी सेवाओं के लिए पहले से बनाए प्लान, जानें पूरा मामला

बैंक कर्मचारी यूनियनों ने 27 जनवरी को देशभर में हड़ताल की चेतावनी दी है. उनकी मांग है कि बैंकों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाए. यूनियनों का कहना है कि इस पर पहले ही सहमति बन चुकी है. हड़ताल होने पर लगातार तीन दिन तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.

रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप का भारत को फिर चेतावनी, सहयोग नहीं करने पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी; जानें पूरा मामला

अमेरिका ने संकेत दिया है कि अगर भारत रूसी तेल खरीद पर सहयोग नहीं करता तो भारतीय सामानों पर टैरिफ और बढाया जा सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से भारत अमेरिका व्यापार वार्ता फिर दबाव में आ गई है. यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना है.

टैक्स कलेक्शन में कर्नाटक सबसे आगे, कैपेक्स बढ़ाने में गुजरात ने मारी बाजी; इन राज्यों में हुई गिरावट

वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-नवंबर अवधि में राज्यों की वित्तीय तस्वीर सामने आई है. टैक्स कलेक्शन ग्रोथ के मामले में कर्नाटक सबसे आगे रहा, हालांकि कुल राशि में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश अभी भी आगे हैं. कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने में गुजरात ने सबसे तेज बढ़त दिखाई, वहीं उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में गिरावट दर्ज की गई.

टियर-3 कॉलेज के स्टूडेंट ने 12 लाख सैलरी को 2 साल में ₹24 LPA तक पहुंचाया, जॉब भी नहीं बदली, शेयर की जर्नी स्टोरी

टियर-3 कॉलेज से पढ़े एक युवा टेक प्रोफेशनल ने बिना IIT टैग और बार-बार जॉब बदले सिर्फ 2 साल में अपनी सैलरी ₹12 लाख से ₹24 लाख सालाना तक पहुंचा दी हैं. स्टार्टअप में शुरुआती इंटर्नशिप, स्किल्स पर फोकस और सही नेटवर्किंग ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई. उसने अपनी ग्रोथ स्टोरी रेडिट पर शेयर की है.

सोमवार को सोने की कीमतों को हवा दे सकते हैं ये 5 बड़े फैक्टर, इस कंपनी ने रिजर्व में जोड़ा 100 टन से ज्यादा गोल्ड

अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले से वैश्विक तनाव बढ़ा है जिससे सोने की कीमतों में तेजी की उम्मीद है. टेदर की बड़ी गोल्ड खरीद, कमजोर रुपया, तेल बाजार की अनिश्चितता और गोल्ड-सिल्वर रेशियो जैसे फैक्टर सोमवार को गोल्ड रेट को सपोर्ट दे सकते हैं. भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत 136,170 रुपये चल रही है.

सोने-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के आसार, US डेटा और जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ाएंगे हलचल

अगले सप्ताह सोने और चांदी के दामों में तेज उठापटक देखने को मिल सकती है. अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व के संकेत और वेनेजुएला संकट के बाद बढ़ी वैश्विक जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता बुलियन मार्केट की दिशा तय करेगी. रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद सोने-चांदी में हालिया गिरावट के बीच निवेशकों की नजर आगे के ट्रेंड पर टिकी है.

क्या देश की नंबर-1 सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक को पछाड़ पाएगी अंबुजा, जानें इस सेक्टर में अभी कितनी संभावना? क्या है शेयरों का हाल

अडानी ग्रुप के तहत अंबुजा सीमेंट आक्रामक विस्तार और एकीकरण की रणनीति पर काम कर रही है. कंपनी प्रोडक्शन क्षमता 155 mtpa तक पहुंचाने और ₹100 प्रति टन की लागत बचत से कंपनी अल्ट्राटेक को चुनौती दे सकती है. हालांकि, सेक्टर का लीडर बनने का रास्ता अभी लंबा है, लेकिन सीमेंट सेक्टर निवेशकों के लिए मजबूत मौके पेश कर रहा है.

सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं इन कीमती चीजों का भी वेनेजुएला में छिपा है खजाना, जानें दुनिया के लिए क्यों अहम यह देश

वेनेजुएला सिर्फ राजनीतिक संकट में फंसा देश नहीं, बल्कि तेल, गैस, सोना, पानी और रणनीतिक खनिजों का वैश्विक खजाना है. इन्हीं संसाधनों के कारण अमेरिका समेत बड़ी ताकतों की नजर इस पर टिकी है. वेनेजुएला पर नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा, महंगाई और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है. आइये समझते हैं कि वेनेजुएला में कितना प्राकृतिक संसाधन मौजूद है.

कभी चौथा अमीर देश था वेनेजुएला, अमेरिकियों के बराबर थी कमाई; कैसे बर्बाद हुआ ‘लैटिन अमेरिका का सऊदी अरब’?

अमेरिका की हालिया कार्रवाई के बाद वेनेजुएला एक बार फिर दुनिया की सुर्खियों में है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कभी यह देश दुनिया के सबसे अमीर देशों में गिना जाता था. 1950-60 के दशक में वेनेजुएला के लोगों की कमाई अमेरिका के करीब थी और तेल की दौलत के कारण उसे ‘लैटिन अमेरिका का सऊदी अरब’ कहा जाता था. फिर ऐसा क्या हुआ कि वही देश महंगाई, भूख, पलायन और आर्थिक तबाही का प्रतीक बन गया?