बिज़नेस समाचार
July CPI Data: जुलाई में 4.45% पहुंची खुदरा महंगाई, खाने पीने की चीजों के दाम बढे़
जुलाई में देश की खुदरा महंगाई मामूली बढ़ोतरी के साथ 4.45 फीसदी पर पहुंच गई. जून में यह दर 4.38 फीसदी थी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य कीमतों में तेजी रही. जुलाई में खाद्य महंगाई 5.52 फीसदी रही, जबकि जून में यह 5.32 फीसदी थी.
नई छोड़ पुरानी कार खरीद रहे हैं लोग, इन वजहों से कर रहे किनारा, जानें डिटेल
भारतीय कार बाजार में खरीदारों की सोच बदल रही है. लोग अब सिर्फ माइलेज और ईएमआई के बारे में नहीं सोचते, बल्कि मेंटेनेंस, इंश्योरेंस और रीसेल वैल्यू मिलाकर पूरी ओनरशिप कॉस्ट का हिसाब लगाते हैं. पेट्रोल, सीएनजी, हाइब्रिड और ईवी में से अपनी जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनना अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. पुरानी कारों की मांग भी तेजी से बढ़ी है. इसी बदलती मांग को ध्यान में रखते हुए मारुति सुजुकी अगले कुछ वर्षों में 7 नई एसयूवी मॉडल लॉन्च करने की बड़ी तैयारी कर रही है. यह वीडियो भारतीय ऑटो बाजार के इस बदलाव को समझाता है.
रोजमर्रा का सामान फिर होगा महंगा? साबुन-तेल से बिस्किट तक बढ़ सकती है कीमत
इस वीडियो में रोजमर्रा के सामानों की बढ़ती कीमतों और महंगाई पर चर्चा की गई है. बिस्किट, साबुन, तेल और चाय जैसे FMCG प्रोडक्ट्स आने वाले दिनों में फिर महंगे हो सकते हैं. कंपनियों का कहना है कि कच्चा तेल, पाम ऑयल और पैकेजिंग की लागत बढ़ने से उन पर दबाव बन रहा है. कंपनियां सीधे दाम बढ़ाने की जगह श्रिंक्फ्लेशन अपना सकती हैं, जिसमें सामान की मात्रा घटा दी जाती है. इसके अलावा मानसूनी बारिश, बुवाई के आंकड़े और बाजार में बढ़ती मांग के असर को भी विस्तार से समझाया गया है. इस पूरे मुद्दे पर HUL, Britannia, Godrej Consumer, और Tata Consumer जैसी कंपनियों का क्या कहना है, यह भी बताया गया है. ग्राहकों को उम्मीद करके चलना चाहिए कि आने वाले समय में इन सभी रोजमर्रा की चीजों के दाम में अभी और भी इजाफा हो सकता है.
इंटर्न से टाटा संस के चेयरमैन तक पहुंचे थे चंद्रशेखरन, इस्तीफे की चिट्ठी में खोला राज, कहा- एक सदस्य ने नहीं किया सपोर्ट
एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है. करीब 6 महीने तक इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं होने के बाद उन्होंने फरवरी 2027 में कार्यकाल खत्म होने पर पुनर्नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करने का निर्णय लिया. सरकारी स्कूल से पढ़ाई और टीसीएस में इंटर्नशिप से शुरू हुआ उनका सफर टाटा संस के चेयरमैन पद तक पहुंचा.
अब कौन बनेगा टाटा संस का चेयरमैन, ग्रुप के भीतर किस बात को लेकर चल रही टेंशन; किसके पास मौका?
इस्तीफे की चिट्ठी में चंद्रशेखरन ने बताया है कि क्यों उन्हें एक और कार्यकाल नहीं मिला. लेकिन इन सब के बीच अब सवाल ये है टाटा संस की कमान किसके हाथों में जाएगी? हालांकि, चंद्रशेखरन 2027 तक अपने टर्म के खत्म होने तक इस पद पर बने रहेंगे.
टाटा को नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाले एन चंद्रशेखरन की कितनी थी सैलरी? मिलती थी ये सुविधाएं
एन चंद्रशेखरन ने Tata Sons के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है. वित्त वर्ष 2025-26 में उन्हें कुल 158.66 करोड़ रुपये मिले थे. इसमें 17.97 करोड़ रुपये वेतन और सुविधाओं के थे, जबकि 140.69 करोड़ रुपये कमीशन था. पांच साल में उन्हें करीब 685 करोड़ रुपये मिले. उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 950 से 1400 करोड़ रुपये बताई जाती है.
एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे ने मचाई हलचल, रतन टाटा के इस करीबी ने ऐसे दिलाई ग्रुप को नई पहचान
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे से टाटा ग्रुप में बड़े नेतृत्व बदलाव की चर्चा तेज हो गई है. उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक रहेगा. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने सेमीकंडक्टर, बैटरी, एविएशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार किया. एयर इंडिया को टाटा ग्रुप में वापस लाना भी उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा.
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, लेकिन पूरा करेंगे कार्यकाल… दोबारा नहीं मांगेंगे नियुक्ति
एन चंद्रशेखरन के लगभग एक दशक लंबे कार्यकाल का अचानक अंत हो गया है, जिसमें उन्होंने भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप को एयरलाइंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल कारोबार वाले ग्रुप में बदल दिया. हालांकि, फरवरी 2027 तक वे अपने पद पर बने रहेंगे.
UPI से करते हैं लाखों-करोड़ों का ट्रांजैक्शन? इन गलतियों पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट थमा सकता है नोटिस
UPI, NEFT, RTGS और IMPS से किए गए बड़े ट्रांजैक्शन पर अपने आप Income Tax Notice नहीं आता. हालांकि, बैंक ट्रांजैक्शन और ITR में दर्ज इनकम के बीच अंतर, बड़े अमाउंट के अस्पष्ट सोर्स, प्रॉपर्टी खरीद, Capital Gains या TDS में मिसमैच होने पर Income Tax Department की स्क्रूटिनी बढ़ सकती है.
रिजर्व टिकट होते हुए भी बूढे़ मां-बाप को नहीं मिली ट्रेन में सीट, बेटे ने ठोका केस फिर ऐसे मिले 50,000 रुपए
रिजर्व टिकट होने के बावजूद बुजुर्ग माता- पिता को ट्रेन में अपनी सीट नहीं मिली. बिना टिकट और जनरल टिकट वाले यात्रियों के कब्जे से परिवार को काफी परेशानी हुई. बेटे ने रेल मदद ऐप पर दो बार शिकायत की, लेकिन समस्या का सही समाधान नहीं हुआ. इसके बाद परिवार ने कंज्यूमर कमीशन में केस किया. आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का जिम्मेदार माना और 50,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
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