हेल्थ पॉलिसी के नाम पर हो रहा स्कैम, कहीं आपका इंश्योरेंस फर्जी तो नहीं?
कोरोना महामारी के बाद हेल्थ इंश्योरेंस की मांग तेजी से बढ़ी है. लेकिन इसी के साथ बीमा पॉलिसी के नाम पर फ्रॉड के मामले भी बढ़ रहे है.कई लोग बिना जांच-पड़ताल के जल्दबाजी में पॉलिसी ले लेते हैं, जिसका फायदा स्कैम करने वाले गैंग उठा लेते हैं.
कहां-कहां एक्टिव है बीमा फ्रॉड गैंग? बीमा फ्रॉड करने वाले गैंग ज्यादातर हिंदी भाषी इलाकों में सक्रिय हैं. इनमें बीमा एजेंट, आशा वर्कर, ग्राम प्रधान और कुछ मामलों में अस्पताल व बैंक से जुड़े लोग भी शामिल बताए जाते हैं, जो लोगों को भरोसा दिलाकर दस्तावेज और पैसे हासिल कर लेते हैं.
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कौन लोग बनते हैं आसान शिकार? बीमार, बुजुर्ग और कम पढ़ी-लिखी महिलाएं इस तरह के फ्रॉड का सबसे आसान निशाना बनती हैं. गैंग के लोग सरकारी मदद या इंश्योरेंस का भरोसा देकर जरूरी दस्तावेज हासिल कर लेते हैं और बाद में उनका गलत इस्तेमाल करते हैं.
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कैसे किया जाता है इंश्योरेंस स्कैम? फर्जी गैंग पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं और सरकारी योजनाओं में मदद का झांसा देते हैं. इसके बाद पैसे और दस्तावेज लेते हैं. बाद में इन्हीं दस्तावेजों के जरिए बीमा पॉलिसी और क्लेम में फर्जीवाड़ा कर दिया जाता है.
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डेटा में हेरफेर कर ऐसे होता है बड़ा फ्रॉड रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई मामलों में स्कैम करने वाले गैंग मृत लोगों की पहचान और दस्तावेजों का भी इस्तेमाल करते हैं. अपने फायदे के लिए पर्सनल डेटा में बदलाव कर बीमा क्लेम निकालने की कोशिश की जाती है. इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है.
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कोरोना महामारी के बाद हेल्थ इंश्योरेंस की मांग तेजी से बढ़ी है. लेकिन इसी के साथ बीमा पॉलिसी के नाम पर फ्रॉड के मामले भी बढ़ रहे हैं. कई लोग बिना जांच-पड़ताल के जल्दबाजी में पॉलिसी ले लेते हैं, जिसका फायदा स्कैम करने वाले गैंग उठा लेते हैं.