म्यूचुअल फंड समाचार
SEBI ने इंट्राडे बॉरोइंग के नियमों में किया बदलाव, म्यूचुअल फंड्स को मिली बड़ी छूट
यह कदम म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की उन चिंताओं के बाद उठाया गया है जो उन्होंने इस साल की शुरुआत में जारी नियमों को लेकर जताई थी. उनका कहना था कि मौजूदा पाबंदियों से फंड का सही तरीके से मैनेजमेंट करने में रुकावट आ सकती है.
SIP में ये 2 गलतियां पड़ सकती हैं भारी! एक्सपर्ट ने बताया कहां करें बदलाव
सद्दाम अली के एक साल पुराने एसआईपी पोर्टफोलियो की समीक्षा की गई है. विशेषज्ञ ने गोल्ड और सिल्वर में अत्यधिक आवंटन (₹12,000) और मिड कैप फंडों के ओवरलैप पर चिंता व्यक्त की है. इसे बेहतर बनाने के लिए बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (बीएएफ) जोड़ने और गोल्ड-सिल्वर का आवंटन कम करने का सुझाव दिया गया है, साथ ही मिड कैप फंड को फ्लेक्सी कैप या लार्ज कैप से बदलने की सलाह दी गई है.
PSU बैंक शेयरों से MF ने बनाई दूरी! 8 महीने के निचले स्तर पर पहुंची स्टेक, निवेशकों के लिए चेतावनी या मौका?
मई 2026 में म्यूचुअल फंड्स ने PSU बैंक शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटा दी है. इससे निवेशकों के बीच सवाल उठने लगे हैं कि क्या फंड मैनेजर इस सेक्टर को लेकर सतर्क हो गए हैं या फिर यह सिर्फ मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो में बदलाव का हिस्सा है. PSU बैंक शेयरों में आई यह गिरावट चिंता की बात है या फिर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए नया मौका बन सकती है.
म्यूचुअल फंड या PMS… जोरदार रिटर्न के लिए कौन सा ऑप्शन है दमदार, जानें- दोनों में क्या है अंतर
म्यूचुअल फंड और PMS निवेशकों के लिए दो लोकप्रिय निवेश विकल्प हैं, लेकिन दोनों की संरचना, निवेश रणनीति, लागत और जोखिम प्रोफाइल काफी अलग हैं. जहां म्यूचुअल फंड में निवेश 100 रुपये से शुरू किया जा सकता है, वहीं PMS के लिए कम से कम 50 लाख रुपये का निवेश जरूरी है. म्यूचुअल फंड सभी निवेशकों के लिए एक समान पोर्टफोलियो प्रदान करते हैं, जबकि PMS में निवेशक की जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज्ड पोर्टफोलियो तैयार किया जाता है.
HDFC AMC का इन्वेस्टमेंट के लिए नया एप्रोच, ‘ग्रोथ फॉर गुड’ पोर्टफोलियो से स्थिर और टिकाऊ निवेश पर फोकस
Growth for GOOD Portfolio’ मुख्य रूप से उन कंपनियों में निवेश करेगा जो मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता का प्रदर्शन करती हैं. इस रणनीति की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘नॉन-हार्म’ (Non-Harm) और सस्टेनेबिलिटी सिद्धांत है.
HDFC Defence Fund का बड़ा दांव! मई में Tata Motors को पोर्टफोलियो में किया शामिल; 2 शेयरों में घटाई हिस्सेदारी
HDFC Defence Fund ने मई 2026 में अपने पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए Tata Motors को शामिल किया है, जबकि MTAR Technologies और Rishabh Instruments में हिस्सेदारी घटाई है. फंड ने Bharat Electronics, Bharat Forge, Bharat Dynamics और Mazagon Dock Shipbuilders जैसे डिफेंस सेक्टर से जुड़े शेयरों में निवेश बढ़ाया है.
पोर्टफोलियो में ओवरलैपिंग से कैसे बचें? Mid & Small Cap SIP में कितना रिस्क है? SIP बेहतर है या Lumpsum?
क्या आपके पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं? क्या कई फंड्स में निवेश करने से आपका जोखिम कम होता है या फिर पोर्टफोलियो में ओवरलैपिंग बढ़ जाती है? निवेशकों के मन में अक्सर ऐसे सवाल आते हैं, खासकर तब जब वे Mid Cap और Small Cap फंड्स में SIP के जरिए निवेश कर रहे हों.
इस फंड ने ₹10000 की sip को बना दिया ₹1.56 करोड़, 21 साल में मिला 15% सालाना कंपाउंडिंग का दमदार रिटर्न
Nippon India Value Fund ने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. ETMutualFunds के अनुसार, 21 साल तक हर महीने 10000 रुपये की SIP करने वाले निवेशक का निवेश बढ़कर 1.56 करोड रुपये हो गया. फंड को वैल्यू रिसर्च और मॉर्निंगस्टार से चार स्टार रेटिंग मिली है.
इन 3 म्यूचुअल फंड ने दिया 21% तक का रिटर्न, ₹10000 की SIP बनी ₹35 लाख; जानें पूरा कैलकुलेशन
मिड कैप फंड्स ने पिछले एक दशक में निवेशकों को शानदार रिटर्न देकर वेल्थ क्रिएशन का मजबूत उदाहरण पेश किया है. आंकड़ों के अनुसार, हर महीने 10,000 रुपये की एसआईपी करने वाले निवेशकों का 12 लाख रुपये का कुल निवेश 35 लाख रुपये से अधिक में बदल गया. इन फंड्स ने 20 फीसदी से अधिक एक्सआईआरआर दिया है.
Nuvama Wealth को मिला बड़ा लाइसेंस, पहले SIF फिर म्यूचुअल फंड लॉन्च करेगी कंपनी; क्या बदलेगा?
नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट को म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू करने के लिए सेबी से अंतिम मंजूरी मिल गई है. 4.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के क्लाइंट एसेट्स संभालने वाली कंपनी अब पहले स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) और बाद में म्यूचुअल फंड स्कीम लॉन्च करेगी.