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म्यूचुअल फंड समाचार

SIP में ये गलती पड़ सकती है भारी! Portfolio में Funds की भीड़ से बचें

क्या आपके Portfolio में बहुत सारे Mutual Funds हैं? अगर हां, तो जरूरी नहीं कि ज्यादा Funds का मतलब ज्यादा Diversification हो. कई बार अलग-अलग Funds में एक जैसे Stocks होने से Portfolio में Overlapping बढ़ जाता है और Risk कम होने के बजाय बढ़ सकता है. ऐसे में सवाल है कि Portfolio में कितने Funds रखना सही है? Overlapping से कैसे बचें और सही Asset Allocation कैसे करें? जानिए इस वीडियो में.

Jio का नया कमाल, अब मचाएगा म्यूचुअल फण्ड में धमाल!

यह वीडियो आपको बताएगा कि Jio BlackRock ने भारत के म्यूचुअल फंड बाजार में एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है.पहले केवल Direct Plans ऑफर करने के बाद अब AMC ने Regular Plans भी लॉन्च किए हैं. जानिए Direct Plans और Regular Plans में क्या फर्क है, Jio BlackRock अपना तरीका क्यों बदल रहा है, और […]

ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड के 22 साल पूरे, ₹1 लाख बना ₹46.6 लाख

ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड ने 22 साल पूरे कर लिए हैं. इस दौरान ₹1 लाख का निवेश बढ़कर ₹46.6 लाख हुआ. फंड ने 19.11% CAGR रिटर्न दिया. वहीं, ₹10,000 की मासिक SIP करीब ₹2.37 करोड़ बन गई.

30 हजार की SIP से करोड़ों का सपना, कितना है सच?

हर महीने ₹30,000 की SIP अगर लगातार 7 साल तक की जाए, तो आखिर कितना पैसा जमा हो सकता है. क्या सिर्फ SIP के दम पर रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है, या फिर Lumpsum Investment और Step-Up SIP की भी जरूरत होगी. इस वीडियो में हम इसी पूरे गणित को समझेंगे.अगर आपका लक्ष्य भविष्य के लिए बड़ा फंड तैयार करना है, तो सिर्फ निवेश की रकम ही नहीं, बल्कि निवेश की अवधि, रिटर्न और सही Asset Allocation भी बेहद अहम है. तो ₹30,000 की SIP से कितना फंड बन सकता है और उसे और तेजी से कैसे बढ़ाया जा सकता है, जानिए इस वीडियो में.

Equity Funds से पैसा निकला, Small-Midcap में बरसा! क्या है खेल?

Mutual Fund investors के बीच इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जुलाई में Equity Mutual Funds से करीब ₹44,824 करोड़ बाहर निकले हैं. लेकिन हैरानी की बात ये है कि SIP के जरिए निवेश अभी भी जारी है. यानी लोग पैसा निकाल भी रहे हैं और नया पैसा लगा भी रहे हैं. तो आखिर बाजार में ये कैसा खेल चल रहा है? क्या निवेशक मुनाफा काटकर पैसा निकाल रहे हैं? या फिर उनका पैसा Small Cap और Mid Cap जैसी दूसरी जगहों पर जा रहा है? इस पूरे बदलाव का आपके निवेश पर क्या असर हो सकता है और क्या ये बाजार के लिए चिंता की बात है? जानिए इस वीडियो में.

म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव, HDFC Bank की बादशाहत खत्म; ICICI Bank ने हासिल किया नंबर-1 का ताज

जुलाई 2026 में ICICI Bank ने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की सबसे ज्यादा वैल्यू वाली स्टॉक होल्डिंग के मामले में HDFC Bank को पीछे छोड़ दिया है. म्यूचुअल फंड्स के पास ICICI Bank की करीब 3.01 लाख करोड़ रुपये की होल्डिंग है, जबकि HDFC Bank में करीब 2.96 लाख करोड़ रुपये का निवेश है. HDFC Bank की लीडरशिप सक्सेशन और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंताओं के बीच ICICI Bank के स्टॉक परफॉर्मेंस में मजबूती दिखी है.

पोर्टफोलियो में है Flexi Cap फंड्स की भरमार, समझें ये स्मार्ट इन्वेस्टमेंट या नुकसान?

एक इन्वेस्टर के मल्टी-फंड पोर्टफोलियो, जिसमें फ्लेक्सी कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप स्कीम की एक्सपर्ट जांच की गई. रिकमेंडेशन में कई फ्लेक्सी कैप फंड को काफी कम करना, मिड और स्मॉल कैप फंड में इन्वेस्टमेंट को एक साथ करना और बेहतर डाइवर्सिफिकेशन के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक ऑप्शन तलाशना शामिल था. इस गाइडेंस का मकसद 10 साल के इन्वेस्टमेंट होराइजन के लिए पोर्टफोलियो को आसान बनाना है. आज आपको इस वीडियो में इस बात की जानकारी मिलेगी कि क्या एक पोर्टफोलियो में Flexi Cap की भरमार सही है?

आ गया Nippon का नया NFO, कम रिस्क में बढ़िया रिटर्न देगा ये फंड, यहां समझें क्यों लगाएं पैसा?

Nippon इंडिया म्यूचुअल फंड ने 'इन्कम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंड' NFO को लॉन्च किया है. ये फंड 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक खुला है. 24 महीने से ज्यादा निवेश रखने पर 12.5 फीसदी LTCG टैक्स लगता है.

SIP से 5 करोड़ रुपये बनाने का Formula! Portfolio में करें ये बड़े बदलाव

5 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने के लिए SIP और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की सही रणनीति जरूरी है. जानिए कैसे SIP स्टेप-अप, फ्लेक्सी कैप, मिड कैप और इंडेक्स फंड के जरिए पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है.

म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में कर रहे हैं ये गलती? डायवर्सिफिकेशन के नाम पर बढ़ रहा है रिस्क

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सही पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन बेहद जरूरी है. केवल अलग-अलग AMC के फंड्स में निवेश करना डाइवर्सिफिकेशन नहीं, बल्कि डुप्लीकेशन हो सकता है. अलग-अलग कैटेगरी के फंड्स, सही एसेट एलोकेशन और अनुशासित SIP के जरिए निवेशक अपने जोखिम को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकता है.