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कृषि समाचार

खरीफ फसलों पर संकट के संकेत, कमजोर मानसून और महंगाई से बढ़ेगी चिंता; किसानों के लिए अलर्ट

इस बार खरीफ सीजन पर कमजोर मानसून और पश्चिम एशिया तनाव का दोहरा असर पड़ सकता है. अल नीनो के कारण बारिश कम रहने की आशंका है, जिससे फसल प्रोडक्शन घट सकता है. वहीं कच्चे तेल और खाद की बढ़ती कीमतों से किसानों की लागत बढ़ेगी. इसका असर खाद्य महंगाई और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है.

IMD ने 2026 में सामान्य से कम मॉनसून का दिया संकेत, 92 फीसदी बारिश का अनुमान; इन फसलों पर पड़ेगा असर

Monsoon Forecast: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, जो आम तौर पर 1 जून के आस-पास केरल में शुरू होता है और सितंबर के मध्य तक लौट जाता है. 2026 में मॉनसून का सामान्य से कम रहना, पिछले तीन साल में ऐसा पहला मौका होगा.

4 साल बाद खुला गेहूं निर्यात का रास्ता, कई देशों ने भारत से खरीदने में दिखाई दिलचस्पी

भारत ने करीब 4 साल बाद गेहूं निर्यात पर लगी पाबंदी हटाकर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत वापसी दर्ज की है. मिस्र, इंडोनेशिया, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों ने भारतीय गेहूं खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. सरकार जल्द ही DGFT के जरिए निर्यात कोटा तय करने वाली है, जिससे इंटरनेशनल ट्रेड को गति मिलेगी. हालांकि, बेमौसम बारिश से क्वालिटी पर असर जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं.

अब महंगा नहीं पड़ेगा ट्रैक्टर! सरकार दे रही 50% तक सब्सिडी, पाने के लिए करना होगा बस ये काम

केंद्र और राज्य सरकारें किसानों को ट्रैक्टर और कृषि मशीन खरीदने पर लोन के साथ भारी सब्सिडी दे रही हैं. SMAM योजना के तहत 40 से 80 फीसदी तक सब्सिडी मिलता है. आसान आवेदन प्रक्रिया और कम लागत से अब आधुनिक खेती अपनाना किसानों के लिए पहले से ज्यादा सरल हो गया है.

गमले में उगने वाली तुलसी करा सकती है लाखों की कमाई, पत्तियों से बीज तक बिकती है हर चीज; जानें खेती का A टू Z तरीका

तुलसी की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला एक शानदार विकल्प बनकर उभरी है. बढ़ती डिमांड और आसान खेती के कारण यह छोटे किसानों से लेकर युवाओं तक के लिए एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल साबित हो सकती है. अगर सही तरीके से योजना बनाई जाए, तो यह छोटा सा पौधा आपको बड़ी कमाई दे सकता है.

बेमौसम बारिश से रबी फसलों को भारी नुकसान, 2.49 लाख हेक्टेयर प्रभावित; गेहूं पर सबसे ज्यादा मार

देश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे 2.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है. गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, जबकि आम और लीची जैसी बागवानी फसलें भी प्रभावित हुई हैं. IMD के अनुसार कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

25 लाख टन यूरिया आयात करेगी सरकार, खरीफ फसलों के लिए तैयारी तेज; जारी हुआ टेंडर

होर्मुज संकट और वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस की कमी पैदा हो रही है, जिससे यूरिया प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है. खरीफ सीजन से पहले सरकार किसी भी तरह की कमी से बचना चाहती है. किसानों के लिए यूरिया बेहद जरूरी होता है, खासकर धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए.

पश्चिम एशिया संघर्ष: फर्टिलाइजर प्लांट के लिए गैस की कीमतों में 60% बढ़ोतरी, सरकार पर बढ़ सकता है सब्सिडी का बोझ

उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि देश के पास आने वाले खरीफ मौसम में कृषि की मांग को पूरा करने के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है. खाद की उपलब्धता, उत्पादन, आयात और लॉजिस्टिक्स पर रियल-टाइम आधार पर नजर रखने के लिए एक विशेष कार्य समूह और एक आपातकालीन 'वॉर रूम' बनाया गया है.

ईरान-इजरायल तनाव लंबा खिंचा तो फर्टिलाइजर पर पड़ेगा बड़ा असर, प्रोडक्शन में हो सकती है 10-15% की कमी

मध्य पूर्व में बढ़ते ईरान-इजराइल तनाव का असर अब भारत के फर्टिलाइजर सेक्टर पर भी दिखने लगा है. क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो भारत में फर्टिलाइजर उत्पादन में 10-15 फीसदी तक गिरावट आ सकती है. कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता और सप्लाई चेन में बाधा इस जोखिम को बढ़ा रही है.

ईरान-इजराइल युद्ध से हल्दी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक्सपोर्ट रुकने से गिरे दाम; किसानों को हो रहा भारी नुकसान

ईरान-इजरायल युद्ध के चलते भारत में हल्दी की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. एक्सपोर्ट रुकने के कारण घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ गई और दाम करीब 3,500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं. पहले 16,500 रुपये पर बिकने वाली हल्दी अब करीब 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है. मराठवाड़ा जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है.