| Income Tax Slab | Income Tax Rate |
|---|---|
| 0-2.5 लाख रुपए तक | Nil |
| 2.5- 5 लाख रुपए तक | 5% |
| 5-10 लाख रुपए तक | 20% |
| 10 लाख से ऊपर | 30% |
| Income Tax Slab | Income Tax Rate |
|---|---|
| 0-3 लाख रुपए | Nil |
| 3-7 लाख रुपए | 5% |
| 7-10 लाख रुपए | 10% |
| 10-12 लाख रुपए | 15% |
| 12-15 लाख रुपए | 20% |
| 15 लाख से ज्यादा पर | 30% |
| Income Tax Slab | Income Tax Rate |
|---|
| Income Tax Slab | Income Tax Rate |
|---|
| Income Tax Slab | Income Tax Rate |
|---|
| Income Tax Slab | Income Tax Rate |
|---|
| Income Tax Slab | Income Tax Rate |
|---|---|
| 0-2.5 लाख रुपए तक | NIL |
| 2.5- 5 लाख रुपए तक | 5% |
| 5-10 लाख रुपए तक | 20% |
| 10 लाख से ऊपर | 30% |
| Income Tax Slab | Income Tax Rate |
|---|---|
| 4-8 लाख रुपये | 5% |
| 8-12 लाख रुपये | 10% |
| 12-16 लाख रुपये | 15% |
| 16-20 लाख रुपये | 20% |
| 20-24 लाख रुपये | 25% |
| 24 लाख रुपये से ऊपर | 30% |
बजट 2025 पहली फरवरी को पेश होने जा रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे आठवीं बार पेश करेगी. लेकिन ये बजट फरवरी में ही क्यों पेश होता है और 1 तारीख को ही क्यों? कैसे तैयार होता है ये बजट? हलवा सेरेमनी क्या होती है? बजट शब्द कहां से आया? चलिए यूनियन बजट से जुड़े ऐसे ही दिलचस्प बातें और तथ्य आपको बताते हैं.
हर साल 1 फरवरी को बजट पेश किया जाता है ताकि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष से पहले जरूरी कानूनों को लागू किया जा सके. पहले बजट 28 फरवरी को पेश होता था लेकिन बजट के प्रस्तावों को लागू करने के लिए कम समय मिलता था इसलिए मोदी सरकार ने बजट पेश करने की तारीख को आगे कर 1 फरवरी कर दिया.
‘बजट’ शब्द की जड़ें फ्रेंच शब्द ‘Bougette’ में हैं, जिसका मतलब है ‘छोटा चमड़े का ब्रीफकेस’. आपने कई बार कई वित्त मंत्रियों के हाथ में बजट के दौरान एक ब्रीफकेस देखा ही होगा.
बजट फाइनल होने के बाद, वित्त मंत्रालय में एक खास परंपरा निभाई जाती है जिसे ‘हलवा सेरेमनी’ कहा जाता है. इस परंपरा में एक बड़े बर्तन में हलवा बनाया जाता है और इसे वित्त मंत्री सभी कर्मचारियों को परोसते हैं. खास बात ये है कि कोविड-19 के कारण इस परंपरा को कुछ सालों के लिए रोका गया था और हलवे की जगह स्वीट बॉक्स दिए गए थे.
1950 में बजट के लीक होने की घटना सामने आई थी जिसके बाद, इसे गोपनीय रखने के लिए कड़े कदम उठाए गए थे. बजट तैयार करने वाले अधिकारियों को 10 दिनों के लिए नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बंद कर दिया जाता है. वे अपने परिवार और दोस्तों से बिल्कुल कट जाते हैं जब तक कि बजट संसद में पेश न हो जाए.
2021 में पहली बार बजट को पेपरलेस बनाया गया था. बजट की कॉपियां अब डिजिटल रूप में स्टोर की जाती हैं. यह कदम प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप उठाया गया है.
पहली महिला वित्त मंत्री इंदिरा गांधी थीं जिन्होंने पदभार 1970 में संभाला था.
सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाली महिला निर्मला सीतारमण हैं जिन्होंने अब तक 7 बजट पेश कर दिए हैं और जो अब 8वां बजट पेश करने जा रही हैं.
सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री मोरारजी देसाई हैं जिन्होंने 10 बार बजट पेश किया है.
पहला हिंदी बजट 1955 में पेश किया गया था.
सबसे लंबा भाषण, निर्मला सीतारमण का 2021 का भाषण था जो 2 घंटे 40 मिनट तक चला था.
पहले बजट पेश करने का समय शाम 5 बजे था, जिसे 1999 में 11 बजे कर दिया गया था.
पहले बजट को फरवरी के आखिरी कार्यदिवस पर पेश किया जाता था फिर 2017 से इसे 1 फरवरी कर दिया गया है.
निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के लिए पारंपरिक ब्रीफकेस को बदलकर भारतीय ‘बहीखाता’ का इस्तेमाल शुरू किया, जिस पर राष्ट्रीय चिह्न बना होता है.
1973 में यशवंतराव चव्हाण द्वारा पेश किए गए बजट को 'ब्लैक बजट’ कहा गया क्योंकि इसमें 550 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा था. जो उस वक्त के हिसाब से भारत में गंभीर आर्थिक संकट को बताता है.
बजट तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की बजट शाखा की होती है. इसमें NITI आयोग, राजस्व विभाग, और अन्य मंत्रालयों के साथ सलाह-मशविरा किया जाता है. विशेषज्ञों, किसानों, अर्थशास्त्रियों, और निवेशकों से भी राय ली जाती है.
बजट हर भारतीय को किसी न किसी रूप में प्रभावित करता ही है. आम जनता टैक्स में कटौती की उम्मीद करती है. सेक्टर्स अतिरिक्त फंडिंग की ओर देखते हैं. राज्य नई ट्रेनों या प्रोजेक्ट्स की उम्मीद करते हैं. बजट में हर किसी के लिए कुछ न कुछ जरूर होता है!
















मोदी 3.0 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 8वीं बार बजट पेश करने जा रही है. सीतारमण पहली महिला वित्त मंत्री है जो फुल टाइम सेवा दे चुकी है. हालांकि पहली महिला वित्त मंत्री का दर्जा इंदिरा गांधी के पास है लेकिन वो ज्यादा समय के लिए वित्त मंत्री नहीं थी जबकि सीतारमण ने अपना कार्यकाल पूरा किया है. सीतारमण ने 1980 में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्थित सीतलक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन पूरा किया है. इसके बाद 1984 में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), से अर्थशास्त्र में मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की डिग्री हासिल की है.
निर्मला सीतारमण वित्त मंत्री बनने से पहले, 2017 से 2019 तक रक्षा मंत्री रही. वह 2008 में बीजेपी में शामिल हुईं थी.

डॉ नागेश्वरन, भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं. यह लेखक, शिक्षक और कई किताबों के सह-लेखक रह चुके हैं. भारत और सिंगापुर के कई मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट में पढ़ा चुके हैं.

अरविंद श्रीवास्तव 1994 बैच के कर्नाटक कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं. ये राजस्व सचिव हैं. इससे पहले ये DIPAM के भी सचिव रह चुके हैं. इससे पहले वह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में संयुक्त सचिव और फिर अतिरिक्त सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं.

अनुराधा ठाकुर हिमाचल प्रदेश कैडर के 1994 बैच की IAS अधिकारी हैं. इससे पहले ये मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात थी. हाल ही में इन्होंने अपना डेपुटेशन भी एक्सटेंड किया था.
किसी भी सरकार को चलाने का खर्च और कमाई का लेखा-जोखा बजट कहलाता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत, किसी वर्ष का केंद्रीय बजट या वार्षिक वित्तीय विवरण उस साल के लिए सरकार की अनुमानित आय और खर्च का विवरण होता है. आसान भाषा में इसमें सरकार का लेखा-जोखा होता है.
बजट शब्द फ्रेंच शब्द Bougette से आया है. Bougette का मतलब होता है 'छोटा बैग'.
यह शब्द 15वीं शताब्दी में फ्रेंच भाषा से अंग्रेजी में आया और फिर वहां से दुनियाभर में इस्तेमाल होने लगा.
आजाद भारत से पहले 7 अप्रैल, 1860 को पहला बजट पेश किया गया था. तब स्कॉटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने बजट को पेश किया था.
आजादी मिलने के बाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर, 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आरके षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था.
ब्रिटिश शासन में बजट अंग्रेजी में पेश होता था. परंपरा आगे बढ़ी और साल 1955 तक बजट सिर्फ अंग्रेजी में ही पेश किया जाता था. लेकिन 1955-56 में कांग्रेस सरकार ने इसे अंग्रेजी और हिंदी दोनों में ही पेश करना शुरू कर दिया था.
साल 1950 तक का बजट राष्ट्रपति भवन में छपा लेकिन फिर इसके लीक होने के बाद दिल्ली के मिंटो रोड स्थित प्रेस में इसकी छपाई होने लगी. फिर 1980 में वित्त मंत्रालय में ही सरकारी प्रेस में बजट छपने लगा है.
साल 1999 तक बजट फरवरी के आखिरी दिन शाम 5 बजे पेश किया जाता था. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि भारत का बजट ब्रिटिश समय को ध्यान में रखकर पेश किया जाता था. क्योंकि जब भारत में शाम 5 बजते थे, उस वक्त ब्रिटेन में 11 बजता था. उसी आधार पर भारत में शाम 5 बजे बजट पेश करने की परंपरा थी. फिर तत्तकालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को खत्म कर साल 1999 से सुबह 11 बजे बजट पेशन करना शुरू किया.
साल 2017 से पहले बजट को फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था. लेकिन साल 2017 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करने की तारीख बदल कर एक फरवरी कर दी थी.
रेल बजट को केंद्रीय बजट से अलग पेश किया जाता था लेकिन साल 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरूण जेटली ने रेलवे के लिए अलग बजट पेश करने की परंपरा को बदला और 92 साल पुरानी ब्रिटिश परंपरा को खत्म कर रेल बजट को केंद्रीय बजट में मिला दिया.
मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए 2 घंटे 42 मिनट का लंबा भाषण दिया था.
भारतीय संविधान में अंतरिम बजट जैसा कोई शब्द नहीं है. सरकार चाहे तो साल में एक से ज्यादा बार पेश कर सकती है. जिस साल आम चुनाव होने वाले होते हैं, उस साल सरकार लेखानुदान पारित कराती है. इसमें केवल राजस्व और खर्चों का ही लेखा-जोखा होता है और तीन या चार महीनों के लिए सरकारी कर्मियों के वेतन, पेंशन और अन्य सरकारी खर्च के लिए बजट पारित कराया जाता है. लेखानुदान के तहत सरकार कोई नीतिगत फैसला नहीं करती है.
जब सरकार की कमाई कम और खर्च ज्यादा हो जाए, इसका अंतर राजकोषीय घाटा कहलाएगा. राजकोषीय घाटा सरकार के कुल कमाई और कुल व्यय के बीच का अंतर है.
राजस्व घाटा या रेवेन्यू डेफिसिट सरकार की वित्तीय स्थिति को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण इंडीकेटर है. यह स्थिति तब पैदा होती है जब सरकार की राजस्व प्राप्तियां उसकी राजस्व खर्च से कम होती हैं. राजस्व खर्च में सैलेरी, पेंशन इसका खर्च आदि शामिल होता है, और राजस्व प्राप्ति में टैक्स से आया पैसा होता है. जब खर्च, प्राप्ति से ज्यादा हो तब राजस्व घाटा होता है.
इसे करंट अकाउंट डेफिसिट भी कहते हैं. यह घाटा देश के आयात-निर्यात से जुड़ा होता है. जब देश का आयात, निर्यात से ज्यादा होता है उस अंतर को चालू खाता घाटा कहा जाता है.