बजट 2026 में UPI–RuPay इंसेंटिव पर चली कैंची, 10 फीसदी घटा अलॉटमेंट
बजट 2026 में सरकार ने UPI और RuPay इंसेंटिव स्कीम के लिए अलॉटमेंट घटाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया है, जो पिछले वर्ष के रिवाइज्ड अनुमान से करीब 10 फीसदी कम है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम लगातार रिकॉर्ड बना रहा है.
Budget 2026: बजट 2026 में डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को लेकर सरकार ने अहम फैसला लिया है. UPI और RuPay इंसेंटिव स्कीम के लिए अगले वित्त वर्ष 2026-27 में अलॉटमेंट घटाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह राशि 2025-26 के रिवाइज्ड अनुमान 2,196 करोड़ रुपये से करीब 10 फीसदी कम है. दिलचस्प बात यह है कि यह कटौती ऐसे समय की गई है, जब UPI और RuPay दोनों पर ट्रांजैक्शन वॉल्यूम लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं.
क्यों घटा इंसेंटिव आउटले
सरकार इस स्कीम के तहत RuPay डेबिट कार्ड और लो-वैल्यू BHIM-UPI P2M ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देती है, ताकि मर्चेंट्स पर जीरो MDR का बोझ न पड़े. 2024-25 में सरकार ने इस मद में 1,923 करोड़ रुपये खर्च किए थे. हालांकि 2025-26 के शुरुआती बजट में केवल 437 करोड़ रुपये रखे गए थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 2,196 करोड़ रुपये किया गया. 2026-27 के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान यह दिखाता है कि सपोर्ट जारी है, लेकिन संसाधनों पर सख्ती भी बढ़ रही है.
डिजिटल पेमेंट्स बढ़े, कमाई के विकल्प सीमित
आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में UPI ने 228 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 300 ट्रिलियन रुपये रही. दिसंबर 2025 में ही 21.6 बिलियन ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड बना. यह डेटा नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का है. इसके बावजूद जीरो MDR मॉडल के कारण पेमेंट इकोसिस्टम के खिलाड़ियों- बैंकों, TPAPs और पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए मोनेटाइजेशन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
फिनटेक्स पर असर, इंसेंटिव बना सहारा
इंसेंटिव स्कीम फिनटेक कंपनियों के लिए रेवेन्यू सपोर्ट का काम करती रही है. उदाहरण के तौर पर, लिस्टेड UPI प्लेटफॉर्म Paytm ने 30 सितंबर 2025 को समाप्त छह महीनों में इस स्कीम से 128 करोड़ रुपये के इंसेंटिव रेवेन्यू को मान्यता दी थी. TPAPs बैंक और ग्राहकों के बीच इंटरमीडियरी के रूप में UPI सेवाएं उपलब्ध कराते हैं.
MDR पर बहस फिर तेज
अलॉटमेंट में कटौती के बाद एक बार फिर टायर्ड MDR की मांग उठी है, कम से कम बड़े मर्चेंट्स के लिए. इंडस्ट्री का तर्क है कि जिन मर्चेंट्स का सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये से अधिक है, उनसे सीमित MDR (जैसे 30 bps) लिया जा सकता है, जबकि छोटे मर्चेंट्स और P2P ट्रांजैक्शन जीरो चार्ज पर बने रहें. इससे इकोसिस्टम को स्थायी कमाई मॉडल मिल सकता है.
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