Union Budget 2026: मछली पालन-पशुपालन पर फोकस, बजट में किसानों को क्या-क्या मिला?
बजट 2026-27 में सरकार ने खेती से आगे बढ़कर ग्रामीण आय बढ़ाने पर फोकस किया है. पशुपालन, मत्स्य पालन और उच्च मूल्य वाली फसलों के जरिए किसानों के लिए नए रोजगार और आय के अवसर बनाने की बात कही गई है. इसके साथ ही कृषि और सहायक क्षेत्रों के लिए आवंटन बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए हैं.
Union Budget 2026: सरकार ने बजट 2026-27 में गांवों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के अलावा दूसरे कामों पर खास ध्यान दिया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब सिर्फ फसल उगाने से ही नहीं, बल्कि पशुपालन, मछली पालन और महंगी फसलों से भी किसानों की आय बढ़ाई जाएगी. सरकार का मकसद है कि गांवों में ज्यादा रोजगार के मौके बनें और किसानों की कमाई स्थिर रहे.
इस बजट में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए 1,62,671 करोड़ रुपये रखे गए हैं. यह राशि पिछले साल के संशोधित अनुमान से करीब 7 फीसदी ज्यादा है. बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के रास्ते पर चलते हुए विकसित भारत की ओर बढ़ रही है, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों पर खास ध्यान रहेगा.
गांवों में आय के नए रास्ते खोलने की तैयारी
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसानों की आमदनी सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहे. इसके लिए खेती के साथ-साथ ऐसे कामों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनसे गांवों में ज्यादा लोगों को काम मिले. पशुपालन, मछली पालन और बागवानी जैसे क्षेत्र इसी सोच का हिस्सा हैं.
मछुआरों को बड़ी राहत, समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा
मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. भारतीय जहाजों द्वारा समुद्र के विशेष आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्र में पकड़ी गई मछलियों पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा. अगर ये मछलियां विदेशी बंदरगाहों पर उतारी जाती हैं, तो उन्हें निर्यात माना जाएगा. इससे मछुआरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधा फायदा मिलेगा.
सरकार ने यह भी कहा कि मछली पकड़ने और ढुलाई के दौरान गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे. इसका मकसद यह है कि भारतीय मछुआरे समुद्र में मौजूद संसाधनों का पूरा लाभ उठा सकें.
समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने के लिए सरकार ने एक और कदम उठाया है. पिछले साल निर्यात किए गए कुछ कच्चे माल के लिए एफओबी सीमा एक प्रतिशत से बढ़ाकर तीन प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे मछली और समुद्री उत्पादों के निर्यात से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी.
500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का विकास
देश में मछली पालन बढ़ाने के लिए सरकार 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों को विकसित करेगी. खास तौर पर तटीय इलाकों में मछली से जुड़ी पूरी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. इसमें स्टार्टअप, महिला समूह और मछली किसान उत्पादक संगठन अहम भूमिका निभाएंगे, ताकि मछुआरों को बाजार से सीधा जोड़ मिल सके.
पशु-चिकित्सा सेवाओं पर फोकस
पशुपालन को मजबूत करने के लिए सरकार ने पशु-चिकित्सा सेवाओं पर भी ध्यान दिया है. 20,000 से ज्यादा पशु-चिकित्सा पेशेवरों की संख्या बढ़ाने के लिए ऋण से जुड़ी सब्सिडी योजना लाई जाएगी. इसके तहत पशु चिकित्सा कॉलेज, अस्पताल, जांच लैब और प्रजनन केंद्र खोले जाएंगे.
तटीय और पहाड़ी इलाकों में महंगी फसलों को समर्थन
खेती में बदलाव लाने के लिए सरकार तटीय इलाकों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी फसलों को बढ़ावा देगी. वहीं पूर्वोत्तर में अगर के पेड़ और पहाड़ी इलाकों में बादाम, अखरोट और चिलगोजा जैसी फसलों पर जोर दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इन फसलों से किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं.
पहाड़ी इलाकों में पुराने बागों को फिर से तैयार किया जाएगा. अखरोट, बादाम और चिलगोजा की आधुनिक तरीके से खेती को बढ़ावा मिलेगा. सरकार चाहती है कि इसमें ज्यादा से ज्यादा युवा आगे आएं और फसलों से जुड़े कामों में मूल्य बढ़ाया जाए.
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नारियल उगाने वालों के लिए योजना
सरकार भारतीय काजू और कोको कार्यक्रम के जरिए इन फसलों के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ाएगी. लक्ष्य है कि 2030 तक भारत काजू और कोको के मामले में दुनिया में मजबूत पहचान बनाए. इसके साथ ही चंदन की खेती और उससे जुड़े उद्योग को फिर से मजबूत करने की योजना भी बजट में शामिल है.
वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत देते हुए सरकार ने तेंदू पत्तों पर लगने वाला स्रोत पर टैक्स घटाकर दो प्रतिशत कर दिया है. इससे लोगों पर नकदी का दबाव कम होगा और आमदनी में स्थिरता आएगी.
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