Gold-Silver Price Today: सोने-चांदी में 2 दिनों से गिरावट जारी, गोल्ड 1.51 लाख पर पहुंचा, चांदी 4000 रुपये सस्ती, फेड के फैसले का दिखा असर
फेड के ब्याज दर में बदलाव न किए जाने और मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं पर दबाव दिखा. रिटेल बाजार में भी सोना 1330 रुपये और चांदी 4310 रुपये तक सस्ती हो गई.
Gold and Silver Rate Today: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा फैसले के बाद गुरुवार को सोना और चांदी दोनों दबाव में नजर आए. फेड ने अपनी मार्च बैठक में ब्याज दरों को लगातार दूसरी बार 3.5 फीसदी से 3.75 फीसदी के दायरे में स्थिर रखा और सख्त रुख बनाए रखा. इससे निकट भविष्य में तेज दर कटौती की उम्मीदों को झटका लगा, जिसका असर बुलियन बाजार पर साफ दिखा.
घरेलू वायदा बाजार MCX में सोना -चांदी लगातार दूसरे दिन गिरता नजर आया. 19 मार्च को सोना 0.72 फीसदी तक टूट गया. यानी आज ये 1095 रुपये सस्ता होकर 151,930 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. जबकि शुरुआती कारोबार में लुढ़ककर 151712 रुपये पर पहुंच गया था. वहीं चांदी MCX पर करीब 1.63 फीसदी टूटकर 2,44,150 रुपये प्रति किलो पर आ गई. यानी फेड के फैसले के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली और सतर्क रुख दोनों दिखाए.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी दबाव में नजर आए. स्पॉट गोल्ड 0.88 फीसदी की गिरावट के साथ 4,848 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया, जबकि स्पॉट सिल्वर 2.41 फीसदी की गिरावट के साथ 75.6 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती नजर आई.
रिटेल की क्या है कीमत?
बुलियन वेबाइट पर सोना 1330 रुपये गिरकर 152,470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया, जबकि चांदी की कीमत 243,860 रुपये प्रति किलो पर कारोबार करती नजर आई. इसमें 4310 रुपये की गिरावट देखने को मिली.

इन कारणों से दबाव
विशेषज्ञों की नजर सिर्फ फेड पर नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव पर भी है. अमेरिका-ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बुलियन को चर्चा में बनाए रखा है. तेल महंगा होने से महंगाई का खतरा बढ़ता है, और ऐसे माहौल में सोना-चांदी कभी सुरक्षित निवेश के रूप में चमकते हैं, तो कभी ऊंची ब्याज दरों के दबाव में फिसल जाते हैं. यह दोहरी खींचतान फिलहाल बाजार में साफ दिखाई दे रही है.
फेड चेयर जेरोम पॉवेल की टिप्पणियों पर भी बाजार की खास नजर रही. दरें स्थिर रखने का फैसला बाजार की उम्मीदों के मुताबिक था, लेकिन केंद्रीय बैंक के सख्त संकेतों ने यह साफ कर दिया कि जल्द और आक्रामक दर कटौती की राह आसान नहीं दिख रही. यही वजह है कि सोना-चांदी में राहत की कोशिश के बावजूद दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.
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