US Fed ने ब्याज दरों में नहीं की कटौती, 2026 के लिए GDP अनुमान को बढ़ाकर 2.4 फीसदी किया
फेड ने पिछले साल लगातार तीन बार दरें घटाई थीं और फिर इस साल की शुरुआत में उन्हें स्थिर कर दिया था. जार पहले से ही दरों में ठहराव की उम्मीद कर रहा था, क्योंकि ईरान संघर्ष से जुड़ी तेल की कीमतों में अस्थिरता ने महंगाई को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं.
यूनाइटेड स्टेट्स फेडरल रिजर्व ने 18 मार्च को अपनी दो-दिवसीय फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा कर दी. US Fed ने दरों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया है. US Fed ने दरें अपरिवर्तित रखी हैं. फेड ने 2026 के लिए GDP के औसत अनुमान को 2.3% से बढ़ाकर 2.4% कर दिया है.
बेंचमार्क दर
US Fed ने 11-1 के वोट से रेट्स को 3.5-3.75 फीसदी की सीमा में अपरिवर्तित रखा. यह बेंचमार्क दर बैंकों के लिए ओवरनाइट उधार लागत निर्धारित करती है और पूरी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ताओं तथा व्यवसायों के लिए उधार दरों को प्रभावित करती है.
अहम प्वाइंट
- Fed ने 2026 में एक बार और 2027 में एक बार रेट कट के अपने अनुमान को बरकरार रखा है.
- Fed का कहना है कि मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों के असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
- Fed ने 2026 के लिए GDP ग्रोथ के अपने औसत अनुमान को 2.3% से बढ़ाकर 2.4% कर दिया है.
- Fed का कहना है कि आर्थिक गतिविधियां ‘मजबूत रफ्तार’ से बढ़ रही हैं.
- महंगाई का स्तर अब भी कुछ हद तक बढ़ा हुआ है.
कोर मुद्रास्फीति के लिए इसकी उम्मीद, जिसमें अस्थिर सेगमेंट को शामिल नहीं किया जाता, 2.5% से बढ़कर 2.7% हो गई.
जियो-पॉलिटिकल टेंशन पर नजर
US फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को इसलिए अपरिवर्तित रखा, क्योंकि पॉलिसी बनाने वाले पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के असर के साथ-साथ आर्थिक गति में नरमी के संकेतों पर भी विचार किया. इस फैसले की काफी उम्मीद थी. बाजार पहले से ही दरों में ठहराव की उम्मीद कर रहा था, क्योंकि ईरान संघर्ष से जुड़ी तेल की कीमतों में अस्थिरता ने महंगाई को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं, जबकि विकास के संकेतक नरमी के शुरुआती संकेत दिखा रहे हैं.
तीन बार घटी थीं दरें
फेड ने पिछले साल लगातार तीन बार दरें घटाई थीं और फिर इस साल की शुरुआत में उन्हें स्थिर कर दिया था. नीति-निर्माता अपने दोहरे लक्ष्य को संतुलित करने की कोशिश में लगे हैं. महंगाई को 2 फीसदी के लक्ष्य के करीब रखना और साथ ही रोजगार को भी बढ़ावा देना.
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने इस काम को और भी मुश्किल बना दिया है. तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है, और साथ ही सप्लाई चेन में रुकावटों और बढ़ती लागत के कारण आर्थिक विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है.
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