Avantel Share Price Today: कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, यह ऑर्डर एक घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कॉन्ट्रैक्ट है, जिसे मार्च 2027 तक पूरा करना है. ऑर्डर की कुल वैल्यू 177.35 करोड़ रुपये है. कंपनी ने Q1 FY27 में 71 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया था.
India LPG Import: ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई में रुकावटों से पर्शियन गल्फ से सप्लाई पर अधिक निर्भरता का जोखिम भारत के सामने आ गया. अब देश तेजी से अपने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इंपोर्ट के स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन ला रहा है.
NSE Share Price: जबरदस्त रिस्पॉन्स ने NSE IPO को इस साल भारत के प्राइमरी मार्केट में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाले पब्लिक ऑफरिंग में से एक बना दिया है. NSE के शेयर की कीमत में फ्लैट शुरुआत के बाद बढ़त देखी गई.
Opening Bell: US में ब्याज दरें और बढ़ने की आशंका के बीच ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई, जिससे ज्यादातर ग्लोबल मार्केट में गिरावट आई और इसका असर निफ्टी50 और सेंसेक्स पर भी पड़ा.
Tata Sons IPO: दशकों तक, खासकर रतन टाटा के कार्यकाल के दौरान, टाटा संस और पूरे टाटा ग्रुप से जुड़े मुद्दों पर ट्रस्टीज के बीच आम सहमति थी. SDTT के पास टाटा संस की 27.98% और SRTT के पास 23.56% हिस्सेदारी है, जिससे दोनों ट्रस्टों के पास कुल मिलाकर 51.54% हिस्सेदारी हो जाती है.
Stock to Watch Today: हाल की कॉरपोरेट घोषणाओं के बाद, एक्साइड इंडस्ट्रीज, भारत डायनामिक्स, इंडो टेक ट्रांसफ़ॉर्मर्स, एकॉर्ड ट्रांसफॉर्मर एंड स्विचगियर, GHCL, पिरामिड टेक्नोप्लास्ट और BCPL रेलवे इंफ़्रास्ट्रक्चर भी निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं.
ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप, शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के स्वागत समारोह के लिए मैरीलैंड मिलिट्री बेस पर मौजूद थे. जॉइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप का स्वागत आम राष्ट्रपति प्रोटोकॉल से अलग था. दोनों नेताओं के बीच गुरुवार को बातचीत होनी है, लेकिन किसी बड़ी सफलता की उम्मीद कम है.
Tata Sons IPO: शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप के लिए टाटा संस में उसकी हिस्सेदारी एक बड़ी संपत्ति भी है और वित्तीय मुश्किलों का कारण भी. टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग से मिस्त्री परिवार को अपनी होल्डिंग का कुछ हिस्सा बेचकर पैसा जुटाने का रास्ता मिल सकता है
Opening Bell: वेस्ट एशिया में तनाव कम होने की संभावना को देखते हुए निफ्टी50 और सेंसेक्स में बढ़त हुई. कच्चे तेल की नरम कीमतें रुपये के लिए मुख्य सहारा बनी हुई हैं.
बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, पिछले साल अक्टूबर के बाद कंपनियों ने आईपीओ के जरिए सबसे ज्यादा फंड जुटाया है. कई नए इश्यू की जबरदस्त मांग ने भी कंपनियों को प्राइमरी मार्केट में आने के लिए प्रोत्साहित किया है.