LIC OFS: निवेशकों के मन में कई सवाल है. जैसे- क्या शेयर पर दबाव आएगा? क्या यह खरीदारी का मौका होगा? और सबसे अहम, जिन लोगों के पास LIC की पॉलिसी है, क्या उन पर इसका कोई असर पड़ेगा? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने डाबर इंडिया के ‘100 फीसदी’ के दावे वाले कई फूड प्रोडक्ट्स को बेचने से रोक दिया है. इसके पीछे FSSAI का क्या तर्क है और क्यों ऐसा किया गया है. इसे समझ लेते हैं.
LIC Share Outlook: LIC का शेयर फिलहाल कम वैल्यूएशन, मजबूत मुनाफा, हाई ROE और ब्रोकरेज के पॉजिटिव आउटलुक की वजह से निवेशकों की नजर में बना हुआ है. शेयर फिलहाल दबाव में जरूर है, लेकिन एनालिस्ट्स की राय निवेशकों के लिए उम्मीद जगा रही है.
LIC Share Today: सरकार ने 4 अगस्त को LIC में 2.5% हिस्सेदारी के लिए 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) की घोषणा की, जिसमें 'ग्रीन शू ऑप्शन' के जरिए अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी शामिल है. अभी केंद्र सरकार के पास LIC की लगभग 96.5 फीसदी हिस्सेदारी है.
इन राज्यों का तर्क है कि इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद, ट्रंप प्रशासन एक बार फिर अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है. विवादित टैरिफ व्यवस्था 24 जुलाई को लागू हुई.
FSSAI ने कहा कि डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर वैध FSSAI ऑर्गेनिक एंडोर्समेंट के बिना 'जैविक भारत' लोगो दिखाया जा रहा था. कंपनी से 15 दिनों के भीतर 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' जमा करने के लिए भी कहा गया है.
2017 में Kpler के रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से किसी भी जुलाई महीने में यह मात्रा सबसे अधिक थी. पश्चिमी एशिया और यूरोप में चल रहे युद्धों ने ग्लोबल फ्यूल ट्रेड के तौर-तरीकों को बदल दिया है, जिससे कीमतें बढ़ी हैं और एक्सपोर्टर्स के लिए मौके बने हैं.
कर्मचारी और पेंशनर्स के संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सालाना वेतन वृद्धि की दर बढ़ाने और महंगाई भत्ते (DA) को एक निश्चित स्तर पर पहुंचने के बाद मूल वेतन में मिलाने का आग्रह किया है. इस बीच कर्मचारी और पेंशनर्स के संगठन लगातार अपनी मांग रख रहे हैं और अपने प्रस्ताव भी दे रहे हैं.
Stocks to Watch Today: मंगलवार 4 अगस्त के कारोबार में कुछ चुनिंदा शेयरों पर निवेशकों की नजरें रहेंगी, क्योंकि किसी कंपनी ने डील की है, तो किसी को ऑर्डर मिला है. जिसकी वजह से इनके शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.
नई लिमिट लागू होने पर सैलरी पाने वाले और भी कर्मचारी अनिवार्य प्रोविडेंट फंड और पेंशन कवरेज के दायरे में आ जाएंगे. अभी अनिवार्य EPF और EPS कवरेज सिर्फ उन संस्थानों पर लागू होता है जिनमें 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं.