यह मामला FSSAI के उस रोक वाले आदेश से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि '100%' जैसे दावों का इस्तेमाल 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018' का उल्लंघन है. FSSAI ने भ्रामक विज्ञापन और लेबलिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है.
शिकायत का डेटा ऐसे समय में आया है जब भारत के सिक्योरिटीज मार्केट में रिटेल निवेशकों की अभूतपूर्व आमद देखी गई है. पिछले कुछ वर्षों में लाखों नए डीमैट खाते खोले गए हैं. इंवेस्टर्स सर्विस से संबंधित मुद्दे बाजार में बने हुए हैं.
Stock To Watch Today: आज यानी 7 अगस्त के कारोबार में अलग-अलग खबरों और पहली तिमाही के नतीजों की वजह से LIC, Trent, AWL Agri Business, PNB Housing और Dabur जैसे शेयरों पर नजर रहेगी. कई कंपनियां आज तिमाही नतीजे जारी करेंगी.
Fine on Meta: गुरुवार देर रात आए फैसले में जज ब्रायन बीडशेड ने कहा कि रकम का बड़ा हिस्सा- 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज की सेवाओं पर खर्च किया जाएगा. पहले चरण में जूरी ने मेटा पर 375 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना लगाने का आदेश दिया था.
यह बिल इनकम-टैक्स एक्ट, 2025, फाइनेंस एक्ट, 2026 और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन करता है. यह कानून इनकम-टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को रद्द करता है, साथ ही इसके तहत पहले से की गई कार्रवाइयों को मान्यता देता है.
विदेशी फंडिंग को लेकर भारत में अक्सर बहस होती रहती है. जब भी किसी NGO, ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान या सामाजिक संगठन का विदेशी चंदा चर्चा में आता है, तब फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट ( FCRA) का नाम सामने आता है. FCRA है क्या और इसकी जरूरत क्यों पड़ी.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि लागत का भुगतान तो किसी न किसी को करना ही होगा. आखिरकार, किसी न किसी तरह से उपभोक्ता ही इसकी कीमत चुका रहा है. हो सकता है कि यह वही उपभोक्ता न हो, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा हो.
यह समझौता इस बात पर निर्भर हो सकता है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा ले. ट्रंप प्रशासन ने पहले ही किसी भी ऐसे समझौते से इनकार कर दिया है. ईरान ने इस जलडमरूमध्य पर कुछ हद तक नियंत्रण बनाए रखने पर जोर दिया है.
Stocks to Watch Today: गुरुवार 6 अगस्त के कारोबार में कुछ शेयरों पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी. बड़े निवेश और अहम डील से लेकर तिमाही नतीजों और नए ऑर्डर मिलने तक, यहां उन स्टॉक्स की जानकारी दी गई है जिन पर आज के कारोबार में नजर रहेगी.
RBI ने UCBs को लाइसेंस देना तब रोक दिया था, जब यह पाया गया कि लाइसेंस पाने वाले कई UCBs कुछ ही समय में आर्थिक रूप से कमजोर हो गए थे. UCBs को 1966 में बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन के जरिए RBI के दायरे में लाया गया था.