एक्सचेंज अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्ज से कमाता है, और इसमें भी ऑप्शंस ट्रेडिंग का सबसे बड़ा योगदान है. अगर ऑप्शंस का वॉल्यूम कम होता है, तो NSE की ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई पर उन बिजनेस की तुलना में तेजी से दबाव आ सकता है.
भारत में खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों को समझने के लिए पारंपरिक 'थाली' से बेहतर कुछ नहीं हो सकता. यह एक ऐसी आम भोजन है जिसमें देश में रोजाना खाई जाने वाली कई चीजें एक ही प्लेट में परोसी जाती हैं. इन चीजों की बढ़ती कीमतें घरों के बजट पर भारी पड़ रही हैं.
दुनिया के कुछ बड़े AI एग्जीक्यूटिव्स ने इस टेक्नोलॉजी से जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए, तेजी से शक्तिशाली होते जा रहे AI मॉडल्स के डेवलपमेंट को धीमा करने की मांग की है. इसके बाद भारतीय IT शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया.
Opening Bell: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई. बॉन्ड यील्ड और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से दुनिया भर के बाजारों में निवेशकों के बीच घबराहट के बावजूद, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 0.8% की बढ़त हुई.
वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने छोटे डिजिटल पेमेंट के लिए नियम बताते हुए 14 सितंबर को एक गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया है. यह साफ कर दिया है कि 2000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगेगा. लेकिन यह किसके लिए है?
ग्रेटर और लेसर हनिश पर कब्जा करना, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के आस-पास विद्रोहियों की तेजी से बढ़ती गतिविधियों का ताजा घटनाक्रम है. अमेरिकी राष्ट्रपति का यह भी दावा है कि यूक्रेन और रूस एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला न करने पर सहमत हो गए हैं.
Stock to Watch Today: शेयर बाजार लागातार दबाव में नजर आ रहा है. क्रूड की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी यील्ड में इजाफे ने दबाव बढ़ाया है. इस बीच आप आज यानी मंगलवार 15 सितंबर के कारोबार में कुछ शेयरों पर नजर रख सकते हैं.
हालांकि, इस रकम से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज के बारे में नोटिफिकेशन में कुछ नहीं कहा गया. इससे अप्रत्यक्ष रूप से अधिक रकम वाले UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का रास्ता खुल गया है.
IT सर्विसेज, स्टील, हॉस्पिटैलिटी और कंज्यूमर गुड्स में फैले 185 अरब डॉलर के टाटा ग्रुप एम्पायर के सेंटर में बैठी एंटिटी ने वर्षों तक स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग का विरोध किया है, लेकिन अब सख्त रेगुलेटरी ने साफ तर दिया है कि कंपनी को पब्लिक होना ही पड़ेगा.
आम ग्राहकों के लिए सबसे अच्छी दरें भी 7 फीसदी से कम ही हैं, जबकि प्राइवेट बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और NBFCs कुछ खास समय-सीमा के लिए अधिक ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं. सीनियर सिटिजन्स के मामले में यह अंतर थोड़ा कम हो जाता है, क्योंकि उन्हें PSU बैंकों से अधिक ब्याज मिलता है.