Suzlon Energy Share Outlook: बुधवार को सुजलॉन एनर्जी के शेयर में 1.59 फीसदी की गिरावट आई. टेक्निकल नजरिए से देखें तो सुजलॉन ने काफी समय तक एक रेंज में कारोबार किया है. स्टॉक ने अपवर्ड रेंज में भी पर्याप्त समय बिताया है और इसके बाद कंसोलिडेशन की स्थिति बनी है.
ऑर्गनाइजेशन ने X पर पोस्ट किया, 'EPFO अब WhatsApp पर भी. जरूरी अपडेट और काम की जानकारी पाने के लिए EPFO के ऑफिशियल WhatsApp चैनल से जुड़ें.' 19 अगस्त, 2025 को शुरू हुए इस चैनल के फॉलोअर्स की संख्या सितंबर 2026 के मध्य तक 75,000 से अधिक हो गई थी.
यूजर्स के शायद अभी भी इस बात को लेकर कंफ्यूजन है कि 2000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर लगने वाले चार्ज का भुगतान, उन्हें करना है या फिर इसका बोझ मर्चेंट उठाएंगे. MDR और कंज्यूमर पर लगने वाले सीधे चार्ज के बीच अंतर समझना जरूरी है.
Opening Bell: दुनिया भर से मिले-जुले संकेतों के बीच 16 सितंबर को भारतीय इंडेक्स बढ़त के साथ खुले और निफ्टी 23200 के आसपास रहा.
मंगलवार शाम को हाउस में 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' ने एक प्रक्रियात्मक बाधा पार कर ली, जब दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने रिपब्लिकन के साथ मिलकर वोट किया. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले इस बिल को हाउस से मंजूरी मिलनी जरूरी है.
India-New Zealand FTA: समझौते के तहत, भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के लगभग 95% निर्यात पर टैरिफ (आयात शुल्क) या तो पूरी तरह खत्म कर दिए जाएंगे या काफी कम कर दिए जाएंगे. समझौते के दायरे में आने वाले न्यूजीलैंड के आधे से अधिक निर्यात लागू होने के पहले दिन से ही ड्यूटी-फ्री हो जाएंगे.
Stock to Watch Today: कंपनियों की घोषणाओं के बाद GTPL हैथवे, BHEL, पर्पल स्टाइल लैब्स और NBCC (इंडिया) भी निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं. शेयर मार्केट मंगलवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ. शुरुआती बढ़त के बाद बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली थी.
एक रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में 33.4 अरब डॉलर (लगभग 3.21 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए हैं. अमेरिका को अपने सपोर्ट विमानों के मामले में भी नुकसान उठाना पड़ा. शायद सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा MQ-9 रीपर से जुड़ा है.
एक्सचेंज अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्ज से कमाता है, और इसमें भी ऑप्शंस ट्रेडिंग का सबसे बड़ा योगदान है. अगर ऑप्शंस का वॉल्यूम कम होता है, तो NSE की ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई पर उन बिजनेस की तुलना में तेजी से दबाव आ सकता है.
भारत में खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों को समझने के लिए पारंपरिक 'थाली' से बेहतर कुछ नहीं हो सकता. यह एक ऐसी आम भोजन है जिसमें देश में रोजाना खाई जाने वाली कई चीजें एक ही प्लेट में परोसी जाती हैं. इन चीजों की बढ़ती कीमतें घरों के बजट पर भारी पड़ रही हैं.