रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कमर्शियल बैंकों द्वारा बकाया लोन की वसूली के लिए नियमों का एक विस्तृत सेट जारी किया है. इसमें बैंकों और आउटसोर्स किए गए रिकवरी एजेंटों से अपेक्षित व्यवहार में काफी बदलाव किए गए हैं.
जस्टिस अमित महाजन ने 3 अगस्त के FSSAI आदेश को चुनौती देने वाली डाबर की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, FSSAI और अन्य संबंधित पक्षों को भी नोटिस जारी किया.
Reliance Power Share Today: यह बढ़ोतरी कंपनी की कुछ सब्सिडियरी कंपनियों के सामने चल रही कानूनी और वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, कंपनी के स्थिर ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस की वजह से संभव हो पाई. वित्तीय नतीजे का असर रिलायंस पावर के शेयरों पर नजर आ रहा है.
डिफेंस अधिकारी और IAF एनालिस्ट अभी इस प्रपोजल की टेक्निकल डिटेल्स की जांच कर रहे हैं. अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो इस समझौते से लोकल इंडस्ट्रियल कंपनियों को लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये का सीधा बिजनेस मिलने की उम्मीद है.
यह मामला FSSAI के उस रोक वाले आदेश से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि '100%' जैसे दावों का इस्तेमाल 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018' का उल्लंघन है. FSSAI ने भ्रामक विज्ञापन और लेबलिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है.
शिकायत का डेटा ऐसे समय में आया है जब भारत के सिक्योरिटीज मार्केट में रिटेल निवेशकों की अभूतपूर्व आमद देखी गई है. पिछले कुछ वर्षों में लाखों नए डीमैट खाते खोले गए हैं. इंवेस्टर्स सर्विस से संबंधित मुद्दे बाजार में बने हुए हैं.
Stock To Watch Today: आज यानी 7 अगस्त के कारोबार में अलग-अलग खबरों और पहली तिमाही के नतीजों की वजह से LIC, Trent, AWL Agri Business, PNB Housing और Dabur जैसे शेयरों पर नजर रहेगी. कई कंपनियां आज तिमाही नतीजे जारी करेंगी.
Fine on Meta: गुरुवार देर रात आए फैसले में जज ब्रायन बीडशेड ने कहा कि रकम का बड़ा हिस्सा- 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज की सेवाओं पर खर्च किया जाएगा. पहले चरण में जूरी ने मेटा पर 375 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना लगाने का आदेश दिया था.
यह बिल इनकम-टैक्स एक्ट, 2025, फाइनेंस एक्ट, 2026 और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन करता है. यह कानून इनकम-टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को रद्द करता है, साथ ही इसके तहत पहले से की गई कार्रवाइयों को मान्यता देता है.
विदेशी फंडिंग को लेकर भारत में अक्सर बहस होती रहती है. जब भी किसी NGO, ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान या सामाजिक संगठन का विदेशी चंदा चर्चा में आता है, तब फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट ( FCRA) का नाम सामने आता है. FCRA है क्या और इसकी जरूरत क्यों पड़ी.