वेनेजुएला पर कंट्रोल हासिल कर चीन की मजबूत नस दबा रहे ट्रंप, सिर्फ तेल नहीं… खेल उससे आगे का है

सवाल है कि अचानक मादुरो को ही निशाना क्यों बनाया गया? हां, वह वेनेज़ुएला के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय या पसंद किए जाने वाले नहीं थे. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी यह नहीं कहा है कि उनका मकसद दबे-कुचले वेनेजुएला के लोगों को बचाना था.

चीन को कैसे साधने की कोशिश कर रहा अमेरिका. Image Credit: AI

नए साल की शुरुआत जोरदार हुई. 2026 के तीसरे दिन ही एक असाधारण खबर ने पूरी दुनिया को हैरानी में डाल दिया. खबर थी कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया है. असल में ‘पकड़ लिया’ सही शब्द है या नहीं पर शायद ‘किडनैप’ या ‘अगवा’ ज्यादा मुफीद शब्द रहेगा.’गिरफ्तार’ या ‘हिरासत में लिया’? या यह असाधारण तरीके से सौंपने का मामला है? इनमें से आप किसी को भी अपने हिसाब से खुद चुन लीजिए. हथकड़ी लगी मादुरो की तस्वीरें, जिनमें कभी-कभी उनकी आंखों पर पट्टी बंधी होती थी. वे 2003 में इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की गिरफ्तारी की याद दिला रही थीं.

सवाल है कि अचानक मादुरो को ही निशाना क्यों बनाया गया? हां, वह वेनेज़ुएला के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय या पसंद किए जाने वाले नहीं थे. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी यह नहीं कहा है कि उनका मकसद दबे-कुचले वेनेजुएला के लोगों को बचाना था. लेकिन उन्होंने इस बारे में बहुत बात की है कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला का तेल निकालकर इंटरनेशनल मार्केट में कैसे बेचेंगी. मादुरो को निशाना बनाने के पीछे कई थ्योरी चल रही हैं. मोटा-मोटी कहें, तो तीन. इन तीनों को ही थोड़ा खोलकर समझने की कोशिश करते हैं.

सिर्फ तेल नहीं… उससे आगे बढ़कर देखिए

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के पीछे सिर्फ तेल ही एकमात्र वजह नहीं है. शासन बदलने के संभावित मकसद के तौर पर देश के जरूरी खनिजों को नजरअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि तेल पर सबका ध्यान जाता है, लेकिन अमेरिका के पास यह बहुत ज्यादा है और शायद जरूरत से भी ज्यादा. लेकिन उसके पास वे जरूरी खनिज नहीं हैं जो अमेरिका के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी हैं.

बैंक ऑफ अमेरिका के एनालिस्ट्स के अनुसार, 2025 तक अमेरिकी सरकार ने AI पर दबदबा बनाने के लिए जरूरी सेक्टर्स में सीधे दखल दिया. पिछली जुलाई में युद्ध विभाग ने रेयर-अर्थ्स बनाने वाली कंपनी MP मटेरियल्स को एक नया घरेलू मैग्नेट-मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बनाने और कंपनी की माइनिंग और प्रोसेसिंग क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 900 मिलियन डॉलर का पैकेज दिया.

चीन के कदम के बाद अमेरिका की कोशिश

चीन, जिसकी दुनिया की कुल प्रोसेसिंग क्षमता में लगभग 85 फीसदी हिस्सेदारी है, ने पिछले साल रेयर अर्थ के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद खनिज हासिल करना और भी जरूरी हो गया. एनालिस्ट्स का कहना है कि ग्रीनलैंड के खनिज भंडारों तक पहुंचना ट्रंप के इस द्वीप को अमेरिकी नियंत्रण में लाने की कोशिशों का हिस्सा है. वेनेजुएला में अमेरिकी दखल पर विचार करते समय यह भी शायद हिसाब-किताब का हिस्सा था.

अमेरिकी कॉर्मस सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक ने वीकेंड पर वेनेजुएला के बारे में कहा, ‘आपके पास स्टील है, आपके पास मिनरल्स हैं, सभी जरूरी मिनरल्स हैं, उनकी माइनिंग का शानदार इतिहास रहा है जो अब पुराना पड़ गया है.’

समस्या क्या है?

मिंट ने हॉलगेर्टन एंड कंपनी के माइनिंग स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर एक्लेस्टोन के हवाले से लिखा कि वेनेजुएला के मामले में बस एक ही समस्या है. इसके पास उतने जरूरी मिनरल्स नहीं हैं जितने उसके कुछ पड़ोसी देशों के पास हैं. जो मिनरल्स उसके पास हैं, जैसे सोना, निकेल, बॉक्साइट (एल्यूमीनियम प्रोडक्शन में इस्तेमाल होता है), और कोल्टन (इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाने में इस्तेमाल होता है) उन्हें निकालना फायदे से अधिक मुश्किल हो सकता है.

उन्होंने कहा कि सोने को छोड़कर, वेनेजुएला के कन्फर्म्ड मिनरल्स सस्ते हैं. बॉक्साइट और निकेल की कीमतें तांबा, लिथियम, या टिन की तुलना में बहुत कम हैं, जिनकी माइनिंग ब्राजील और चिली जैसे दूसरे दक्षिण अमेरिकी देशों में होती है.

वेनेजुएला के ज्यादातर मिनरल डिपॉजिट आर्को मिनरो डेल ओरिनोको, या ओरिनोको माइनिंग आर्क में हैं. यह एक दूरदराज का जंगल से ढका माइनिंग एरिया है जिस पर ज्यादातर गैर-कानूनी नेटवर्क और हथियारबंद ग्रुप्स का कंट्रोल है. यहां एक्सप्लोरेशन या माइनिंग प्रोजेक्ट चलाने में किसी भी विदेशी कंपनी के लिए बहुत ज्यादा रिस्क होता है और इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती.

इसके बावजूद, वेनेजुएला में मिलिट्री एक्शन दिखाता है कि अमेरिकी सरकार की जरूरी मिनरल्स की प्यास अभी बुझी नहीं है. अमेरिका का अमेरिका में अपना प्रभाव क्षेत्र मजबूती से फिर से स्थापित करना और चीन को इस क्षेत्र से बाहर निकालना यह बताता है कि सरकार पूरे लैटिन अमेरिका में एक्सेस पर ध्यान केंद्रित रखेगी.

चीन को झटका

एक थ्योरी यह है कि वेनेजुएला के तेल के सबसे बड़े खरीदारों में चीन भी शामिल था. इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के डेटा के अनुसार, पिछले साल चीन ने वेनेजुएला से रोजाना लगभग 400,000 बैरल तेल इंपोर्ट किया. अनुमानों के मुताबिक, यह देश के कच्चे तेल के एक्सपोर्ट का आधे से ज्यादा था. लेकिन अब वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका कब्जा हो गया है, जिसका मतलब है कि अमेरिका दक्षिण अमेरिकी देश से तेल के फ्लो को कंट्रोल करता है, इसलिए, यह चीन की एनर्जी सिक्योरिटी. इन्वेस्टमेंट और दक्षिण अमेरिका में उसके प्रभाव पर दबाव डालता है.

ट्रंप की हालिया नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी (NSS) से यह साफ है कि अमेरिका तथाकथित ‘वेस्टर्न हेमिस्फीयर’ को अपना बैकवाटर या प्रभाव क्षेत्र मानता है. दिसंबर 2025 में ट्रंप के प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को लागू किया. ट्रंप कोरोलरी के नाम से जानी जाने वाली यह रणनीति, एक सदी से भी ज्यादा समय में वेस्टर्न हेमिस्फीयर में अमेरिकी दबदबे को फिर से कायम करने का सबसे आक्रामक तरीका है और यह जियोपॉलिटिक्स को इस तरह से बदल सकती है जिसका दुनिया पर, खासकर लैटिन अमेरिका, रूस और चीन पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है.

वेनेजुएला पर ट्रंप का अभूतपूर्व कब्जा इस नए सिद्धांत का सीधा नतीजा है. NSS कहना है कि हम एक ऐसा हेमिस्फीयर चाहते हैं जिसकी सरकारें नार्को-टेररिस्ट, कार्टेल और दूसरे ट्रांसनेशनल क्रिमिनल संगठनों के खिलाफ हमारे साथ सहयोग करें. हम अहम रणनीतिक जगहों तक अपनी लगातार पहुंच सुनिश्चित करना चाहते हैं. इसलिए चीन का एंगल कुछ हद तक सही भी लगता है, क्योंकि पिछले साल ट्रंप ने पनामा को दो नहर बंदरगाह चीन को बेचने से रोक दिया था.

क्या है वेस्टर्न हेमिस्फीयर?

वेस्टर्न हेमिस्फीयर पृथ्वी का वह आधा भाग है जो प्रधान मध्यान्ह (Prime Meridian, 0°) से 180° देशांतर तक पश्चिम की ओर फैला हुआ है. इसमें मुख्य रूप से उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और उनके आसपास के द्वीप शामिल हैं. अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर का बड़ा भाग इसी गोलार्ध में आता है. कुछ हिस्सों में ग्रीनलैंड, आर्कटिक क्षेत्र और अंटार्कटिका के भाग भी शामिल होते हैं. दुनिया के कई बड़े देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, अर्जेंटीना, मैक्सिको इसी गोलार्ध में हैं. वेस्टर्न हेमिस्फीयर को अक्सर न्यू वर्ल्ड भी कहा जाता है और यह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

डॉलर और ब्रिक्स

मादुरो को क्यों हटाया गया, इसकी एक और थ्योरी यह है कि मादुरो की वेनेजुएला के तेल की बिक्री के लिए डॉलर का कम से कम इस्तेमाल करने की योजनाओं से ट्रंप परेशान थे. रिपोर्ट के मुताबिक, मादुरो चीनी युआन या रूसी रूबल में पेमेंट मिलने पर खुश थे. यह भी अटकलें थीं कि वेनेजुएला BRICS (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) फोरम में शामिल होगा. ट्रंप स्वाभाविक रूप से BRICS को अमेरिका विरोधी, डॉलर विरोधी गठबंधन मानते हैं और उन्होंने पहले भी BRICS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है. मादुरो के हटने के बाद ये संभावनाएं खत्म हो गई हैं.

कुल मिलाकर, 2026 की एक विस्फोटक शुरुआत हुई है. वे सभी जिन्होंने सोचा था कि 2025 की राजनीतिक अनिश्चितताएं, मुश्किलें, रुकावटें पीछे छूट गई हैं, वे फिर से सोचें. 2026 अब तक का सबसे अधिक अनिश्चितताओं वाला साल हो सकता है, जो कोविड-19 के साल को भी पीछे छोड़ देगा.