क्या पेट्रोल-डीजल कर सकते हैं स्टोर? जानें क्या है नियम और कितने दिन में हो जाता है खराब
पेट्रोल और डीजल को रखना पूरी तरह से मना नहीं है, लेकिन इसके लिए कानून ने सख्त सीमाएं तय की हैं. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के नियामक विभाग PESO की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक बिना लाइसेंस के अधिकतम 30 लीटर पेट्रोल रख सकते हैं. इसके अलावा आमतौर पर पेट्रोल 3 से 6 महीने और डीजल 6 से 12 महीने के बाद खराब होना शुरू हो सकते हैं.
How Much Petrol Diesel can be Stored: पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता का असर दुनिया के तेल और गैस बाजार पर दिख रहा है. यह समुद्री रास्ता इसलिए बेहद अहम है क्योंकि दुनिया के कुल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. भारत में भी एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरों के बीच लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि अगर स्थिति बिगड़ती है तो क्या पेट्रोल और डीजल की भी किल्लत हो सकती है. इसी वजह से कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या पेट्रोल या डीजल घर में रिजर्व रखा जा सकता है, कितनी मात्रा तक रखना कानूनी है और यह कितने समय तक खराब हुए बिना सुरक्षित रहता है. आइए जानते हैं.
पेट्रोलियम नियम 2002 क्या कहते हैं?
भारत में पेट्रोलियम से जुड़े नियम पेट्रोलियम एक्ट 1934 और पेट्रोलियम रूल्स 2002 के तहत तय किए गए हैं. इन नियमों में पेट्रोलियम के आयात, परिवहन, रिजर्व, उत्पादन, रिफाइनिंग से जुड़े कानून शामिल हैं. यानी पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन को कैसे लाया जाएगा, कैसे रखा जाएगा और कितनी मात्रा तक रखा जा सकता है, इसकी पूरी व्यवस्था इन्हीं नियमों में बताई गई है. इन नियमों के अनुसार पेट्रोलियम का मतलब किसी भी तरल हाइड्रोकार्बन या हाइड्रोकार्बन के मिश्रण से है. इसमें वे ज्वलनशील मिश्रण भी शामिल हैं जिनमें हाइड्रोकार्बन मौजूद होते हैं. उदाहरण के तौर पर एसीटोन, एथिल अल्कोहल, मिथाइल अल्कोहल और वुड नेफ्था को भी पेट्रोलियम कैटेगरी में रखा गया है.
फ्लैश पॉइंट क्या होता है?
पेट्रोलियम को समझने के लिए फ्लैश पॉइंट शब्द को जानना जरूरी है. दरअसल फ्लैश पॉइंट उस न्यूनतम तापमान को कहा जाता है जिस पर कोई पेट्रोलियम पदार्थ इतनी मात्रा में वाष्प छोड़ता है कि आग लगाने पर तुरंत चमक के साथ जल उठे. इसी फ्लैश पॉइंट के आधार पर पेट्रोलियम को तीन कैटेगरी में बांटा गया है.
- क्लास A पेट्रोलियम – जिनका फ्लैश पॉइंट 23 डिग्री सेल्सियस से कम होता है.
- क्लास B पेट्रोलियम – जिनका फ्लैश पॉइंट 23 डिग्री सेल्सियस से ऊपर लेकिन 65 डिग्री सेल्सियस से कम होता है.
- क्लास C पेट्रोलियम– जिनका फ्लैश पॉइंट 65 डिग्री सेल्सियस से ऊपर लेकिन 93 डिग्री सेल्सियस से कम होता है.
पेट्रोल स्टोरेज के क्या है नियम ?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले PESO (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन – Petroleum and Explosives Safety Organisation) की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, Petroleum Rules 2002 के अनुसार कुछ स्थितियों में पेट्रोलियम रखने के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती. इसके तहत अगर पेट्रोलियम क्लास A कैटेगरी का है और बिक्री के लिए नहीं रखा गया है, तो 30 लीटर तक की मात्रा रखने के लिए लाइसेंस जरूरी नहीं है.
क्या पेट्रोल डीजल खराब होते हैं?
ईंधन कंपनियां भी मानती हैं कि पेट्रोल और डीजल को लंबे समय तक स्टोर करने पर उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है. ऊर्जा कंपनी BP की ओर से जारी “A Guide to Storing Fuel” के मुताबिक पेट्रोल पंपों के भूमिगत टैंकों में ईंधन लगातार भरा जाता रहता है, इसलिए वहां स्टोरेज से जुड़ी समस्या बहुत कम होती है. लेकिन छोटे कंटेनर जैसे ड्रम या कैन में ईंधन लंबे समय तक रखने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.
पेट्रोल को स्टोर करने पर क्या होता है?
पेट्रोल कई तरह के रासायनिक घटकों का मिश्रण होता है. इन घटकों की अलग-अलग विशेषताएं होती हैं और यही ईंधन की परफॉर्मेंस तय करते हैं. जब पेट्रोल खुले कंटेनर में रखा जाता है और हवा के संपर्क में आता है तो समय के साथ वह धीरे-धीरे वाष्प बनकर उड़ने लगता है. इस प्रक्रिया में पेट्रोल के अलग-अलग घटक अलग गति से उड़ते हैं, जिससे ईंधन की संरचना और गुण बदलने लगते हैं. यही कारण है कि लंबे समय तक रखा गया पेट्रोल इंजन के लिए उतना प्रभावी नहीं रहता.
सीलबंद कंटेनर में पेट्रोल कितने समय तक सुरक्षित रहता है?
BP की गाइड के अनुसार अगर पेट्रोल को छाया में सीलबंद कंटेनर में रखा जाए तो उसकी स्टोरेज लाइफ लगभग एक साल तक हो सकती है. लेकिन जैसे ही कंटेनर की सील टूट जाती है, ईंधन की उम्र कम होने लगती है. 20°C तापमान पर यह करीब छह महीने तक सही रहता है. 30°C तापमान पर इसकी स्टोरेज लाइफ लगभग तीन महीने रह जाती है.
डीजल को स्टोर करने पर क्या होता है?
डीजल पेट्रोल की तरह बहुत ज्यादा उड़नशील नहीं होता. इसलिए इसमें पेट्रोल की तरह जल्दी वाष्पीकरण की समस्या नहीं होती और आमतौर पर स्टार्टिंग से जुड़ी परेशानी भी कम होती है. लेकिन डीजल को लंबे समय तक रखने पर दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. समय के साथ इसमें गोंद जैसे पदार्थ और तलछट बनने लगते हैं, जो इंजन के फिल्टर को जाम कर सकते हैं. अक्सर इस प्रक्रिया के साथ ईंधन का रंग भी गहरा होने लगता है.
अगर डीजल को ढके हुए स्थान पर सीलबंद कंटेनर में रखा जाए तो यह आम तौर पर लगभग एक साल तक सुरक्षित रह सकता है और कई मामलों में इससे भी ज्यादा समय तक चल सकता है. खुले कंटेनर में रखने पर समस्या बढ़ सकती है क्योंकि हवा की नमी संघनित होकर पानी बन जाती है. यह नमी बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देती है, जो ईंधन को खराब कर सकते हैं. इससे बचने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबे समय तक डीजल स्टोर करने की स्थिति में हर छह महीने में बायोसाइड ट्रीटमेंट किया जाना चाहिए.
एलपीजी के साथ नहीं होती ऐसी समस्या
एलपीजी के मामले में स्थिति थोड़ी अलग होती है. पेट्रोल और डीजल की तरह इसमें शेल्फ लाइफ की समस्या नहीं होती. अगर एलपीजी को सीलबंद कंटेनर में रखा जाए तो यह स्थिर रहता है और इसकी गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है.
पेट्रोल के गुण कैसे बदलते हैं?
| गुण | सप्ताह 1 | सप्ताह 2 | सप्ताह 3 | सप्ताह 4 | सप्ताह 5 |
|---|---|---|---|---|---|
| % मात्रा का नुकसान | 3 | 5 | 8 | 10 | 15 |
| ऑक्टेन RON | 98.1 | 98.4 | 98.6 | 99 | 99.5 |
| घनत्व (kg/l 15°C) | 0.75 | 0.76 | 0.765 | 0.78 | 0.79 |
| समान वॉल्यूम पर एयर-फ्यूल रेशियो | 13:1 | 12.8:1 | 12.7:1 | 12.5:1 | 12.3:1 |
इससे समझ आता है कि पांच हफ्तों के बाद पेट्रोल लगभग 5 प्रतिशत तक भारी हो सकता है. इसका असर यह होता है कि इंजन में हवा और ईंधन का मिश्रण बदल जाता है. ऐसे में इंजन ज्यादा “रिच” चलने लगता है यानी उसमें ईंधन की मात्रा ज्यादा हो जाती है. इससे स्पार्क प्लग गंदे हो सकते हैं और ईंधन की खपत भी बढ़ सकती है.
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