Ras Laffan पर ईरान का हमला दुनिया में मचाएगा हाहाकार, गैस-बिजली सबकी होगी किल्लत, जानें क्यों खास है ये शहर

पश्चिम एशिया में ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है. इजरायल द्वारा ईरान के अधिकारियों को निशाना बनाने के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए और ऑयल गैस फील्ड को टारगेट किया. इस दौरान कतर का Ras Laffan Industrial City भी प्रभावित हुआ. यह वैश्विक LNG सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा देता है.

यह दुनिया के सबसे अहम एनर्जी सेंटर्स में से एक है. Image Credit: money9live

LNG Supply: पश्चिम एशिया में जारी ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात दिन प्रति दिन गंभीर होते दिख रहे हैं. इजरायल ने हाल ही में ईरान के 3 अहम अधिकारियों को निशाना बनाया, जिनमें ईरान की युद्ध नीति बनाने वाले अली लारीजानी का नाम भी शामिल है. इसके जवाब में ईरान ने 9 अरब देशों में हमले किए और एनर्जी फील्ड को निशाना बनाया है.

इन हमलों में कतर का मेन एनर्जी हब Ras Laffan Industrial City भी शामिल है. यह दुनिया के सबसे अहम एनर्जी सेंटर्स में से एक है और ग्लोबल LNG सप्लाई में करीब 20 फीसदी योगदान देता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का नुकसान पूरी दुनिया की एनर्जी सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है. भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है क्योंकि भारत कतर से बड़ी मात्रा में LNG आयात करता है. सप्लाई में रुकावट आने से कीमतों में तेजी और आयात बिल बढ़ने की आशंका है.

दुनिया के लिए क्यों है इतना अहम

Ras Laffan दुनिया का सबसे बड़ा LNG एक्सपोर्ट टर्मिनल माना जाता है. यह अकेले करीब 20 फीसदी ग्लोबल LNG सप्लाई में योगदान देता है. यहां नॉर्थ फील्ड से निकलने वाली नेचुरल गैस को प्रोसेस किया जाता है. यह फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार है. इसके अलावा यहां GTL और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट भी बनाए जाते हैं. इस वजह से यह हब ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

77 मिलियन टन की कैपेसिटी

Ras Laffan Industrial City दुनिया का सबसे बड़ा LNG एक्सपोर्ट हब है, जिसकी मौजूदा कैपेसिटी करीब 77 मिलियन टन प्रति वर्ष है और यह अकेले ग्लोबल LNG सप्लाई का लगभग 20 फीसदी योगदान देता है. यहां LNG के साथ साथ LPG का 12 मिलियन टन से अधिक निर्यात होता है और Laffan रिफाइनरी रोजाना करीब 2.9 लाख बैरल कंडेनसेट प्रोसेस करती है. इसके अलावा यहां 2730 मेगावाट बिजली प्रोडक्शन और बड़े स्तर पर पानी के डीसेलिनेशन प्लांट भी हैं. यह हब दुनिया के करीब 25 फीसदी हीलियम का प्रोडक्शन भी करता है. भविष्य में नॉर्थ फील्ड विस्तार के बाद इसकी LNG क्षमता 126 MTPA से अधिक होने की उम्मीद है.

हमले का ग्लोबल सप्लाई पर असर

हाल ही में हुए मिसाइल हमले से इस प्लांट को नुकसान पहुंचने की खबर है. अगर यहां प्रोडक्शन प्रभावित होता है तो LNG सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा. इससे एशिया और यूरोप के देशों को गैस की कमी का सामना करना पड़ सकता है. पहले से ही तनाव के माहौल में गैस की कीमतों में तेजी देखी जा सकती है. इससे बिजली और इंडस्ट्री दोनों की लागत बढ़ सकती है. इस घटना से एक बार फिर से रुसी गैस की मांग बढ़ सकती है. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही यूरोपीय देश ने रुस से गैस और तेल की खरीदारी में भारी कटौती की थी.

भारत समेत देशों पर असर

भारत जैसे देश जो LNG आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है. सप्लाई कम होने से कीमतें बढ़ेंगी और आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा. इसका असर पेट्रोलियम प्रोडक्ट और बिजली कीमतों पर भी पड़ सकता है. साथ ही इंडस्ट्री की लागत बढ़ने से महंगाई पर असर दिख सकता है. पहले से ही एलपीजी गैस की किल्लत से जुझ रहे भारत में इस घटना के दिक्कतें और भी बढ़ सकती है.

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इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान से बढ़ेगी चुनौती

गैस प्रोसेसिंग और LNG इंफ्रास्ट्रक्चर काफी जटिल और कठिन होता है. अगर इसमें नुकसान होता है तो मरम्मत में महीनों लग सकते हैं. ऐसे में सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट आ सकती है. जानकारों का कहना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो यह सिर्फ अस्थायी नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल सप्लाई शॉक में बदल सकता है. इससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है.