रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 95.41 पर बंद हुआ. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से रुपये को समर्थन मिला. RBI के हालिया कदमों और विदेशी निवेश फ्लो की उम्मीदों ने भी भारतीय करेंसी को मजबूती दी.
Choice Broking ने Olectra Greentech, Supriya Lifescience और RBL Bank पर खरीदारी की सलाह दी है. ब्रोकरेज के अनुसार तीनों शेयर मजबूत तकनीकी संकेत दिखा रहे हैं. Olectra Greentech के लिए 1,400 रुपये, Supriya Lifescience के लिए 1,050 रुपये और RBL Bank के लिए 390 रुपये का टारगेट दिया गया है.
NLC India के OFS को पहले ही दिन जबरदस्त रिस्पांस मिली और यह नॉन रिटेल निवेशकों की कैटेगरी में 5 गुना से अधिक सब्सक्राइब हो गया. संस्थागत निवेशकों ने करीब 4,158 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं. सरकार कंपनी में अधिकतम 3 फीसदी हिस्सेदारी 303 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेच रही है.
इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है. FADA के अनुसार मई 2026 में इलेक्ट्रिक कारों की रिटेल बिक्री 81.2 फीसदी बढ़कर 26,682 यूनिट पहुंच गई. Tata Motors 10,340 यूनिट बिक्री के साथ शीर्ष पर रही, जबकि Mahindra और JSW MG Motor क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे.
SBI की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार RBI के हालिया कदमों से वित्त वर्ष 2026-27 में भारत में 55 अरब डॉलर से 65 अरब डॉलर तक विदेशी कैश का फ्लो हो सकता है. इससे रुपये को मजबूती मिलने, बैंकिंग सिस्टम में जमा राशि बढ़ने और पेमेंट बैलेंस में सुधार की उम्मीद है.
देश में इलेक्ट्रिक बसों की मांग तेजी से बढ़ रही है और Olectra Greentech इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है. कंपनी के पास करीब 10,000 इलेक्ट्रिक बसों का ऑर्डर बुक है, जो आने वाले कई वर्षों की कमाई को मजबूत आधार दे सकता है. FY26 में कंपनी का राजस्व 2,312 करोड़ रुपये और मुनाफा 179.5 करोड़ रुपये रहा.
मंगलवार को बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिससे Bank Nifty 2.1% चढ़कर 55,194 पर बंद हुआ और कारोबार के दौरान 55,300 के स्तर को भी पार कर गया. इस तेजी की मुख्य वजह RBI द्वारा फॉरेन कैपिटल फ्लो बढ़ाने के लिए जारी की गई रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा रही.
Mazagon Dock Shipbuilders की ऑर्डर बुक पिछले पांच वर्षों में 59% घटकर 49,744 करोड़ रुपये से 20,535 करोड़ रुपये रह गई है. इसके बावजूद निवेशक कंपनी को लेकर पॉजिटिव बने हुए हैं। इसकी वजह मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, 13,100 करोड़ रुपये से अधिक का कैश रिजर्व और भारतीय नौसेना के संभावित बड़े ऑर्डर्स हैं. Project 75I, Kalvari-class पनडुब्बियों और नए युद्धपोत कार्यक्रमों से कंपनी को 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर्स मिलने की उम्मीद है.
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है. जहां कई सेक्टर दबाव में हैं, वहीं डिफेंस कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है. रक्षा खर्च बढ़ने और हथियारों की मांग में वृद्धि की उम्मीद से निवेशकों ने डिफेंस सेक्टर में खरीदारी बढ़ाई है. भारतीय बाजार में भी इसका असर देखने को मिला है.
सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे कमजोर होकर 95.61 पर बंद हुआ. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, मजबूत डॉलर और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय मुद्रा पर दिखा. विदेशी निवेशकों की बिकवाली और शेयर बाजार में गिरावट ने भी दबाव बढ़ाया.