Tejaswita Upadhyay

तेजस्विता उपाध्याय वर्तमान में मनी 9 में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. बिजनेस, जेंडर और ह्यूमन राइट्स सेंगमेंट पर इनकी मजबूत पकड़ है. इसके अलावा हाशिये पर खड़े हर समुदाय पर रिपोर्ट करना इनका जज्बा है. इससे पहले यह क्विंट हिंदी, गांव कनेक्शन और स्पैन कम्यूनिकेशन जैसे संस्थानों में अहम पद पर रह चुकी हैं. इनका लगाव संगीत, साहित्य और नृत्य से है. तेजस्विता की एक स्टोरी, 'We The Change' को जेंडर सेंसिटिविटी के लिए 2024 के लाडली मीडिया अवार्ड्स में ज्यूरी एप्रीशिएशन सिटेशन से सम्मानित किया गया है.

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Tejaswita Upadhyay

भारतीय रेलवे की वित्तीय सेहत को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा. हाल के वर्षों में कुछ आंकड़े जरूर बदले हैं, लेकिन इनके पीछे की असली वजहें और आगे की रणनीति क्या है, समझने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

वैश्विक व्यापार में बदलते समीकरणों के बीच भारत की एक पुरानी रणनीतिक साझेदारी नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती दिख रही है. आंकड़े, नीतिगत संकेत और राजनीतिक संदेश यह इशारा कर रहे हैं कि आने वाले वर्षों में आर्थिक रिश्तों की दिशा और रफ्तार दोनों बदल सकती हैं.

मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है. उत्तर भारत में तापमान, हवाओं और दृश्यता को लेकर संकेत बदल रहे हैं. कुछ दिन राहत के बाद हालात फिर चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. सुबह की शुरुआत, सफर और रोजमर्रा की योजना पर इसका असर पड़ सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है.

देश की सड़कें बदलीं तो सही, लेकिन अब रफ्तार कुछ धीमी सी लग रही है. पिछले एक दशक में सड़क निर्माण ने कई रिकॉर्ड तोड़े, पर क्या अब वह चमक फीकी पड़ रही है? नया बजट क्या कोई नई जान फूंकेगा इस सेक्टर में? जानिए क्या हैं उम्मीदें.

डिजिटल पहचान ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं इससे जुड़े खतरे भी तेजी से सामने आ रहे हैं. हाल के मामलों ने दिखाया है कि एक छोटी सी लापरवाही कैसे बड़ा नुकसान बना सकती है. तकनीक, भरोसा और सतर्कता के बीच यह कहानी हर आम आदमी के लिए एक जरूरी चेतावनी है.

चांदी की कीमतें एक बार फिर ऐसे मोड़ पर हैं, जहां इतिहास चेतावनी देता नजर आता है. पिछले 50 सालों के चार्ट बताते हैं कि हर बड़ी तेजी के बाद इसमें तेज गिरावट भी आई है. मौजूदा 800 फीसदी उछाल के बीच सवाल यह है कि क्या चांदी फिर उसी खतरनाक पैटर्न में प्रवेश कर चुकी है?

नई दिल्ली में इस हफ्ते कूटनीतिक हलचल तेज है. भारत और एक बड़े वैश्विक साझेदार के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. व्यापार, रणनीति और लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर हुई हालिया गतिविधियां आने वाले दिनों में बड़े ऐलानों की जमीन तैयार कर रही हैं.

देश आज एक ऐसे राष्ट्रीय अवसर का साक्षी बन रहा है, जहां परंपरा और आधुनिकता साथ दिखाई देती हैं. राजधानी से लेकर डिजिटल दुनिया तक उत्सव की झलक साफ महसूस की जा सकती है. सांस्कृतिक विविधता, तकनीकी आत्मविश्वास और वैश्विक संदेश के बीच यह दिन भारत की आगे बढ़ती पहचान को दर्शाता है.

भारत के एविएशन सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आकार लेता दिख रहा है. सिविल विमानन से जुड़ी एक अहम पहल देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में नए संकेत दे रही है. आने वाले दिनों में होने वाला एक ऐलान भारत की एविएशन इंडस्ट्री में हलचल मचा सकता है.

दिल्ली में हाल के दिनों में हुई कुछ अहम मुलाकात भारत और अमेरिका के रिश्तों को पटरी पर लाने का संकेत दे रहे हैं. व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक हालात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत तेज हुई है. नजरें इसी बात पर हैं कि क्या यह कूटनीतिक हलचल रिश्तों में आई तल्खी को कम करने का रास्ता खोलेगी.