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Tejaswita Upadhyay

तेजस्विता उपाध्याय वर्तमान में मनी 9 में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. बिजनेस, जेंडर और ह्यूमन राइट्स सेंगमेंट पर इनकी मजबूत पकड़ है. इसके अलावा हाशिये पर खड़े हर समुदाय पर रिपोर्ट करना इनका जज्बा है. इससे पहले यह क्विंट हिंदी, गांव कनेक्शन और स्पैन कम्यूनिकेशन जैसे संस्थानों में अहम पद पर रह चुकी हैं. इनका लगाव संगीत, साहित्य और नृत्य से है. तेजस्विता की एक स्टोरी, 'We The Change' को जेंडर सेंसिटिविटी के लिए 2024 के लाडली मीडिया अवार्ड्स में ज्यूरी एप्रीशिएशन सिटेशन से सम्मानित किया गया है.

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Tejaswita Upadhyay

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की एक बड़ी कंपनी ने हाल ही में अहम माइलस्टोन हासिल किया है और भविष्य के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है. इसके बाद निवेशकों के बीच इस स्टॉक को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

बैंक के शेयर भले दबाव में हों, लेकिन अंदर की तस्वीर कुछ और ही कहानी बता रही है. ताजा आंकड़ों में लोन और डिपॉजिट दोनों में अच्छी बढ़त दिखी है. गुरुवार को कंपनी के शेयरों में अच्छी बढ़त दिखी थी और अब स्थिर प्रदर्शन के बाद स्टॉक पर फोकस बनाए रखना मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है.

मोबाइल रिचार्ज से जुड़ा एक अहम फैसला सामने आया है, जो करोड़ों यूजर्स को प्रभावित कर सकता है. रेगुलेटर ने कुछ टैरिफ प्लान्स को लेकर सख्त रुख अपनाया है और कंपनियों को नियमों के पालन के लिए निर्देश दिए हैं. इससे यूजर्स के लिए विकल्प बदल सकते हैं.

RBI की MPC बैठक 6 अप्रैल से शुरू हो रही है, जिसमें ब्याज दरों पर बड़ा फैसला लिया जाएगा. क्या इस बार EMI में राहत मिलेगी या फिर दरें स्थिर रहेंगी? जानिए इस अहम बैठक से जुड़ी हर जरूरी बात और आपके पैसों पर इसका क्या असर पड़ सकता है.

वैश्विक हालात का असर अब आम लोगों के खर्च पर दिखने लगा है. कच्चे माल की कीमतों में तेजी के चलते वाहन कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा रही हैं. इससे आने वाले समय में खरीदारी के फैसले भी प्रभावित हो सकते हैं.

जहां दुनिया तेल संकट और बढ़ती कीमतों से जूझ रही है, वहीं एक देश अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहा है. इसकी वजह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि सालों पहले बनाई गई रणनीति है, जो अब संकट के समय काम आ रही है.

बाजार में आई तेज गिरावट का असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर साफ दिखा है. कई इक्विटी स्कीम्स में भारी नुकसान दर्ज किया गया, जिससे निवेशकों के लिए जोखिम और रणनीति पर फिर से सोचने की जरूरत महसूस हो रही है.

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब नए मोड़ लेता दिख रहा है. हालिया घटनाओं ने न सिर्फ सैन्य स्तर पर बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर के संकेत दिए हैं. बढ़ते तनाव के बीच आने वाले दिन हालात को और मुश्किल भरे बना सकते हैं.

वैश्विक तनाव का असर अब घरेलू जरूरतों पर भी दिखने लगा है. कुकिंग गैस को लेकर बढ़ती चिंता के बीच लोग तेजी से विकल्प तलाश रहे हैं. सरकार ने भी हालात को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले समय बाजार बदलता नजर आ सकता है.

एक छोटे से शेयर ने कुछ ही सालों में निवेशकों की किस्मत बदल दी, लेकिन हर कहानी के पीछे जोखिम भी छिपा होता है. हाल के उतार-चढ़ाव के बीच यह समझना जरूरी है कि क्या ऐसी तेजी आगे भी जारी रह सकती है या निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है.