बजट 2026 में सरकार ने शेयर बायबैक से जुड़े टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड की जगह कैपिटल गेन माना जाएगा, जिससे निवेशकों को अपनी लागत घटाने और सिर्फ असली मुनाफे पर टैक्स देने का फायदा मिलेगा.
बजट पेश होते ही शेयर बाजार में मजबूती की उम्मीदें कमजोर पड़ीं और कुछ प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट दर्ज हुई. Hindalco, SBI, कोल इंडिया, बजाज फाइनेंस, ओएनजीसी, अडानी पोर्ट्स, एनटीपीसी, नेस्ले इंडिया और जियो फाइनेंशियल जैसे बड़े नाम बजट के दिन बाजार के सबसे बड़े लूजर रहे.
केंद्रीय बजट की टैक्स से जुड़ी घोषणाओं ने आम करदाताओं और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन करने वालों का ध्यान खींचा है. रिटर्न फाइलिंग, कटौती और टैक्स कलेक्शन से जुड़े नियमों में संकेत मिल रहे हैं कि सिस्टम को ज्यादा सरल और राहतपूर्ण बनाया जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में व्यक्तिगत वित्तीय फैसलों पर दिख सकता है.
केंद्रीय बजट की शुरुआती घोषणाओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा ऐलान कियी है. कनेक्टिविटी, टिकाऊ परिवहन और सार्वजनिक निवेश से जुड़े संकेत यह बता रहे हैं कि सरकार की प्राथमिकता लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर टिकी है. इन फैसलों का असर आने वाले समय में कई सेक्टरों पर देखने को मिल सकता है.
शुरुआती स्पीच में ही तीन स्पष्ट संकल्पों के जरिए यह बताया गया कि सरकार का फोकस आर्थिक मजबूती, लोगों की क्षमता निर्माण और संसाधनों की समान पहुंच पर रहेगा.
बजट सत्र के दौरान शेयर बाजार में अचानक आई तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींच लिया है. कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में दिखी तेज मूवमेंट यह संकेत दे रही है कि बाजार के भीतर पोजिशनिंग बदली है. वॉल्यूम और प्राइस एक्शन पर नजर डालें तो आने वाली चाल के लिए बाजार अहम संकेत दे रहा है.
बजट के दिन शेयर बाजार की चाल निवेशकों के लिए कई अहम संकेत छोड़ जाती है. निफ्टी की शुरुआती चाल भले ही सीमित रही हो, लेकिन कुछ चुनिंदा शेयरों में दिखी हलचल ने बाजार की दिशा पर ध्यान खींचा है. सेक्टर आधारित मूवमेंट और वॉल्यूम ट्रेंड यह इशारा कर रहे हैं कि बजट से पहले स्मार्ट मनी कहां सक्रिय है.
Union Budget 2026 से पहले वैश्विक बाजारों में चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है, जिसका असर भारत के Silver ETF पर भी साफ दिख रहा है. एक ही दिन में भारी टूट के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ी है. सिल्वर ETF में अब सर्किट लिमिट और सपोर्ट लेवल को लेकर भी चिंताएं गहराई हैं.
सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी एक पुरानी कानूनी उलझन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने प्रोविडेंट फंड से जुड़े अधिकारों की नई व्याख्या सामने रखी है. इस फैसले का असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नॉमिनेशन, कानूनी दावों और सरकारी प्रक्रिया को लेकर बड़े स्तर पर स्पष्टता देता है.
बजट के दिन कुछ आंकड़े ऐसे होते हैं, जो सिर्फ सरकारी खर्च नहीं बल्कि बाजार की दिशा और आर्थिक सोच को भी साफ करते हैं. इस बार भी कई बड़े नंबर संकेत देंगे कि आने वाले साल में सरकार किस रास्ते पर चलने वाली है और अर्थव्यवस्था से उसकी क्या उम्मीदें हैं.