बिजली के बिल से जुड़ा सिस्टम अब बदलने की तैयारी में है. केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आने वाले समय में आपके मीटर की रीडिंग का मतलब क्या रहेगा और बिल कैसे तय होगा. क्या राज्यों की भूमिका कम होगी और क्या उपभोक्ताओं पर बोझ अपने-आप बढ़ेगा? पूरी तस्वीर समझने के लिए पढ़ें रिपोर्ट.
तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद एक एफएमसीजी कंपनी के शेयर में जोरदार हलचल देखने को मिली है. मुनाफे और मार्जिन में तेज सुधार के संकेतों ने बाजार का ध्यान खींचा है. खर्च बढ़ने के बावजूद प्रदर्शन मजबूत रहा, जिससे निवेशकों के बीच कंपनी को लेकर नई उम्मीदें बनी हैं.
बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन के बाद एक बड़ी हिंदी फिल्म 'धुरंधर' अब डिजिटल दर्शकों तक पहुंचने की तैयारी में है. थिएटर में रिकॉर्ड बनाने के बाद ओटीटी को लेकर चर्चाएं तेज हैं. रिलीज टाइमिंग, प्लेटफॉर्म और रणनीति पर इंडस्ट्री की नजर टिकी है, जिससे आने वाले दिनों में दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ने वाली है.
अमेरिका की नई व्यापार नीति को लेकर यूरोप में बेचैनी बढ़ती दिख रही है. कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता अब जोखिम बनती जा रही है, जबकि कुछ देशों ने समय रहते अपने निर्यात को विविध बनाया है. आने वाले फैसले यह तय कर सकते हैं कि किसे झटका लगेगा और कौन बचा रहेगा.
एक भू-राजनीतिक मुद्दा इन दिनों वैश्विक चर्चा में है, जिसने देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया है. सवाल यह है कि किसी जगह की कीमत कैसे तय होती है. सिर्फ आर्थिक आंकड़ों से या उसकी रणनीतिक और संसाधन क्षमता से. इसी बहस ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बेचैनी पैदा की है.
दक्षिण भारत का एक औद्योगिक शहर, जिसने दशकों से भारत के निर्यात को वैश्विक पहचान दिलाई, आज बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा एक फैसला यहां लाखों परिवारों की रोजी-रोटी को प्रभावित कर सकता है. अब सबकी नजर आने वाले बजट पर है, जहां से राहत की उम्मीद बंधी है.
सोना और चांदी एक बार फिर निवेशकों के रडार पर हैं. ग्लोबल संकेत, सेंट्रल बैंक मूवमेंट और बाजार के कुछ ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जो स्टॉक मार्केट से जुड़े निवेशकों को नई रणनीति पर सोचने को मजबूर कर सकते हैं. क्या कीमती धातुएं शेयर बाजार के लिए बड़ा संकेत दे रही हैं, जवाब छिपा है इन ट्रेंड्स में.
कमजोर बाजार के बीच एक मेटल स्टॉक ने अचानक तेज रफ्तार पकड़ ली है. एक दिन में दो अंकों की बढ़त ने निवेशकों को चौंका दिया, जबकि कंपनी के हालिया नतीजे दबाव की ओर इशारा करते हैं. क्या यह सिर्फ तकनीकी उछाल है या बाजार किसी आने वाले संकेत को पहले ही पढ़ रहा है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में हालिया गिरावट ने बाजार में नई बहस छेड़ दी है. एक महीने में तेज करेक्शन और मल्टी-मंथ लो के बीच निवेशक असमंजस में हैं. क्या यह कमजोरी खतरे का संकेत है या लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रणनीतिक मौका? बाजार और ब्रोकरेज संकेत कुछ और ही कहानी कहते हैं.
बाजार की चाल के बीच कुछ बड़े बैंकिंग शेयर एक बार फिर चर्चा में हैं. हालिया तिमाही संकेत, मैनेजमेंट का आउटलुक और ब्रोकरेज की नई रिपोर्ट निवेशकों का ध्यान खींच रही है. सवाल यही है कि क्या मौजूदा स्तरों पर यह शेयर आगे बेहतर रिटर्न की संभावना दिखा रहा है?