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Tejaswita Upadhyay

तेजस्विता उपाध्याय वर्तमान में मनी 9 में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. बिजनेस, जेंडर और ह्यूमन राइट्स सेंगमेंट पर इनकी मजबूत पकड़ है. इसके अलावा हाशिये पर खड़े हर समुदाय पर रिपोर्ट करना इनका जज्बा है. इससे पहले यह क्विंट हिंदी, गांव कनेक्शन और स्पैन कम्यूनिकेशन जैसे संस्थानों में अहम पद पर रह चुकी हैं. इनका लगाव संगीत, साहित्य और नृत्य से है. तेजस्विता की एक स्टोरी, 'We The Change' को जेंडर सेंसिटिविटी के लिए 2024 के लाडली मीडिया अवार्ड्स में ज्यूरी एप्रीशिएशन सिटेशन से सम्मानित किया गया है.

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Tejaswita Upadhyay

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की है. यह मामला 1,085 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज से जुड़ा बताया जा रहा है. शिकायत पंजाब नेशनल बैंक की ओर से की गई है, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है.

कभी बाजार में चर्चा में रहने वाले दो दिग्गज शेयर अब दबाव में नजर आ रहे हैं. रेखा झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो में शामिल ये दोनों स्टॉक पिछले पांच वर्षों में भारी गिरावट झेल चुके हैं. एक समय ऊंचे स्तर छूने वाले इन शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहने से निवेशकों के बीच फिर से इनकी चर्चा तेज हो गई है.

हाल के महीनों में कई SME कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली है. कुछ कंपनियों के शेयर अपने लिस्टिंग प्राइस से 70 से 78 प्रतिशत तक टूट चुके हैं. बाजार में बढ़ती अस्थिरता और निवेशकों की सतर्कता के बीच इन छोटी कंपनियों के मार्केट वैल्यू में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

शेयर बाजार में पिछले सप्ताह आई तेज गिरावट का असर देश की सबसे बड़ी कंपनियों पर भी पड़ा. टॉप-10 में से आठ कंपनियों की कुल बाजार पूंजीकरण में करीब ₹2.81 लाख करोड़ की कमी आ गई. इस गिरावट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को सबसे बड़ा नुकसान हुआ.

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. पिछले चार कारोबारी दिनों में FPI ने करीब 21,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा है, हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी से कुछ संतुलन बना हुआ है.

वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने कच्चे तेल के बाजार को हिला दिया है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई बाधित हुई तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. इसका असर सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि कई सेक्टरों और निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ सकता है.

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार की हलचल के बीच इस हफ्ते सोने के दामों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कभी तेजी तो कभी गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया. आखिर पूरे सप्ताह में सोना कितना महंगा हुआ, कब गिरा और बाजार में ये हलचल क्यों रही, इस रिपोर्ट में जानिए पूरा हिसाब.

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है. सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग, ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद और अमेरिका की ऊर्जा ताकत डॉलर को वैश्विक मुद्रा बाजार में और मजबूत बना रही है.

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित होने लगा है. कई शिपिंग कंपनियों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जाने वाली सेवाएं रोक दी हैं. इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने बंदरगाहों को मिडिल ईस्ट जाने वाले कार्गो को ट्रांसशिपमेंट कार्गो के रूप में अस्थायी रूप से स्टोर करने की अनुमति देने का निर्देश दिया है.

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक स्रोत तैयार कर लिए हैं. सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब देश किसी एक समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं है. ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने अतिरिक्त गैस सप्लाई की पेशकश भी की है.