ईरान-अमेरिका तनाव में नरमी की खबर से ग्लोबल बाजारों में जबरदस्त उछाल आया है. GIFT Nifty 665 अंक चढ़ा, Dow Jones 1,046 अंक उछला और एशियाई बाजारों में भी 5% तक तेजी देखी गई. अब 10 अप्रैल की बातचीत पर निवेशकों की नजर टिकी है.
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर ने बाजार को राहत दी है. इसी के चलते सोने की कीमतों में तेज उछाल आया है. निवेशक फिर से सुरक्षित विकल्प की ओर लौट रहे हैं. ईरान की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में शुरू हो सकती है.
39 दिनों से जारी ईरान-अमेरिका टकराव में अब कुछ दिनों के लिए राहत मिल गई है. पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद 14 दिनों के लिए युद्ध पर ब्रेक लगा है. होर्मुज स्ट्रेट खोलने से लेकर शांति समझौते तक, कई शर्तों पर सहमति बनी है. अब दुनिया की नजर अगले 2 हफ्तों पर टिक गई है.
कार्बन कैप्चर और इंडस्ट्रियल गैस सेक्टर की कंपनी पंजाब कार्बोनिक लिमिटेड ने IPO के लिए DRHP दाखिल कर दिया है. कंपनी जुटाई गई रकम का इस्तेमाल CO2 प्रोजेक्ट्स, लॉजिस्टिक्स और एथेनॉल बिजनेस विस्तार में करेगी, जिससे यह इश्यू निवेशकों के लिए खास बन सकता है.
NMDC ने आयरन ओर की कीमतों में 11 फीसदी तक बढ़ोतरी की है, जिससे कंपनी के रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है. मजबूत उत्पादन और बिक्री आंकड़ों के बीच शेयर 52 हफ्ते के हाई के करीब पहुंच गया है, ऐसे में निवेशकों की नजर इस स्टॉक पर टिक गई है.
विप्रो ने सिंगापुर की ओलम ग्रुप के साथ 1 अरब डॉलर से ज्यादा की बड़ी डील हासिल की है. इसके साथ ही Mindsprint के अधिग्रहण की भी घोषणा हुई है. हालिया गिरावट के बाद अब यह स्टॉक निवेशकों के रडार पर आ गया है.
ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लेकर नई कूटनीतिक पहल सामने आई है, जिसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका बताई जा रही है. प्रस्ताव में होर्मूज स्ट्रेट खोलने और संघर्ष खत्म करने की बात शामिल है, लेकिन अब तक किसी अंतिम सहमति की पुष्टि नहीं हुई है.
भारत के सर्विस सेक्टर की रफ्तार मार्च में 14 महीने के निचले स्तर पर आ गई है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग में और तेज गिरावट दिखी है. दोनों सेक्टर में ग्रोथ जारी है, लेकिन रफ्तार धीमी पड़ी है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग में आई तेज गिरावट ने आर्थिक गतिविधियों की दिशा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
अमेरिका और ईरान के बीच 45 दिन के सीजफायर को लेकर बातचीत की खबर सामने आई है, लेकिन हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण हैं. क्या यह कूटनीतिक कोशिश टकराव को रोक पाएगी या पश्चिम एशिया एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा है?
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत के आयात बिल और ईंधन लागत पर दबाव बढ़ा दिया है. ऐसे में एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों की मांग बढ़ रही है, जिससे इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं.