बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन मिलने के बावजूद डिफेंस शेयरों में गिरावट देखी गई. बड़े नीतिगत ऐलान और स्पष्ट ऑर्डर रोडमैप की कमी से निवेशक निराश नजर आए, जिसके चलते HAL, Bharat Dynamics और शिपबिल्डिंग कंपनियों के शेयर दबाव में रहे.
नई एक्साइज ड्यूटी लागू होते ही सिगरेट कंपनियों के शेयरों पर दबाव साफ दिखा. ITC, Godfrey Phillips और VST Industries में 2 से 5.5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि कीमतें बढ़ने से मांग और मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.
जनवरी में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हल्की लेकिन अहम मजबूती देखने को मिली है. HSBC मैन्युफैक्चरिंग PMI दिसंबर के दो साल के निचले स्तर से उबरते हुए 55.4 पर पहुंच गया, जो उत्पादन, नए ऑर्डर और रोजगार में सुधार का संकेत देता है.
बजट 2026-27 में सरकार ने खेती से आगे बढ़कर ग्रामीण आय बढ़ाने पर फोकस किया है. पशुपालन, मत्स्य पालन और उच्च मूल्य वाली फसलों के जरिए किसानों के लिए नए रोजगार और आय के अवसर बनाने की बात कही गई है. इसके साथ ही कृषि और सहायक क्षेत्रों के लिए आवंटन बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए हैं.
बजट 2026 में सरकार ने शेयर बायबैक से जुड़े टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड की जगह कैपिटल गेन माना जाएगा, जिससे निवेशकों को अपनी लागत घटाने और सिर्फ असली मुनाफे पर टैक्स देने का फायदा मिलेगा.
बजट पेश होते ही शेयर बाजार में मजबूती की उम्मीदें कमजोर पड़ीं और कुछ प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट दर्ज हुई. Hindalco, SBI, कोल इंडिया, बजाज फाइनेंस, ओएनजीसी, अडानी पोर्ट्स, एनटीपीसी, नेस्ले इंडिया और जियो फाइनेंशियल जैसे बड़े नाम बजट के दिन बाजार के सबसे बड़े लूजर रहे.
केंद्रीय बजट की टैक्स से जुड़ी घोषणाओं ने आम करदाताओं और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन करने वालों का ध्यान खींचा है. रिटर्न फाइलिंग, कटौती और टैक्स कलेक्शन से जुड़े नियमों में संकेत मिल रहे हैं कि सिस्टम को ज्यादा सरल और राहतपूर्ण बनाया जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में व्यक्तिगत वित्तीय फैसलों पर दिख सकता है.
केंद्रीय बजट की शुरुआती घोषणाओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा ऐलान कियी है. कनेक्टिविटी, टिकाऊ परिवहन और सार्वजनिक निवेश से जुड़े संकेत यह बता रहे हैं कि सरकार की प्राथमिकता लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर टिकी है. इन फैसलों का असर आने वाले समय में कई सेक्टरों पर देखने को मिल सकता है.
शुरुआती स्पीच में ही तीन स्पष्ट संकल्पों के जरिए यह बताया गया कि सरकार का फोकस आर्थिक मजबूती, लोगों की क्षमता निर्माण और संसाधनों की समान पहुंच पर रहेगा.
बजट सत्र के दौरान शेयर बाजार में अचानक आई तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींच लिया है. कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में दिखी तेज मूवमेंट यह संकेत दे रही है कि बाजार के भीतर पोजिशनिंग बदली है. वॉल्यूम और प्राइस एक्शन पर नजर डालें तो आने वाली चाल के लिए बाजार अहम संकेत दे रहा है.