अमेरिका की करेंसी में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब नए डॉलर नोटों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सिग्नेचर दिखेगा, जिससे 165 साल पुरानी परंपरा टूट जाएगी. साथ ही अमेरिका अपनी आजादी के 250 साल पूरे होने के जश्न में सोने के नए सिक्के निकालेगा जिस पर तस्वीर ट्रंप की होगी.
रिकॉर्ड IPO बूम के बावजूद निवेशकों को बड़ा झटका लगा है. ज्यादातर कंपनियों के शेयर इश्यू प्राइस से नीचे फिसल गए हैं. GMP के भरोसे किए गए निवेश अब नुकसान में बदलते दिख रहे हैं. क्या IPO मार्केट में रिटेल निवेशकों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है?
आज के शेयर बाजार में कई बड़े ट्रिगर सामने आए हैं, जिनसे चुनिंदा स्टॉक्स में तेज हलचल देखने को मिल सकती है. इंफोसिस की बड़ी डील, LIC पर टैक्स झटका, IREDA का डिविडेंड और Ola Electric के ऑफर्स जैसे अपडेट निवेशकों की नजर खींच रहे हैं. क्या ये स्टॉक्स देंगे कमाई का मौका?
Infosys ने हेल्थकेयर और इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा कदम उठाते हुए दो कंपनियों के अधिग्रहण का ऐलान किया है. इस डील से कंपनी की ग्रोथ को नई दिशा मिल सकती है. ऐसे में शुक्रवार को Infosys के शेयर में हलचल देखने को मिल सकती है.
Cochin Shipyard और HBL Engineering की नई JV डील से ग्रीन मरीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिलेगा. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बैटरी सिस्टम पर फोकस के बीच यह स्टॉक निवेशकों के रडार पर आ गया है. शुक्रवार को इसके शेयर में हलचल देखने को मिल सकती है.
RCB की रिकॉर्ड डील के बाद IPL टीमों की वैल्यूएशन पर निवेशकों का नजरिया बदल गया है. इसका असर अब CSK के अनलिस्टेड शेयरों में दिख रहा है, जहां तेजी से खरीदारी बढ़ी है. क्या यह नई निवेश कहानी की शुरुआत है, जहां क्रिकेट बन रहा है बड़ा एसेट?
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब भारत में दिखने लगा है. निजी कंपनी Nayara Energy ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं. इससे बाजार में नई हलचल शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में कीमतों को लेकर और बड़े फैसले हो सकते हैं.
ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब भारत की रसोई तक पहुंच गया है. LPG सप्लाई अचानक घट गई है, जबकि मांग को जबरन कम करना पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना हजारों टन गैस की कमी बनी हुई है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका है.
बाजार की गिरावट में कई मजबूत कंपनियों के शेयर अपने निचले स्तर के करीब पहुंच गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन कंपनियों की कमाई और बिजनेस अब भी मजबूत हैं. ऐसे में सवाल उठता है, क्या यह गिरावट निवेशकों के लिए बड़ा मौका बन सकती है?
अमेरिका-ईरान युद्ध पर जर्मनी ने साफ रुख अपनाया है. रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए “तबाही” बताया और कहा कि यह उनकी लड़ाई नहीं है. जर्मनी ने युद्ध से दूरी बनाते हुए सीजफायर और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है.