Tejaswita Upadhyay

तेजस्विता उपाध्याय वर्तमान में मनी 9 में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. बिजनेस, जेंडर और ह्यूमन राइट्स सेंगमेंट पर इनकी मजबूत पकड़ है. इसके अलावा हाशिये पर खड़े हर समुदाय पर रिपोर्ट करना इनका जज्बा है. इससे पहले यह क्विंट हिंदी, गांव कनेक्शन और स्पैन कम्यूनिकेशन जैसे संस्थानों में अहम पद पर रह चुकी हैं. इनका लगाव संगीत, साहित्य और नृत्य से है. तेजस्विता की एक स्टोरी, 'We The Change' को जेंडर सेंसिटिविटी के लिए 2024 के लाडली मीडिया अवार्ड्स में ज्यूरी एप्रीशिएशन सिटेशन से सम्मानित किया गया है.

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Tejaswita Upadhyay

शुरुआती स्पीच में ही तीन स्पष्ट संकल्पों के जरिए यह बताया गया कि सरकार का फोकस आर्थिक मजबूती, लोगों की क्षमता निर्माण और संसाधनों की समान पहुंच पर रहेगा.

बजट सत्र के दौरान शेयर बाजार में अचानक आई तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींच लिया है. कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में दिखी तेज मूवमेंट यह संकेत दे रही है कि बाजार के भीतर पोजिशनिंग बदली है. वॉल्यूम और प्राइस एक्शन पर नजर डालें तो आने वाली चाल के लिए बाजार अहम संकेत दे रहा है.

बजट के दिन शेयर बाजार की चाल निवेशकों के लिए कई अहम संकेत छोड़ जाती है. निफ्टी की शुरुआती चाल भले ही सीमित रही हो, लेकिन कुछ चुनिंदा शेयरों में दिखी हलचल ने बाजार की दिशा पर ध्यान खींचा है. सेक्टर आधारित मूवमेंट और वॉल्यूम ट्रेंड यह इशारा कर रहे हैं कि बजट से पहले स्मार्ट मनी कहां सक्रिय है.

Union Budget 2026 से पहले वैश्विक बाजारों में चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है, जिसका असर भारत के Silver ETF पर भी साफ दिख रहा है. एक ही दिन में भारी टूट के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ी है. सिल्वर ETF में अब सर्किट लिमिट और सपोर्ट लेवल को लेकर भी चिंताएं गहराई हैं.

सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी एक पुरानी कानूनी उलझन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने प्रोविडेंट फंड से जुड़े अधिकारों की नई व्याख्या सामने रखी है. इस फैसले का असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नॉमिनेशन, कानूनी दावों और सरकारी प्रक्रिया को लेकर बड़े स्तर पर स्पष्टता देता है.

बजट के दिन कुछ आंकड़े ऐसे होते हैं, जो सिर्फ सरकारी खर्च नहीं बल्कि बाजार की दिशा और आर्थिक सोच को भी साफ करते हैं. इस बार भी कई बड़े नंबर संकेत देंगे कि आने वाले साल में सरकार किस रास्ते पर चलने वाली है और अर्थव्यवस्था से उसकी क्या उम्मीदें हैं.

महंगाई से जुड़े आंकड़ों को समझने का तरीका जल्द बदलने वाला है. इससे रोजमर्रा की कीमतों, नीतिगत फैसलों और बाजार की धारणाओं पर असर पड़ सकता है. कुछ क्षेत्रों का महत्व बढ़ेगा तो कुछ का घटेगा, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े पहले से अलग तस्वीर पेश कर सकते हैं.

1 फरवरी को पेश होने वाले बजट की ओर महिलाओं की निगाहें हैं. उम्मीद है कि बजट में नीतियों का फोकस अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं की रोजमर्रा की चुनौतियों और उनकी भूमिका को बदलने की दिशा में होगा. बजट के जरिए कुछ ऐसे संकेत मिल सकते हैं, जो महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को नई दिशा दे दें.

फरवरी की शुरुआत से सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट से जुड़ा नियम बदलने वाला है, इन पर सरकार लंबे समय से नजर रखे हुए थी. टैक्स व्यवस्था, कीमत तय करने का तरीका और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नियमों में बदलाव का असर सीधे बाजार, उद्योग और उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है.

पिछले कुछ दिनों में चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. इतिहास गवाह है कि जब चांदी असामान्य रफ्तार पकड़ती है, तो उसके बाद बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. 50 साल के ट्रेंड में ऐसे दौर पहले भी आए हैं. सवाल यही है कि यह गिरावट कहां तक जा सकती है और आगे क्या संकेत छुपे हैं.