चांदी की कीमतों में हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने सिल्वर ETF में मुनाफावसूली शुरू कर दी है. AMFI के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में इन फंड्स से करीब 826 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई, जो दो साल से ज्यादा समय बाद पहला आउटफ्लो है. इससे पहले जनवरी में सिल्वर ETF में रिकॉर्ड निवेश देखने को मिला था.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर इस साल दबाव में नजर आ रहे हैं और 2026 में अब तक निवेशकों की करीब 3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट चुकी है. हालांकि कुछ ब्रोकरेज हाउस अब भी इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक हैं. उनका मानना है कि कंपनी के कई कारोबार और संभावित जियो आईपीओ भविष्य में ग्रोथ के नए मौके पैदा कर सकते हैं.
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की है. यह मामला 1,085 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज से जुड़ा बताया जा रहा है. शिकायत पंजाब नेशनल बैंक की ओर से की गई है, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है.
कभी बाजार में चर्चा में रहने वाले दो दिग्गज शेयर अब दबाव में नजर आ रहे हैं. रेखा झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो में शामिल ये दोनों स्टॉक पिछले पांच वर्षों में भारी गिरावट झेल चुके हैं. एक समय ऊंचे स्तर छूने वाले इन शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहने से निवेशकों के बीच फिर से इनकी चर्चा तेज हो गई है.
हाल के महीनों में कई SME कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली है. कुछ कंपनियों के शेयर अपने लिस्टिंग प्राइस से 70 से 78 प्रतिशत तक टूट चुके हैं. बाजार में बढ़ती अस्थिरता और निवेशकों की सतर्कता के बीच इन छोटी कंपनियों के मार्केट वैल्यू में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
शेयर बाजार में पिछले सप्ताह आई तेज गिरावट का असर देश की सबसे बड़ी कंपनियों पर भी पड़ा. टॉप-10 में से आठ कंपनियों की कुल बाजार पूंजीकरण में करीब ₹2.81 लाख करोड़ की कमी आ गई. इस गिरावट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को सबसे बड़ा नुकसान हुआ.
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. पिछले चार कारोबारी दिनों में FPI ने करीब 21,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा है, हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी से कुछ संतुलन बना हुआ है.
वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने कच्चे तेल के बाजार को हिला दिया है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई बाधित हुई तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. इसका असर सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि कई सेक्टरों और निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ सकता है.
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार की हलचल के बीच इस हफ्ते सोने के दामों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कभी तेजी तो कभी गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया. आखिर पूरे सप्ताह में सोना कितना महंगा हुआ, कब गिरा और बाजार में ये हलचल क्यों रही, इस रिपोर्ट में जानिए पूरा हिसाब.
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है. सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग, ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद और अमेरिका की ऊर्जा ताकत डॉलर को वैश्विक मुद्रा बाजार में और मजबूत बना रही है.