टैक्स नोटिस से परेशान लोगों के लिए बड़ी राहत, बजट 2026 में क्या बदला और कैसे मिलेगा फायदा

डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल से अब छोटी से छोटी गलती भी पकड़ में आ रही है. गलत कटौती का दावा, ब्याज आय न बताना या देर से जवाब देना लोगों के लिए तनाव का कारण बन गया है. इसी बीच बजट 2026 से जुड़े फाइनेंस बिल में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जो टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दे सकते हैं.

नए नियम सरल और आसान है.

Revised updated ITR: पिछले एक साल में हजारों नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों को ईमेल और मैसेज के जरिए टैक्स नोटिस मिले हैं. डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल से अब छोटी से छोटी गलती भी पकड़ में आ रही है. गलत कटौती का दावा, ब्याज आय न बताना या देर से जवाब देना लोगों के लिए तनाव का कारण बन गया है.

इसी बीच बजट 2026 से जुड़े फाइनेंस बिल में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जो टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दे सकते हैं. संशोधित रिटर्न भरने की समय सीमा बढ़ाई गई है, रीअसेसमेंट के दौरान भी अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने का रास्ता खोला गया है और जुर्माने से राहत देने का नया ढांचा तैयार किया गया है.

नोटिस क्यों बढ़े

आज Income-tax Department के पास सैलरी, बैंक ब्याज, म्यूचुअल फंड और विदेश से आई जानकारी तक का पूरा रिकॉर्ड होता है. AIS और TIS जैसे सिस्टम से छोटी गड़बड़ी भी तुरंत सामने आ जाती है. कई लोगों ने दिसंबर 2025 में आए अलर्ट नजरअंदाज कर दिए, कुछ को रिटर्न सुधारने का मौका निकल गया और कुछ पुराने सालों के लिए जांच नोटिस में फंस गए. मौजूदा कानून में ऐसी गलतियों पर टैक्स और ब्याज के साथ 200 प्रतिशत तक जुर्माना लग सकता है.

संशोधित रिटर्न के लिए बड़ा समय

1 मार्च 2026 से नियम बदले जाएंगे. अब संशोधित रिटर्न असेसमेंट ईयर खत्म होने तक भरी जा सकेगी. यानी 2025-26 के लिए 31 मार्च 2026 तक मौका मिलेगा. इसके लिए छोटी सी फीस रखी गई है. 5 लाख रुपये तक की इनकम वालों के लिए एक हजार रुपये और बाकी के लिए पांच हजार रुपये. इससे लोगों को नोटिस से पहले गलती सुधारने का मौका मिलेगा और भारी जुर्माने से बचाव हो सकेगा.

रीअसेसमेंट में भी अपडेटेड रिटर्न

पहले अगर रीअसेसमेंट नोटिस आ जाता था तो अपडेटेड रिटर्न का रास्ता बंद हो जाता था. नए नियमों में इसे खोल दिया गया है. अब नोटिस मिलने के बाद भी टैक्सपेयर्स अपडेटेड रिटर्न भर सकेंगे और खुद से गलती सुधार पाएंगे. इससे जांच की प्रक्रिया टकराव वाली न होकर समाधान वाली बन सकती है.

कितना देना होगा अतिरिक्त

अपडेटेड रिटर्न भरने पर टैक्स और ब्याज के साथ अतिरिक्त रकम देनी होगी. यह 12 महीने में 25 प्रतिशत से लेकर चार साल में 70 प्रतिशत तक हो सकती है. रीअसेसमेंट नोटिस के बाद भरने पर 10 प्रतिशत और जुड़ सकता है. फिर भी यह 200 प्रतिशत जुर्माने से काफी कम है. राहत की बात यह है कि अपडेटेड रिटर्न में बताई गई इनकम पर दोबारा मिसरिपोर्टिंग का जुर्माना नहीं लगेगा.

जुर्माने और केस से छूट

सबसे बड़ी राहत सेक्शन 270AA में बदलाव से मिलेगी. अब टैक्सपेयर्स असेसमेंट ऑर्डर मिलने के एक महीने के अंदर टैक्स, ब्याज और मिसरिपोर्ट की गई इनकम पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स देकर जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं. पहले यह सुविधा सीमित थी, अब ज्यादा मामलों में मिलेगी. इससे लंबी अपील और कोर्ट केस से छुटकारा मिलेगा.

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