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Pradyumn Thakur

प्रद्युमन ठाकुर 'मनी 9 हिंदी' में बतौर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और साल 2024 से इस मंच के साथ जुड़े हुए हैं. स्टॉक मार्केट एनालिसिस और विशेषज्ञों की राय को सरल व सहज भाषा में प्रस्तुत करने में उनकी विशेषज्ञता है. इसके साथ ही पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, ऑटो और टेक जैसे विषयों पर भी उनकी समझ है. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में प्रशिक्षण प्राप्त किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की है.

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Pradyumn Thakur

पिछले हफ्ते बाजार में लगातार बिकवाली देखने को मिली, जिससे निफ्टी अपने अहम स्तरों से नीचे फिसल गया. ऐसे माहौल में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बाजार और गिरेगा या यहां से संभलेगा. फिलहाल बाजार का मूड कमजोर बना हुआ है और आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.

सरकार ISM 2.0 के तहत पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहती है. इसमें चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसे सभी हिस्सों पर काम होगा. इसका मकसद भारत को चिप निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाना है. सेमीकंडक्टर आज हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का अहम हिस्सा है, इसलिए इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

स्पेशियलिटी केमिकल सेक्टर में गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल मांग में कमी और कीमतों पर दबाव रहा है. इसके अलावा कच्चे माल की लागत बढ़ने और ऑर्डर कम मिलने से कंपनियों की कमाई पर असर पड़ा है. कई मजबूत कंपनियां अब अपने ऊपरी स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं. ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन से शेयर आगे मौका दे सकते हैं और किन पर नजर रखनी चाहिए.

अक्सर बड़ी कमाई के मौके तब ही मिलते हैं जब बाजार में डर सबसे ज्यादा होता है. इसी बीच कुछ मिडकैप शेयर ऐसे सामने आए हैं, जो इस गिरावट में काफी टूट चुके हैं और अब ओवरसोल्ड जोन में पहुंच गए हैं. ऐसे में इन शेयरों में आगे रिकवरी की संभावना बन सकती है, लेकिन निवेश से पहले समझदारी जरूरी है.

TCS, LIC, Infosys और ITC जैसी कंपनियों के पास हजारों करोड़ रुपये का रिजर्व है, जो उन्हें मुश्किल समय में भी मजबूत बनाए रखता है. इन कंपनियों का मुनाफा और बिक्री भी स्थिर बनी हुई है, जिससे पता चलता है कि इनका बिजनेस मजबूत है.

महाराष्ट्र के ठाणे जिले से एक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को CBI अधिकारी बनकर ठगों ने लाखों रुपये का चूना लगा दिया. इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी आर्थिक नुकसान में बदल सकती है.

साल 2026 की शुरुआत से अब तक यह शेयर करीब 25 प्रतिशत तक टूट चुका है. इस गिरावट की वजह बैंक से जुड़ी कुछ खबरें और बाजार का कमजोर माहौल बताया जा रहा है. खासकर चेयरमैन के अचानक इस्तीफे और AT-1 बॉन्ड विवाद ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी.

इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर में एल्युमिनियम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट में हमले और चीन में प्रोडक्शन पर लगी पाबंदियों के कारण सप्लाई पर असर पड़ा है. ऐसे में एल्युमिनियम कंपनियों को बेहतर कीमत और मुनाफे का फायदा मिल रहा है.

कई अच्छे मिडकैप आईटी शेयर अपने ऊपरी स्तर से काफी नीचे आ गए हैं. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि गिरावट के बाद इन शेयरों में आगे मौके बन सकते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किन शेयरों पर नजर रखनी चाहिए. IT कंपनियों के शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक मांग में कमी है. अमेरिका और यूरोप के क्लाइंट्स आईटी खर्च कम कर रहे हैं.

MPS लिमिटेड न सिर्फ मजबूत फंडामेंटल के लिए जानी जाती है, बल्कि पिछले कुछ सालों में इसने अपने निवेशकों को अच्छा खासा पैसा भी लौटाया है. सवाल यह है कि क्या यह स्टॉक आगे भी निवेशकों को इसी तरह फायदा देता रहेगा या नहीं. MPS एक ऐसी कंपनी है जो रिसर्च, एजुकेशन और कॉर्पोरेट लर्निंग से जुड़ी सेवाएं देती है.