Budget 2026 कल, आज और कल: वर्तमान से लेकर भविष्य तक के भारत की तस्वीर; जानें बजट में क्या रहा?
केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने बीते सुधारों को आगे बढ़ाते हुए आम लोगों को तात्कालिक राहत दी है और आने वाले दशक के लिए भारत की अर्थव्यवस्था को तैयार करने की रणनीति पेश की है. इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, AI और टैक्स सुधारों पर फोकस के साथ यह बजट निरंतरता और भविष्य की तैयारी का संतुलित रोडमैप दिखाता है.
Budget 2026 and Nirmala Sitharaman: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026 सिर्फ एक साल का हिसाब-किताब नहीं है, बल्कि यह भारत के बीते सुधारों और आने वाले सपनों के बीच एक पॉलिसी ब्रिज की तरह सामने आया है. इस बजट में जहां एक ओर बीते वर्षों की सफल नीतियों को आगे बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की जरूरतों- जैसे मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल सप्लाई चेन को ध्यान में रखकर नए कदम भी उठाए गए हैं. बजट का लगभग 60 से 70 फीसदी हिस्सा निरंतरता पर आधारित है, ताकि पोस्ट-कोविड ग्रोथ की रफ्तार बनी रहे, जबकि बाकी हिस्सा नए अवसरों को भुनाने के लिए तैयार किया गया है.
कल यानी बीते सुधारों की मजबूत नींव
बजट 2026 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पहले से लागू नीतियों को अचानक बदलने के बजाय उन्हें और मजबूत करता है. सरकार ने वित्तीय अनुशासन को बनाए रखते हुए घाटा नियंत्रण की उसी राह पर चलने का फैसला किया है, जिसकी शुरुआत 2021 में हुई थी. वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP का 4.3 फीसदी रखा गया है, जबकि 2031 तक कर्ज-से-GDP रेशियो को 50 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है.
टैक्स सिस्टम में स्थिरता बनाए रखने के लिए इनकम टैक्स एक्ट 2025 लाने की घोषणा की गई है, जिसका मकसद कानून को आसान बनाना है, न कि टैक्स दरें बढ़ाना. इससे निवेशकों और आम करदाताओं को भरोसा मिलता है कि नीतिगत ढांचे में अचानक बदलाव नहीं होंगे.
इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर सरकार ने पिछले वर्षों की गति को और तेज किया है. कैपिटल एक्सपेंडिचर को रिकॉर्ड 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो GDP का करीब 3.1 फीसदी है. इसमें रेलवे, लॉजिस्टिक्स, 20 नए जलमार्ग और 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं.
मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाते हुए सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गई है. साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया गया है. MSME सेक्टर को मजबूती देने के लिए 200 पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर को दोबारा जीवित किया जाएगा और टियर-2 व टियर-3 शहरों में “कॉरपोरेट मित्र” की व्यवस्था की जाएगी.
आज: आम लोगों और कारोबार को तात्कालिक राहत
भविष्य की योजनाओं के साथ-साथ बजट 2026 में आज की परेशानियों को कम करने पर भी खास ध्यान दिया गया है. सरकार ने “टैक्स-पुलिस राज” की भावना को कम करने के लिए कई अहम फैसले किए हैं. सबसे बड़ा तात्कालिक फायदा TCS में कटौती के रूप में देखने को मिला है. विदेश में पढ़ाई, मेडिकल ट्रीटमेंट और टूर पैकेज पर लगने वाला TCS अब 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है. इससे मध्यम वर्गीय परिवारों की कैश फ्लो पर तुरंत असर पड़ेगा.
स्वास्थ्य और उपभोग से जुड़ी राहत के तहत 17 जरूरी दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है. वहीं, पर्सनल इंपोर्ट पर लगने वाली टैरिफ को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है. करदाताओं के लिए भरोसे पर आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देते हुए छोटी-मोटी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और पेनल्टी प्रोसेस को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं. ITR संशोधन और नॉन-ऑडिट कारोबारों की फाइलिंग की समय-सीमा बढ़ाकर ज्यादा लचीलापन दिया गया है.
महिला सशक्तिकरण पर भी बजट का खास फोकस रहा है. जेंडर बजट को 11 फीसदी बढ़ाकर ₹5 लाख करोड़ से ज्यादा कर दिया गया है, ताकि महिला-नेतृत्व वाले उद्यम सिर्फ आजीविका तक सीमित न रहें, बल्कि पूर्ण स्वामित्व वाले बिजनेस बन सकें.
कल: आने वाले दशक के लिए तैयार भारत
बजट 2026 का तीसरा और सबसे अहम पहलू है भविष्य की तैयारी. सरकार ने ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत करने के लिए रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है, जो ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विकसित किए जाएंगे. इससे क्रिटिकल मिनरल्स में भारत की निर्भरता कम होगी.
हाई-टेक और हेल्थ सेक्टर में भारत को ग्लोबल हब बनाने के लिए Biopharma SHAKTI योजना लाई गई है, जिसके तहत अगले 5 साल में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और 1,000 क्लिनिकल ट्रायल साइट्स विकसित होंगी.
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को सुरक्षित बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड बनाया गया है. MSME सेक्टर के लिए SME ग्रोथ फंड और TReDS के जरिए इनवॉइस की सेकेंडरी मार्केट व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है. डिजिटल ट्रेड को आसान बनाने के लिए दो साल में इंटीग्रेटेड कस्टम्स सिस्टम लाने की योजना है, जबकि कूरियर एक्सपोर्ट की वैल्यू लिमिट हटाकर छोटे निर्यातकों को बड़ा मौका दिया गया है.
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