इनकम टैक्स में छोटी गलती पड़ेगी भारी, ऑडिट न कराने पर 1.5 लाख तक जुर्माना, इन मामलों में पेनाल्टी के लिए रहें तैयार

बजट 2026-27 में टैक्स नियमों को और सख्त कर दिया गया है. अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट देर से देने पर ₹75000 से लेकर ₹150000 तक का जुर्माना लग सकता है. इनकम टैक्स रिटर्न समय पर दाखिल नहीं करने पर भी जुर्माना तय किया गया है. टैक्स स्टेटमेंट और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन रिपोर्ट में देरी पर रोजाना जुर्माना लगेगा.

बजट 2026-27 में टैक्स नियमों को और सख्त कर दिया गया है. Image Credit: Freepik

Tax audit penalty: वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में टैक्स को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट या इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने में देरी करना महंगा साबित हो सकता है. नए नियमों के तहत छोटी सी चूक पर भी भारी जुर्माना देना पड़ सकता है. ये बदलाव कारोबारियों, पेशेवरों और आम टैक्सपेयर्स सभी के लिए अहम हैं. आइए समझते हैं कि कौन सी गलती पर कितना जुर्माना देना होगा.

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट देर से देने पर जुर्माना

यदि किसी व्यक्ति को टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य है और वह समय पर ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं करता है तो अब उस पर सीधा जुर्माना लगेगा. एक महीने तक की देरी पर ₹75000 की फीस देनी होगी. अगर देरी एक महीने से अधिक होती है तो जुर्माना बढ़कर ₹150000 तक पहुंच जाएगा. यह प्रावधान बजट 2026 में लागू किया गया है.

रिटर्न समय पर दाखिल न पर

जो टैक्सपेयर तय तारीख तक इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करता है, उस पर भी जुर्माना लगेगा. यदि कुल आय ₹500000 तक है तो ₹1000 का जुर्माना देना होगा. वहीं कुल इनकम ₹500000 से अधिक होने पर ₹5000 का जुर्माना देना पड़ेगा. यह नियम सभी कैटेगरी के टैक्सपेयर्स पर लागू होगा.

9 महीने बाद रिटर्न दाखिल करने पर नियम

यदि कोई व्यक्ति टैक्स वर्ष समाप्त होने के 9 महीने बाद रिटर्न दाखिल करता है तो भी वही जुर्माना लागू होगा. ₹500000 तक की इनकम पर ₹1000 और ₹500000 से अधिक इनकम पर ₹5000 का जुर्माना देना होगा. सरकार का उद्देश्य देर से रिटर्न दाखिल करने की आदत पर रोक लगाना है.

टैक्स स्टेटमेंट जमा न करने पर भी जुर्माना

यदि कोई व्यक्ति जरूरी टैक्स स्टेटमेंट तय समय पर जमा नहीं करता है तो हर दिन ₹200 का जुर्माना लगेगा. यह जुर्माना तब तक जोड़ा जाएगा जब तक स्टेटमेंट जमा नहीं हो जाती. हालांकि कुल जुर्माना उस टैक्स राशि से अधिक नहीं होगा जो काटी या वसूली जानी थी.

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फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन रिपोर्ट से जुड़ा नियम

यदि फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन या रिपोर्टेबल अकाउंट की जानकारी समय पर नहीं दी जाती है तो भी प्रतिदिन ₹200 का जुर्माना लगेगा. यह जुर्माना अधिकतम ₹100000 तक सीमित रहेगा. इस नियम का मकसद बड़े ट्रांजेक्शन में ट्रांसपेरेंसी और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना है.