वाराणसी और पटना में अब पानी के जहाजों की होगी मरम्मत, बजट में हुआ ऐलान; दुनिया में मिलेगी बड़ी पहचान
बजट 2026 में सरकार ने वाराणसी और पटना को बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सौगात दी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोनों शहरों में Ship Repair Ecosystem विकसित करने की घोषणा की, जिससे इनलैंड वॉटरवेज नेटवर्क को मजबूती मिलेगी. गंगा नदी के किनारे स्थित इन शहरों में यह परियोजना लॉजिस्टिक्स, नदी आधारित व्यापार और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देगी.
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में गंगा बेल्ट और पूर्वी भारत को बड़ी सौगात देते हुए केंद्र सरकार ने वाराणसी और पटना के लिए अहम घोषणा की है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान इन दोनों शहरों में शिप रिपेयर इकोसिस्टम विकसित करने का ऐलान किया. इस फैसले को इनलैंड वॉटरवेज, लॉजिस्टिक्स और नदी आधारित व्यापार को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. सरकार का उद्देश्य केवल जहाजों की मरम्मत सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण औद्योगिक और सर्विस इकोसिस्टम खड़ा करना है.
क्यों चुने गए वाराणसी और पटना
वाराणसी और पटना दोनों ही शहर गंगा नदी के किनारे स्थित हैं और इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के अहम केंद्र माने जाते हैं. पिछले कुछ वर्षों में गंगा जलमार्ग पर कार्गो और यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं. ऐसे में इन शहरों में शिप रिपेयर इकोसिस्टम विकसित होने से इनलैंड वॉटरवेज पर चलने वाले जहाजों को स्थानीय स्तर पर मरम्मत और मेंटेनेंस की सुविधा मिलेगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी.
क्या होगा शिप रिपेयर इकोसिस्टम में खास
बजट में जिस शिप रिपेयर इकोसिस्टम की बात की गई है, वह सिर्फ डॉक या रिपेयर यार्ड तक सीमित नहीं रहेगा. इसके तहत जहाजों की मरम्मत, मेंटेनेंस, स्पेयर पार्ट सप्लाई, टेक्निकल सर्विस, स्किल्ड मैनपावर और ट्रेनिंग फैसिलिटी को एक ही क्लस्टर में विकसित किया जाएगा. इससे इनलैंड वॉटरवेज पर ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा.
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बूस्ट
इस परियोजना से वाराणसी और पटना की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है. शिप रिपेयर इकोसिस्टम के निर्माण और संचालन से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. इंजीनियरिंग, वेल्डिंग, मैकेनिकल सर्विस, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट सर्विस जैसे सेक्टर में नए अवसर खुलेंगे. इसके अलावा छोटे और मझोले उद्यमों को भी इस इकोसिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा.
इनलैंड वॉटरवेज को मिलेगी मजबूती
सरकार लंबे समय से सड़क और रेल के साथ-साथ जलमार्ग को भी मजबूत विकल्प के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है. इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट न केवल सस्ता है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी ज्यादा टिकाऊ माना जाता है. शिप रिपेयर इकोसिस्टम के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इनलैंड वॉटरवेज पर चलने वाले जहाजों को बेहतर मेंटेनेंस और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सर्विस मिल सके.
पूर्वी भारत के विकास की बड़ी कड़ी
राजनीतिक और क्षेत्रीय नजरिए से भी यह घोषणा अहम मानी जा रही है. वाराणसी और पटना जैसे शहरों को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से जोड़कर सरकार पूर्वी भारत में विकास की रफ्तार तेज करना चाहती है. इससे गंगा कॉरिडोर के आसपास औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और इन क्षेत्रों को लॉजिस्टिक्स और ट्रेड हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.
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