सड़क हादसे में घायलों पर सरकार का मरहम, नहीं देना होगा मुआवजे पर टैक्स, ब्याज पर नहीं कटेगा TDS
सड़क दुर्घटना के मामलों में बीमा क्लेम को लेकर अक्सर पीड़ितों को लंबा इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में सरकार ने बजट 2026-27 में बड़ी राहत का ऐलान किया है. मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे के ब्याज को अब आयकर से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है, जिससे पीड़ितों और उनके परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा.
No Income Tax On Interest From Motor Accident Compensation: दुर्घटना के दौरान कई बार इंश्योरेंस कंपनियां ग्राहकों को क्लेम की राशि देने में देरी करती हैं या किसी विवाद के कारण क्लेम की राशि अटका देती हैं. विवाद होने पर मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) के पास जाता है. सुनवाई के दौरान यदि फैसला इंश्योरेंस होल्डर के पक्ष में आता है, तो बीमा कंपनियों को ग्राहकों को क्लेम की राशि देनी होती है. साथ ही, देरी होने पर इंश्योरेंस की राशि पर ब्याज भी मिलता है. अब तक इस ब्याज राशि पर टैक्स और TDS लगाया जाता है.
अब बजट 2026-27 में सड़क दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देने का प्रस्ताव किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स से पूरी तरह मुक्त होगा. यानी अब इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.
अब मुआवजे के ब्याज पर नहीं देना होगा टैक्स
मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत दुर्घटना में मृत्यु, जीवन भर के लिए विकलांगता या गंभीर चोट की स्थिति में ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए मुआवजे पर जो ब्याज मिलता है, उसे अब टैक्स से छूट दी जाएगी. यह छूट पीड़ित व्यक्ति या उसके कानूनी वारिस दोनों पर लागू होगी.
ब्याज पर TDS भी नहीं काटा जाएगा
सरकार ने यह भी साफ किया है कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए मुआवजे के ब्याज पर अब TDS (Tax Deduction at Source) नहीं की जाएगी. यानी पीड़ितों को पूरा ब्याज मिलेगा और किसी तरह की टैक्स कटौती नहीं होगी.
कब से लागू होगा नया नियम
यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसका असर टैक्स वर्ष 2026-27 और उसके बाद के सभी वर्षों पर पड़ेगा. सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों की आर्थिक परेशानियों को कम करना है.
कब मिलता है मोटर एक्सीडेंट का क्लेम?
मोटर एक्सीडेंट का क्लेम तभी मिलता है जब मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) केस की सुनवाई पूरी कर अपना आदेश देता है. एक्सीडेंट के बाद FIR, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार वाले MACT में दावा दायर करते हैं. ट्रिब्यूनल जांच और सुनवाई के बाद मुआवजे की राशि तय करता है, जिसके बाद बीमा कंपनी तय समय में मुआवजे की रकम और उस पर ब्याज पीड़ित या उसके कानूनी वारिस के बैंक खाते में जमा करती है. आम तौर पर यह प्रक्रिया कुछ महीनों से लेकर एक–दो साल तक लग सकती है.
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