140 करोड़ की आबादी, लेकिन इंश्योरेंस अभी भी दूर; फाइनेंशियल लिटरेसी सबसे बड़ी चुनौती

मनी9 फाइनेंशियल फ्रीडम समिट 2026 में ‘इंश्योरेंस फॉर ऑल बाय 2047’ के लक्ष्य पर चर्चा हुई. पीबी फिनटेक के डायरेक्टर राजीव गुप्ता और बंधन लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एंड सीईओ सतीश्वर बी ने बताया कि भारत में इंश्योरेंस की पहुंच बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी है. उन्होंने कहा कि बैंकिंग और टेलिकॉम रेवोल्यूशन के बाद अब इंश्योरेंस रेवोल्यूशन की जरूरत है.

मनी9 फाइनेंशियल फ्रीडम समिट Image Credit: money9live.com

Money9 Financial Freedom Summit 2026: मनी9 फाइनेंशियल फ्रीडम समिट 2026 में देश के हर नागरिक तक बीमा पहुंचाने के लक्ष्य पर अहम चर्चा हुई. ‘इंश्योरेंस फॉर ऑल बाय 2047’ विषय पर पीबी फिनटेक के डायरेक्टर राजीव गुप्ता और बंधन लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एंड सीईओ सतीश्वर बी ने बीमा सेक्टर की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार साझा किए.

फाइनेंशियल लिटरेसी सबसे बड़ी समस्या

सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि इंश्योरेंस की पहुंच लोगों तक बढ़े, लेकिन इसमें गिरावट देखने को मिल रही है. पिछले साल यह जहां 4 फीसदी था, वहीं इस साल घटकर 3.77 फीसदी पहुंच गया है. सरकार की कोशिशों के बावजूद इंश्योरेंस मोमेंटम क्यों नहीं पकड़ रहा है और लोग इससे दूर क्यों हैं, इस सवाल का जवाब राजीव गुप्ता ने दिया. उन्होंने बताया कि हमने बैंकिंग रेवोल्यूशन देखा, टेलिकॉम रेवोल्यूशन देखा, लेकिन अभी इंश्योरेंस रेवोल्यूशन बाकी है.

उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या 140 करोड़ है, जिसमें से 30-40 करोड़ लोग सरकार की सोशल सिक्योरिटी स्कीम के तहत कवर हैं, वहीं लगभग 20 करोड़ लोगों ने खुद की पॉलिसी खरीदी है. लेकिन इस देश में असली समस्या मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास और टीयर 3, टीयर 4 शहरों में बैंकिंग प्रोडक्ट, फाइनेंशियल प्रोडक्ट और इंश्योरेंस लिटरेसी की कमी है.

किस तरह का प्रोडक्ट चाहिए, इसकी जागरूकता जरूरी

एक बीमारी लोगों को बैंकक्रप्ट बना देती है. लोग जानते हैं कि मेडिकल और लाइफ इंश्योरेंस जरूरी है, फिर भी अभी वे इससे दूर क्यों हैं. इस सवाल का जवाब देते हुए सतीश्वर बी ने सबसे पहले वॉलीवुड को थैंक्स कहा, जिसकी वजह से इंश्योरेंस को लेकर जागरूकता बढ़ी है. उन्होंने कहा कि समस्या जागरूकता की नहीं है, बल्कि इस बात की है कि लोगों को यह नहीं पता कि उन्हें किस तरह का प्रोडक्ट चाहिए और उनकी असली जरूरत क्या है.

AI की मदद से काम हो रहा आसान

सतीश्वर बी ने पॉलिसी डॉक्युमेंट के बारे में बताते हुए कहा कि जब आपको कोई पॉलिसी डॉक्युमेंट मिलता है, तो उसमें कई तरह की शर्तें और विवरण होते हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं होता. एक सरल उदाहरण के तौर पर मेडिकल इलस्ट्रेशन को ही देख लें. इसे समझने के लिए आपको चार्टर्ड अकाउंटेंट या फाइनेंस के बड़े एक्सपर्ट होने की जरूरत नहीं होती. यह काफी सरल होता है, लेकिन फिर भी यह दो पेज का होता है. कई बार ऐसा लगता है कि यह पेज काफी भरा हुआ है या बहुत व्यस्त दिखता है.

लेकिन अगर आप उसे ध्यान से पढ़ें तो आप पूरे प्रोडक्ट को अच्छी तरह समझ सकते हैं. अब हम जो कोशिश कर रहे हैं, वह यह है कि इन बीआई को एक मिनट के वीडियो में बदला जाए. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह काम संभव हो रहा है. यह वीडियो रियल टाइम में बनता है और पूरी तरह कस्टमाइज्ड होता है. यह कोई सैंपल बीआई नहीं होता, बल्कि वही बीआई होता है जिसे आपने चुना है.

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