SIP, Asset Allocation और Global Diversification में कैसा रखें अप्रोच? एक्सपर्ट्स ने बताया लॉन्ग टर्म निवेश पोर्टफोलियो स्ट्रैटजी
Money9 Financial Freedom Summit 2026 में बाजार की मौजूदा स्थिति, निवेश रणनीति और भविष्य के अवसरों पर गहन चर्चा हुई. Devina Mehra, Swarup Mohanty और Pankaj Razdan ने बताया कि इक्विटी निवेश में धैर्य, सही एसेट एलोकेशन और वैश्विक विविधीकरण बेहद जरूरी है. साथ ही उन्होंने निवेशकों को बाजार की अस्थिरता से घबराने के बजाय लंबे समय का नजरिया अपनाने की सलाह दी.
Money9 Financial Freedom Summit 2026 में जब बाजार की मौजूदा उथल-पुथल, गिरते पोर्टफोलियो और निवेशकों की बढ़ती चिंता की बात हुई तो मंच पर मौजूद विशेषज्ञों ने साफ संदेश दिया, बाजार की अस्थिरता निवेश का स्वाभाविक हिस्सा है और इससे घबराने के बजाय लंबी अवधि का नजरिया रखना जरूरी है. “बेमिसाल भारत: कैसे बनोगे करोड़पति” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में First Global की चेयरपर्सन देविना मेहरा, Mirae Asset के स्वरूप मोहंती और Razdan Consulting के CMD पंकज राजदान ने निवेश रणनीति, बाजार की दिशा और भारत की आर्थिक संभावनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी. इस सत्र का संचालन Money9 की एडिटर प्रियंका संभव ने किया.
SIP में धैर्य जरूरी, जल्दी निकलने से नहीं मिलता कंपाउंडिंग का फायदा
First Global की चेयरपर्सन देविना मेहरा ने कहा कि निवेशकों की सबसे बड़ी गलती यह है कि वे लंबी अवधि के निवेश को बीच में ही छोड़ देते हैं. उनके मुताबिक कागज पर दिखने वाली कंपाउंडिंग का फायदा तभी मिलता है जब निवेशक लंबे समय तक निवेश में टिके रहें.
उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर निवेशक दो साल के भीतर ही अपनी स्कीम से बाहर निकल जाते हैं. ऐसे में असली रिटर्न कभी मिल ही नहीं पाता. देविना मेहरा का कहना था कि इक्विटी में वही पैसा लगाना चाहिए जिसकी जरूरत आठ से दस साल तक न पड़े. यही लंबी अवधि का नजरिया निवेश को सफल बनाता है.
उन्होंने यह भी बताया कि इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है जब कई साल तक बाजार में खास रिटर्न नहीं मिला, लेकिन बाद के वर्षों में बड़ी तेजी आई. इसलिए SIP को बीच में रोकना निवेशकों के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
एसेट एलोकेशन भावनाओं से नहीं, गणित से तय होना चाहिए
देविना मेहरा ने कहा कि निवेश का सबसे अहम सिद्धांत सही एसेट एलोकेशन है. उनके मुताबिक किसी भी निवेशक का पूरा पैसा इक्विटी में नहीं होना चाहिए, क्योंकि बाजार कई साल तक स्थिर भी रह सकता है.
उन्होंने कहा कि निवेशकों को अक्सर अपने व्यवहारिक पक्षपात से भी बचना चाहिए. कई लोग हाल की परफॉर्मेंस देखकर निवेश करते हैं और उसी आधार पर फैसले लेते हैं. यही वजह है कि निवेशकों को अक्सर उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिल पाता.
ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन से कम होता है जोखिम
पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि निवेशकों को सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहिए. Razdan Consulting के CMD पंकज राजदान ने कहा कि दुनिया की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में भारत की हिस्सेदारी अभी भी बहुत कम है, इसलिए निवेश पोर्टफोलियो में वैश्विक विविधीकरण जरूरी है.
उनके मुताबिक तकनीक, एआई और वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलाव आने वाले समय में निवेश के नए अवसर पैदा करेंगे. इसलिए निवेशकों को बड़े वैश्विक ट्रेंड को समझकर पोर्टफोलियो बनाना चाहिए.
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भारत की ग्रोथ स्टोरी निवेशकों के लिए बड़ा अवसर
Mirae Asset के स्वरूप मोहंती ने कहा कि भारत आज दुनिया की उन चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं में है जो 6 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ रही हैं. बड़ी आबादी, युवा जनसंख्या और तेजी से बढ़ती खपत भारत को लंबी अवधि में निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं.
उन्होंने कहा कि अगर कोई निवेशक 12 प्रतिशत की गिरावट या कुछ महीनों तक रिटर्न न मिलने से घबरा जाता है, तो उसे इक्विटी बाजार की प्रकृति को समझने की जरूरत है.
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