कम EMI के चक्कर में न फंसे, जानें कैसे बढ़ जाता है लोन का कुल खर्च

कम EMI का विकल्प देखने में आसान लगता है लेकिन लंबे समय में यह महंगा साबित हो सकता है. कम EMI के लिए लोन की अवधि बढ़ानी पड़ती है जिससे कुल ब्याज बढ़ जाता है. खासकर होम लोन में यह फर्क और ज्यादा दिखता है. ऐसे में जरूरी है कि लोग सिर्फ मासिक खर्च नहीं बल्कि कुल भुगतान को समझें. सही योजना के साथ लिया गया लोन ही फायदे का सौदा बन सकता है.

कम EMI के चक्कर में न फंसे, जानें कैसे बढ़ जाता है लोन का कुल खर्च
कम EMI क्यों लगती है आसान आजकल लोग महंगे सामान खरीदने के लिए EMI का सहारा लेते हैं. कम EMI का ऑप्शन इसलिए पसंद आता है क्योंकि इससे हर महीने का खर्च कम लगता है. लेकिन यह सिर्फ शुरुआत में राहत देता है. लंबे समय में इसका असर अलग होता है. यही कारण है कि लोग असली लागत समझ नहीं पाते.
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कम EMI के चक्कर में न फंसे, जानें कैसे बढ़ जाता है लोन का कुल खर्च
कम EMI का असली गणित अगर आप लोन की अवधि बढ़ाते हैं तो EMI कम हो जाती है. लेकिन इसके साथ ही ब्याज का बोझ बढ़ जाता है. यानी आप हर महीने कम देते हैं लेकिन कुल मिलाकर ज्यादा पैसा चुकाते हैं. यही EMI का ट्रैप है जिसे समझना जरूरी है.
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कम EMI के चक्कर में न फंसे, जानें कैसे बढ़ जाता है लोन का कुल खर्च
ज्यादा समय मतलब ज्यादा ब्याज लोन में ब्याज बचे हुए अमाउंट पर लगता है. जब समय ज्यादा होता है तो मूलधन धीरे धीरे कम होता है. इससे लंबे समय तक ब्याज जुड़ता रहता है. यही वजह है कि लंबी अवधि में कुल पेमेंट काफी बढ़ जाती है.
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होम लोन में सबसे ज्यादा असर होम लोन आमतौर पर 15 से 25 साल के लिए लिया जाता है. ऐसे में कम EMI का लालच और बढ़ जाता है. लेकिन लंबे समय में ब्याज बहुत ज्यादा हो जाता है. कई बार आप मूलधन से दोगुना तक चुका देते हैं.
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कब सही है कम EMI अगर आपकी आय स्थिर नहीं है या कैश फ्लो की समस्या है तो कम EMI मदद कर सकती है. इसके अलावा अगर आप बची हुई रकम को सही जगह निवेश करते हैं तो फायदा हो सकता है. इसलिए हर स्थिति में कम EMI गलत नहीं होती.
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कम EMI के चक्कर में न फंसे, जानें कैसे बढ़ जाता है लोन का कुल खर्च
सही फैसला कैसे लें लोन लेते समय सिर्फ EMI नहीं बल्कि कुल पेमेंट पर ध्यान दें. कोशिश करें कि लोन जल्दी खत्म हो. अपनी आय और खर्च के हिसाब से सही अवधि चुनें. यही समझदारी आपको फाइनेंशियल नुकसान से बचाएगी.
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