तेल उत्पादक देशों के गुट में आई बड़ी दरार! UAE ने छोड़ा OPEC और OPEC+; एनर्जी मार्केट में मची हलचल
वैश्विक तेल बाजार में बड़ा झटका लगा है. यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने OPEC और OPEC+ से बाहर होने का ऐलान कर दिया है. इस फैसले से कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक सप्लाई और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है. पश्चिमी एशिया तनाव, ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच आया यह फैसला निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
UAE Exits OPEC: मंगलवार को वैश्विक तेल बाजार से बड़ी खबर सामने आई है, जो तेल मार्केट के लिए काफी अहम मानी जा रही है. यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने तेल उत्पादक देश के संगठन OPEC और OPEC+ से बाहर होने का ऐलान कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पश्चिमी एशिया में तनाव, ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट के कारण ऊर्जा बाजार पहले से दबाव में है. UAE का यह कदम तेल उत्पादक देशों के इस प्रभावशाली समूह के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. UAE लंबे समय से OPEC का सदस्य रहा है. ऐसे में उसका बाहर निकलना संगठन की एकजुटता और भविष्य की रणनीति पर सवाल खड़े कर सकता है. माना जा रहा है कि इससे उत्पादन कोटा, कीमत नियंत्रण और बाजार हिस्सेदारी को लेकर नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो सकती है.
क्यों लिया गया यह फैसला
UAE के ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल-मजरूई ने रॉयटर्स को बताया कि यह फैसला देश की मौजूदा और भविष्य की ऊर्जा नीतियों की समीक्षा के बाद लिया गया है. उन्होंने साफ कहा कि यह एक नीति आधारित निर्णय है और उत्पादन स्तर, निवेश योजनाओं तथा भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर लिया गया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या UAE ने OPEC के नेता सऊदी अरब से परामर्श किया था, तो उन्होंने कहा कि UAE ने किसी अन्य देश के साथ यह मुद्दा नहीं उठाया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि UAE अब अपनी उत्पादन क्षमता पर स्वतंत्र रूप से काम करना चाहता है. OPEC के भीतर उत्पादन कोटा के कारण सदस्य देशों को कई बार अपनी क्षमता से कम उत्पादन करना पड़ता है. UAE के पास दुनिया के सबसे कम लागत वाले और अपेक्षाकृत कम कार्बन उत्सर्जन वाले तेल भंडार हैं, इसलिए वह अब खुले बाजार में अधिक आक्रामक भूमिका निभा सकता है.
तेल बाजार पर क्या असर होगा
OPEC और OPEC+ वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करते हैं. UAE जैसे बड़े उत्पादक के बाहर होने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है. अगर UAE उत्पादन बढ़ाता है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आ सकता है. दूसरी ओर, अगर पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ता है और सप्लाई बाधित होती है, तो कीमतें फिर उछल सकती हैं.
होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम है
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है. वैश्विक कच्चे तेल और LNG का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ईरान से जुड़े तनाव के कारण इस मार्ग पर पहले ही खतरा बना हुआ है. ऐसे में UAE का OPEC से बाहर होना ऊर्जा बाजार की चिंता और बढ़ा सकता है.
अमेरिका के लिए बड़ी जीत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE का यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए रणनीतिक जीत माना जा रहा है. ट्रंप पहले भी OPEC पर तेल कीमतें ऊंची रखने के आरोप लगाते रहे हैं. ट्रंप ने 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में संगठन पर तेल की कीमतों को बढ़ाकर “बाकी दुनिया को लूटने” का आरोप लगाया था.
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